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जहां खड़ा रहना भी होता है मुश्किल वहां यह शख्स दिखाता है ऐसे खतरनाक स्टंट

जहां खड़ा रहना भी होता है मुश्किल वहां यह शख्स दिखाता है ऐसे खतरनाक स्टंट

SUNIL CHOUDHARY | Last Modified - Feb 14, 2018, 02:13 PM IST

जोधपुर। तेज हवा के बीच मेहरानगढ़ फोर्ट की 150 मीटर ऊंची प्राचीर पर खड़ा हो शहर को निहारने की हिम्मत हर कोई नहीं जुटा पाता, लेकिन जोधपुर का एक शख्स इसी प्राचीर पर अपनी बाइक पर योग के ऐसे हैरत अंगेज स्टंट(आसन्न) करता है कि लोगों आश्चर्य में दांतों तले अंगुली दबा लेते है। ये है सत्तर वर्षीय खींवराज गुर्जर। बरसों से ऐसे करतब दिखाने वाले गुर्जर ने बुधवार को मेहरानगढ़ की प्राचीर पर अपनी योग क्षमता का प्रदर्शन किया। कैसे करते है योग...


- पहाड़ों की खतरनाक चोटियों व मेहरानगढ़ फोर्ट की प्राचीर पर अपनी साइकिल पर पर योग करते समय एक गलती उनकी जान ले सकती है, लेकिन वे ऐसा नहीं मानते। खींवराज का मानना है कि पहली बात तो यह कि ये कोई स्टंट नहीं है बल्कि एक तरह का पावर योग है। योग करते समय उनका पूरा ध्यान सिर्फ उसी पर होता है न कि वहां से नीचे गिरने का डर। इसमें डर के लिए कोई जगह ही नहीं है। मैं इन चोटियों पर कैसे भी अपनी साइकिल से योग कर सकता हूं। मुझे स्वयं पर पूर्ण विश्वास है कि मैं कभी इससे नीचे नहीं गिरूंगा। हालांकि उनके घर वाले हमेशा डरते रहते है।
- अपनी इस बीएमडब्ल्यू बाइक पर वे सात मिनट में 47 अलग-अलग तरह की पोजिशन बना लेते है। इनमें से योग के पच्चीस आसन्न शामिल है। इसके अलावा वे आठ तरह से अपनी बैलेंसिंग स्किल को भी प्रदर्शित करते है।


ऐसे हुई शुरुआत


- देश के ख्यातनाम साइक्लिस्ट रह चुके खींवराज अपने बचपन में शहर के बाहर की तरफ फैली इन पहाड़ियों पर भटकते थे। इन पहाड़ियों ने उन्हें हमेशा आकर्षित किया, लेकिन उन्होंने कभी इस पहाड़ियों पर स्टंट करने की नहीं सोची। बाद में उन्हें साइकिल रेस का शौक लगा। इसके बाद उन्होंने साइकिल पर योग के विभिन्न आसन्न करना शुरू किए।
- साइकिल पर शरीर को साधने में माहिर होने के बाद उन्हें इन पहाड़ियों पर करने का विचार आया। बीस बरस से वे इन पहाड़ियों की खतरनाक चोटियों पर रोजाना अपनी साइकल के साथ अभ्यास करते नजर आ जाते है। उन्हें इस तरह खतरनाक स्थान पर साइकिल पर इस तरह से योग करते देख लोग घबरा जाते है कि अब गिरे, लेकिन ऐसा होता नहीं है। उनका यह योग बरसों से अनवरत जारी है।


योग के दम पर सदमें से उबरे


- सवा तीन बरस पूर्व एक सड़क हादसे में उन्होंने अपने इकलौते पुत्र, पौत्र व पत्नी को खो दिया। इस हादसे ने उन्हें तोड़ कर रख दिया। लंबे अरसे तक गमगीन रहने के बाद उन्होंने एक बार फिर अपनी साइकिल को उठाया और योग करने में जुट गए। योग ने इस सदमें से उबरने में बहुत मदद की।

सभी फोटो एल देव जांगिड़

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