जोधपुर

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जब एक डाकू की मदद से सैनिक बने एक महाराजा ने पाकिस्तान के सौ गांवों पर जमा लिया कब्जा

जब एक डाकू की मदद से सैनिक बने एक महाराजा ने पाकिस्तान के सौ गांवों पर जमा लिया कब्जा

Dainik Bhaskar

Dec 06, 2017, 03:56 PM IST
छाछरो युद्ध की सफलता के लिए जय छाछरो युद्ध की सफलता के लिए जय

जोधपुर। वर्ष 1971 के भात-पाक युद्ध के दौरान पश्चिमी सीमा पर कई महत्वपूर्ण युद्ध लड़े गए। इनमें पाकिस्तान के सिंध प्रांत के छाछरो सहित बहुत बड़े भू भाग पर भारतीय सेना ने कब्जा जमा लिया था। इस युद्ध की खासियत यह थी कि एक महाराजा ने एक डाकू की मदद से यह युद्ध जीता। महाराजा थे जयपुर के सवाई भवानी सिंह और उनका साथ निभाया थार के रेगिस्तान के दुर्दांत डाकू बलवंत सिंह बाखासर ने। महाराजा को मिला एक डाकू का साथ...


- बाड़मेर जिले के रहने वाले बलवंत सिंह बाखासर ने अपने साथ हुए अन्याय का बदला लेने के लिए हथियार उठा रखे थे। बाड़मेर, इससे सटे गुजरात और पाकिस्तान के सिंध में उनका खौफ था। लोग उनके नाम से घबराते थे। पाकिस्तान में सौ किलोमीटर के अंदर तक के पूरे क्षेत्र के चप्पे-चप्पे से वे वाकिफ थे।
- वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान जयपुर के महाराजा सवाई भवानी सिंह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर थे। 10 पैरा कमांडो टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए उन्हें पाकिस्तान में प्रवेश कर हमला करने का आदेश मिला। भवानी सिंह ने डाकू बलवंत सिंह के बारे में सुन रखा था कि उन्हें पाकिस्तान के पूरे क्षेत्र की जानकारी है।
- उन्होंने बलवंत सिंह से मदद मांगी तो वे सहयोग को तैयार हो गए। भवानी सिंह ने एक बटालियन व चार वाहन बलवंत सिंह के हवाले कर दी। और स्वयं एक अन्य बटालियन को साथ लेकर पाकिस्तान में प्रवेश कर गए।
- रेगिस्तान के गुप्त रास्तों से होकर सात दिसम्बर 1971 को सुबह इस टुकड़ी ने सिंध के छाछरो पर भीषण हमला बोल दिया। इस अप्रत्याशित हमले से दुश्मन को संभलने तक का अवसर नहीं मिला।
- भारतीय सेना ने छाछरो, विरवाह, इस्लामकोट और नगरपार सहित सौ गांवों पर कब्जा जमा लिया। इस युद्ध में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और सत्रह सैनिकों को पकड़ लिया गया। खासियत की बात यह रही कि इस हमले में एक भी भारतीय सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा।

ऐसे मिला सम्मान


- युद्ध में साहसिक प्रदर्शन के लिए महाराजा सवाई भवानी सिंह को महावीर चक्र प्रदान किया गया। वहीं 10 पैरा को बैटल ऑनर छाछरो प्रदान किया गया।
वहीं भारतीय सेना को सहायता प्रदान करने वाले डाकू बलवंत सिंह के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस ले लिया गया। साथ ही उन्हें दो हथियार रखने का लाइसेंस भी प्रदान किया गया।

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