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इन बातों को रखेंगे ध्यान तो बेबी मून बन जाएगा यादगार

इन बातों को रखेंगे ध्यान तो बेबी मून बन जाएगा यादगार

SUNIL CHOUDHARY | Last Modified - Nov 14, 2017, 10:32 AM IST

जोधपुर।प्रेगनेंट महिलाओं के लिए अगले कुछ माह बहुत महत्वपूर्ण होते है। अपने पार्टनर के साथ बच्चों के बगैर समय गुजारने का यह अंतिम अवसर होता है। कई कपल इस दौरान शांति के साथ घर में समय बिताना पसंद करते है तो कई कपल चाइल्ड फ्री टूर यानि कि बेबी मून पर निकल पड़ते है। आइये हम आपको बताते है कि बेबी मून पर घर से रवाना होने से पूर्व किन सावधानियों को बरते ताकि प्रेगनेंसी के दौरान भी आपकी यात्रा आरामदायक बनी रहे और आपका बेबी मून एक यादगार लम्हा बन सके।इन बातों का रखे ध्यान...

स्थानीय डेस्टिनेशन को दे प्राथमिकता
- बेबी मून के लिए घूमने के स्थान का चयन बहुत सावधानी से किया जाए। हो सके तो यह देश में ही हो और बहुत अधिक लम्बी यात्रा नहीं हो। साथ ही ऐसे स्थान का चयन करे जहां आपको शांति महसूस हो। साथ ही वहां के मौसम का ध्यान में रख अपना यात्रा प्रोग्राम फाइनल करे। ताकि पति-पत्नी एक साथ क्वालिटी टाइम गुजार सके।

प्रदूषण और अन्य बीमारियों का पहले से हो पता
- स्थान चयन में इस बात का ध्यान रखे कि कहीं वहां कोई संक्रामक रोग तो नहीं फैला हुआ है। साथ ही डेंगू या चिकनगुनिया का रोग यदि उन शहरों में अधिक हो तो वहां नहीं जाने में ही भलाई है। बेबी मून के डेस्टिनेशन का प्रदूषण लेवल भी अवश्य पता कर ले।

पहले से कर ले पता
- कई एयर लाइन और क्रूज ने प्रेगनेंट महिलाओं की यात्रा को लेकर कुछ नियम बना रखे है। इस कारण इनका पहले से पता कर ले कि वे आपको बैठने की अनुमति प्रदान करेंगे या नहीं। अमूमन एयर लाइंस कंपनियां 36 सप्ताह तक विमान में बैठने की अनुमति प्रदान कर देती है। वहीं क्रूज में 26 सप्ताह तक की प्रेगनेंट महिलाओं को ही बैठाया जाता है।

कम से कम हो यात्रा
- बेबी मून प्रोग्राम तय करते समय ध्यान रखे कि यात्रा की अवधि अधिक लम्बी नहीं हो। अन्यथा लगातार बैठे रहने से कुछ दिक्कत हो सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण कि कब निकले बेबी मून पर
- प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिलाओं को कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। तीन माह के दौरान वे शरीर में आए बदलाव की अभ्यस्थ हो जाती है। ऐसे में बेहतर यही रहेगा कि दूसरी तिमाही यानि चौथे से छठे माह के बीच में अपना बेबी मून प्लान करे। विशेषज्ञों के अनुसार 18 से 24 वे सप्ताह के बीच यात्रा करना सबसे सुरक्षित रहता है।

पहले ले अपने डॉक्टर से अनुमति
- प्रेगनेंट महिलाओं को यात्रा के दौरान कई नई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है प्रेगनेंट महिला की सुरक्षा। ऐसे में बेबी मून का प्लान बनाने के साथ ही अपने डॉक्टर से अवश्य सलाह ले और उनकी बताई सलाह पर अवश्य अमल करे। यदि वे छोटी यात्रा की अनुमति दे तो उसे फॉलो करे।

नहीं भूले टीकाकरण
- बेबी मून पर रवाना होने से पूर्व प्रेगनेंसी के दौरान लगाए जाने वाले विभिन्न तरह के टीको को इग्नोर नहीं किया जाए।

उपलब्ध हो बेहतरीन चिकित्सा सुविधा
- बेबी मून के डेस्टिनेशन पर किस तरह की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध है उनका पहले से पता कर ले। हो सके तो उन हॉस्पिटल्स के नंबर अपनी डायरी में लिख ले, ताकि किसी प्रकार की इमरजेंसी में कॉल किया जा सके।

सीट बेल्ट को बांधे थोड़ा नीचे
- कार या हवाई सफर के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखे कि सीट बेल्ट बहुत अधिक टाइट और पेट के ऊपर नहीं बंधा हो। इसे पेट से थोड़ी नीचे की तरफ बांधना बेहतर रहेगा। साथ ही आपकी सीट कार के डैश बोर्ड से जितना अधिक दूर रह सके उतना ही बेहतर रहेगा।

नहीं जाए बगैर डॉक्टर के समुद्री यात्रा पर
- समुद्री यात्रा पर यदि जाने का प्रोग्राम हो तो ध्यान रखे कि आपके क्रूज पर डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध हो। कई छोटे क्रूज पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती है।
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