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ये है हमारी फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस, ५२ वर्ष पूर्व हुई थी स्थापना

ये है हमारी फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस, ५२ वर्ष पूर्व हुई थी स्थापना

SUNIL CHOUDHARY | Last Modified - Dec 01, 2017, 02:27 PM IST

जोधपुर। दुनिया का सबसे बड़ा अर्द्ध सैन्य संगठन सीमा सुरक्षा बल(बीएसएफ) आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है। 52 वर्ष पूर्व महज कुछ बटालियनों के साथ शुरू हुआ था इसका सफर। अब 2.57 लाख जवानों के साथ यह संगठन देश की सीमा की रक्षा कर रहा है। शांतिकाल के दौरान सीमा की रक्षा का दायित्व सेना का नहीं होकर बीएसएफ की होता है। यही कारण है कि इसे फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस कहा जाता है।सेना नहीं बीएसएफ संभालता है बॉर्डर...

 

 


- आमजन में यह धारणा है कि हमारी सीमा की रक्षा हमेशा सेना करती है, जबकि ऐसा नहीं है। शांतिकाल सेना अपनी बैरक में रहती है और लगातार अभ्यास कर स्वयं को युद्ध के लिए हमेशा तैयार रखती है। वहीं शांतिकाल के दौरान सीमा की रक्षा का दायित्व बीएसएफ के पास होता है। युद्ध शुरू होने की स्थिति में बीएसएफ का स्थान सेना ले लेती है और इसके जवान सेना के अधीन कर दिए जाते है। इन जवानों को सीमा क्षेत्र के चप्पे-चप्पे की जानकारी होती है।


इस कारण की गई बीएसएफ की स्थापना


- आजादी के बाद वर्ष 1965 तक पाकिस्तान से सटे राज्यों की पुलिस ही सीमा पर निगरानी का काम करती थी। यह सशस्त्र पुलिस इतनी सक्षम नहीं थी कि सीमा पर किसी हमले को रोक सके। यही कारण था कि 9 अप्रेल 1965 में पाकिस्तान ने कच्छ क्षेत्र में हमला बोल तीन सीमा चौकियों पर अपना कब्जा जमा लिया। इसके बाद एक केन्द्रीयकृत सुरक्षा बल की कीमा महसूस की गई। इस युद्ध के तुरंत पश्चात भारत ने अपनी सीमा की रक्षा करने के लिए एक दिसम्बर 1965 को सीमा सुरक्षा बल का गठन किया। इसमें शामिल जवानों को बेहतर तरीके से प्रशिक्षण देकर हथियार चलाना सिखाया जाता है ताकि वे सीमा की रक्षा कर सके। केएफ रुस्तमजी को इसका पहला डायरेक्टर जनरल बनाया गया।


बढ़ता गया कारवां


- वर्ष 1965 में कुछ बटालियंस के साथ इसकी स्थापना की गई। अब इसके बेड़े में 186 बटालियन में 2.57 लाख जवान है। बदलते दौर में इस संगठन की मारक क्षमता को काफी बढ़ा दिया गया है। अब इसमें आर्टिलरी रेजिमेंट के साथ कमांडो यूनिट भी है। साथ ही इसकी मैरिन यूनिट अलग से है।


हजारों किलोमीटर लम्बी सीमा का दायित्व


- बीएसएफ करीब साढ़े आठ हजार किलोमीटर लम्बे बॉर्डर की सुरक्षा करता है। इनमें पाकिस्तान से सटी सीमा एलओसी सहित करीब 3323 किलोमीटर, बांग्लादेश के साथ 4096 किलोमीटर और बर्मा के साथ 1020 किलोमीटर लम्बी सीमा है।


युद्ध में बीएसएफ करती है ये काम


- युद्ध शुरू होने पर सीमा पर सेना मोर्चा संभालती है और बीएसएफ उसकी सहयोगी की भूमिका निभाता है। कई मोर्चों पर इसके जवानों ने सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध में भाग लिया और अपनी बहादुरी के लिए कई महावीर और वीर चक्र हासिल किए।
- इसके अलावा युद्ध में सेना की ओर से दुश्मन देश की जमीन पर किए गए कब्जे की सुरक्षा की जिम्मेदारी बीएसएफ की होती है। सेना इन्हें जिम्मेदारी सौंप आगे बढ़ जाती है। इस क्षेत्र में लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी बीएसएफ की होती है।

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Web Title: ye hai hmaari frst laain auf difens, 52 vrs purv huee thi sthaapnaa
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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