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जोधपुर (भंवर जांगिड़/कमल वैष्णव). एक सप्ताह पहले नागौर में हुए इनकम टैक्स सर्वे में विभाग के ही अफसर भ्रष्टाचार करते पकड़े गए। एक मणिहारी व्यापारी के यहां हुए सर्वे में आईटीओ लक्ष्मणसिंह व इंस्पेक्टर प्रेमसुख डिडेल ने 1.11 करोड़ रुपए की अघोषित आय सरेंडर करवाई। इस पर सरकार को करीब 37 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ, लेकिन अफसरों ने लगभग इसका अाधा पैसा अपनी जेब में डालने के लिए व्यापारी को डराकर 20 लाख में सर्वे का ही सौदा कर लिया। 15 लाख रुपए ये होली से पहले ले चुके थे, जिसकी जानकारी व्यापारी व आयकर अधिकारियों की बातचीत में भी आई है। अभी तो सीबीआई ने दोनों अफसरों के साथ बिचौलिए सीए सुरेश पारीक को चार लाख लेते गिरफ्तार किया है, मगर पहले ले चुके राशि के बारे में भी पूछताछ कर रिकवरी करनी है, इसीलिए सीबीआई ने तीनों को पांच-पांच दिन के रिमांड पर लिया है। इस पूरे भ्रष्टाचार के खेल में एक ज्वॉइंट कमिश्नर की भूमिका भी जांची जाएगी, क्योंकि जब नागौर में यह लेनदेन हो रहा था, तब वे भी नागौर की एक होटल में थे। कायदे से ज्वॉइंट कमिश्नर सर्वे टीम बनाने के लिए अधिकृत हैं। जिस व्यापारी के यहां सर्वे हो रहा है, उससे मिलना खुद सवाल खड़े करता है।
सीबीआई में दी थी शिकायत
मणिहारी आइटम्स का होलसेल बिजनेस करने वाले नागौर के सदाकत अली ने सीबीआई जोधपुर में एक शिकायत दी थी। इसमें बताया कि उनके यहां गत दिनों आयकर टीम ने सर्वे किया था। इसके बाद प्रक्रिया में मदद के लिए आईटीओ लक्ष्मणसिंह, राजेंद्र मोहन मीणा व इंस्पेक्टर प्रेमसुख डिडेल नागौर के सीए सुरेश पारीक के मार्फत पांच लाख की रिश्वत मांग रहे हैं। सीबीआई ने शिकायत का सत्यापन कराया तो रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। बुधवार रात सीबीआई नागौर पहुंची और हाथी चौक इलाके में सीए पारीक को चार लाख लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम ने पारीक की आईटीओ इत्यादि से बात कराई और मूलत: जयपुर हाल नागौर आयकर कॉलोनी निवासी आईटीओ लक्ष्मणसिंह व इंस्पेक्टर प्रेमसुख डिडेल को गिरफ्तार किया।
सर्वे के ठीक सातवें दिन पकड़वाया
आयकर विभाग की टीमों ने 4 मार्च को नागौर में एक मणिहारी और जूते के एक होलसेल कारोबारी के पांच ठिकानों पर सर्वे कार्रवाई की थी, जो दूसरे दिन तक चली। इनमें मणिहारी कारोबारी के यहां 1.11 करोड़ की अघोषित आय उजागर हुई थी। कारोबारी की अघोषित आय पर 33 प्रतिशत के हिसाब से करीब 37 लाख रुपए का टैक्स और पेनल्टी निकाली गई थी। इसी कारोबारी के यहां से जब्त दस्तावेजों की जांच से और ज्यादा डिमांड नहीं निकले, इसमें मदद के लिए नागौर आयकर विभाग के आरोपी अधिकारियों ने पांच लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। इस सर्वे कार्रवाई के ठीक सातवें दिन कारोबारी ने सीबीआई में शिकायत कर दी।
मारवाड़ में दूसरा बड़ा मामला
सीबीआई जोधपुर की टीम द्वारा आयकर विभाग के अधिकारियों को रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार करने का यह दूसरा बड़ा मामला है। इससे पहले 31 मार्च 2015 को सीबीआई टीम ने जोधपुर के आईटीओ शैलेंद्र भंडारी और अगले ही दिन चीफ कमिश्नर पीके शर्मा को गिरफ्तार किया था। 15 लाख रुपए की रिश्वत के मामले में पकड़े गए ये दोनों अफसर 10 दिन की रिमांड पर रहने के बाद 40 दिन तक जेल में रहे थे।
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