धर्म-कर्म / सूरत से भगवान महावीर स्वामी की 2200 वर्ष पुरानी प्रतिमा जीरावल लाने पर बनी सहमति



रेवदर. सूरत के मंदिर में स्थित भगवान महावीर स्वामी की मूर्ति। रेवदर. सूरत के मंदिर में स्थित भगवान महावीर स्वामी की मूर्ति।
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रेवदर. सूरत के मंदिर में स्थित भगवान महावीर स्वामी की मूर्ति।रेवदर. सूरत के मंदिर में स्थित भगवान महावीर स्वामी की मूर्ति।

  • धवली मंदिर प्रकरण में संत गुणरत्नसूरीश्वर महाराज की सहमति के बाद प्रतिमा मारवाड़ लाने का निर्णय 
  • पहली बार ऐसा संयोग : 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ व 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी जीरावला तीर्थ में एक साथ

Jul 16, 2019, 03:41 AM IST

सिरोही/रेवदर. धवली जैन मंदिर को लेकर पिछले सवा महीने से चल रहा विवाद सोमवार को समाप्त हुआ। ट्रस्ट मंडल व संतों के साथ करीब 12 घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में निर्णय लिया गया कि सूरत से भगवान महावीर स्वामी की यह 2200 वर्ष पुरानी प्रतिमा को जीरावल मंदिर में विराजित किया जाएगा, जहां इसकी पूजा-अर्चना होगी।

 

इस निर्णय के बाद जीरावल में पहली बार ऐसा होगा कि जैन धर्म के दोनों मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ व भगवान महावीर के भक्तों को एक साथ दर्शन होंगे। दरअसल धवली जैन मंदिर में प्रतिमा की पूजा-अर्चना नहीं होने से ट्रस्ट की सहमति के बाद सूरत लेकर चले गए थे और वहां नवनिर्मित मंदिर में प्रतिमा को स्थापित कर दिया गया। इसके बाद मूर्ति चोरी का मामला भी दर्ज कराया गया लेकिन बाद में सामने आया कि ट्रस्ट ही इसे लेकर वहां गया था। इसके बाद इस मूर्ति को पुन: धवली लाने के लिए ट्रस्ट व स्थानीय लोगों के बीच विवाद बढ़ता गया। इसके लिए रविवार को जीरावल में ट्रस्ट अध्यक्ष रमणभाई जैन, पावापुरी ट्रस्ट, किशोर भाई संघवी और दांतराई जैन संघ के अध्यक्ष प्रकाश वी जैन की ओर से बैठक हुई।

 

इसमें धवली तीर्थ रक्षा कमेटी के संयोजक महेंद्र मूथा की ओर से प्रतिमा को फिर से लाने की बात कहीं गई। सोमवार तक इस बैठक का दौर चला। इसके बाद ट्रस्ट के कुछ सदस्य सूरत पहुंचे और यहां गच्छाधिपति आचार्य जयघोषसूरीजी के निर्देश पर आचार्य गुणरत्नसूरीजी के सानिध्य में समाज के लोगों ने चर्चा की और मूर्ति को मारवाड़ लाने की बात कहीं, जिस पर उन्होंने इसकी सहमति जताई। इससे पूर्व प्रतिमा को यहां लाने के लिए अलग-अलग दौर में 12 घंटे तक बैठक चली। सोमवार को भी दोपहर 1 बजे तक बैठक हुई, जिसमें सूरत में संतो व समाज के तीन लोगों की बनी कमेटी से वीडियो कांफ्रेंसिंग कर निर्णय लिया गया। 


निर्णायक : इस विवाद को शांत करने के लिए संत गुण रत्नसूरीश्वर महाराज के साथ तीन सदस्यों की कमेटी का रहा। यहां निर्णय होने के बाद सूरत गए और वहां से इस पर अंतिम फैसला लेकर आए।


गुरु पूर्णिमा पर तोहफा : इस विवाद में गुरु पूर्णिमा पर सकल जैन समाज के लोगों को तोहफा मिला है। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ व 24वें तीर्थंकर दोनों साथ विराजेंगे और यहीं इनकी पूजा अर्चना होगी। 
प्रतिमा जीरावल लाने का सबसे बड़ा कारण भगवान महावीर की प्रतिमा को यहां लाने के लिए जीरावल ट्रस्ट की भूमिका रही। धवली में पूजा अर्चना नहीं होती थी, जबकि यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना हो सकेगी। 

 

इन 2 बातों को लेकर नहीं हो पाया निर्णय 
1. मूर्ति कब लाएंगे :
प्रतिमा को जीरावल लाने पर सहमति बन चुकी है लेकिन यह कब और कैसे आएगी यह तय नहीं हुआ है। रमण भाई ने बताया संतों के मार्गदर्शन के बाद शुभ मुहूर्त में प्रतिमा को विराजित करेंगे। 
2. धवली मंदिर का क्या :
धवली गांव में जहां मूर्ति विराजित थी उसका क्या होगा। दावा है कि धवली मंदिर का जीर्णोद्घार करेंगे। इसके बाद निर्णय लेंगे।

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