Hindi News »Rajasthan »Jodhpur »News» Country's Largest Disaster Recovery Data Center In Jodhpur

भूकंप, बाढ़ जैसी आपदाओं में भी सेफ रहेगा प्रदेश के 170 विभागों के पोर्टल का पूरा डेटा; देश का सबसे बड़ा डिजास्टर रिकवरी डाटा सेंटर जोधपुर में

देश के कई और राज्यों को भी डिजास्टर रिकवरी की सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की संभावना

कमल वैष्णव | Last Modified - Aug 02, 2018, 07:16 AM IST

भूकंप, बाढ़ जैसी आपदाओं में भी सेफ रहेगा प्रदेश के 170 विभागों के पोर्टल का पूरा डेटा; देश का सबसे बड़ा डिजास्टर रिकवरी डाटा सेंटर जोधपुर में

50 करोड़ से ज्यादा शुरूआती लागत, डाटा सेंटर का औपचारिक उद्घाटन

40 पेटा बाईट से ज्यादा की स्टोरेज क्षमता

100 से ज्यादा आईटी प्रोफेशनल दिन-रात देंगे डवलपमेंट एंड सिक्यूरिटी सर्विसेज

750 केवीए के दो यूपीएस रूम, दोनों के लिए अलग-अलग बैटरी रूम

जोधपुर.प्रदेश में किसी भी तरह का कुदरती कहर हो या कोई अन्य जरुरत, राज्य सरकार के 170 से ज्यादा विभागों और इनमें विभिन्न जनसुविधाओं से जुड़े पोर्टल अब बंद नहीं होंगे। इसके लिए जोधपुर शहर में डिजास्टर रिकवरी डाटा सेंटर (डीआरडीसी) शुरू हो चुका है। यह देश का सबसे बड़ा डिजास्टर रिकवरी डाटा सेंटर है। इसकी शुरुआती लागत 50 करोड़ से ज्यादा है।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हाल ही में बीकानेर में हुए डिजिफेस्ट-2018 के समापन समारोह में जोधपुर के डीआरडीसी का औपचारिक उद्घाटन किया था। राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी आॅफिस ऑटोमेशन प्रोजेक्ट ‘ई-साइन’ का डाटा सेंटर भी यहीं पर स्थापित किया जा चुका है और इसका शुरुआती परीक्षण भी पूरा किया जा चुका है। सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग (डीओआईटी) की ओर से राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएं, जिनमें भामाशाह, ई-मित्र की 370 से ज्यादा सेवाओं में राशन डीबीटी, पेंशन, मूल निवास, जाति, जन्म, मृत्यु सहित अन्य प्रमाण पत्र, राजस्थान संपर्क ई-पीडीएस, स्टेट पोर्टल, इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट पोर्टल व सेवाओं के विस्तार के लिए आधारभूत संरचना का विस्तार किया जा रहा है।

बैकअप प्रोसेस रोजाना अपडेट किया जा रहा :डीआर साइट जोधपुर में भी इनके संचालन की टेस्टिंग पहले ही की जा चुकी है। वर्तमान में राज्य सरकार के इन सभी एप्लीकेशन का डाटा बैकअप एंड रिस्टोरेशन प्रोसेस भी वर्ल्ड क्लास टैक्नोलॉजी से शुरू किया जा चुका है। यह बैकअप प्रोसेस रोजाना अपडेट किया जा रहा है। आने वाले दिनों में अन्य राज्यों को भी डिजास्टर रिकवरी की सुविधाएं यहां से उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ी हैं, क्योंकि अधिकांश राज्यों के पास फिलहाल यह सुविधा नहीं है और वे निजी कंपनियों की मदद ले रहे हैं। ऐसे में दूसरे राज्यों को भी अपने डाटा सुरक्षा को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं होना पड़ेगा।

ई-साइन सर्वर सबसे सिक्योर भी :इस साइट पर डिजिटल सिग्नेचर (डोंगल के माध्यम से किए जाते थे) के नए रूप आधार बेस्ड ‘ई-सिग्नेचर’ का डाटा सेंटर भी जोधपुर में स्थापित किया जा चुका है। ऐसा संभवतः भारत में किसी भी राज्य का पहला डेटा सेंटर है। इसके माध्यम से आमजन व सरकारी विभागों के अधिकारियों को डॉक्यूमेंट्स पर ई-सिग्नेचर की सुविधा मिल भी रही है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में स्थापित सर्वर को क्रिटिकल कैटेगरी में शामिल करते हुए ट्रिपल लेयर सिक्युरिटी के इंतजाम भी किए गए हैं। आईटी एक्सपर्ट्स की टीम दिन-रात डीआरडीसी के सिक्यूरिटी एप्लिकेशन व हार्डवेयर के माध्यम से डाटा की सुरक्षा को सुनिश्चित कर रहे हैं।

क्या है डिजास्टर रिकवरी:कुदरती कहर जैसे भूकंप, आंधी-तूफान, बाढ़, अतिवृष्टि के अलावा साइबर अटैक, वाइरस अटैक इत्यादि होने के बाद सरकार की कोई भी योजना, जो आमजन से जुड़ी हो या विभागीय, वे ठप नहीं हो, इसके लिए किए जाने वाले इंतजाम डिजास्टर रिकवरी कहा जाता है। वर्तमान में राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराने वाले दो डाटा सेंटर जयपुर में संचालित हो रहे हैं। वहां किसी भी तरह की आपातकालीन परिस्थितियां उत्पन्न होने की सूरत में जोधपुर स्थित डिजास्टर रिकवरी डाटा सेंटर ऑटोमैटिकली उन सेवाओं का संचालन करने लग जाएगा। आमजन को इसका पता भी नहीं चलेगा और न ही उन्हें कोई परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

हर इक्यूपमेंट का बेकअप ताकि, एक में कोई तकनीकी खराबी पर दूसरा स्वत: ही काम करने लगे

- 2.5 मेगावाट की क्षमता वाली डीआर साइट पर डिस्कॉम के दो अलग-अलग सब-स्टेशन से डायरेक्ट दो कनेक्शन। साइट पर दोनों के लिए खुद के अत्याधुनिक ट्रांसफार्मर। इन दोनों से भी बिजली बंद हो जाए तो विशालकाय दो डीजी सेट, जो लाइट बंद होने के तत्काल बाद ऑटोमेटिकली स्टार्ट हो जाएंगे। लाइट वापस आने पर स्वत: बंद भी हो जाएंगे।

- 2.5 मेगावाट की क्षमता वाली डीआर साइट पर डिस्कॉम के दो अलग-अलग सब-स्टेशन से डायरेक्ट दो कनेक्शन। साइट पर दोनों के लिए खुद के अत्याधुनिक ट्रांसफार्मर। इन दोनों से भी बिजली बंद हो जाए तो विशालकाय दो डीजी सेट, जो लाइट बंद होने के तत्काल बाद ऑटोमेटिकली स्टार्ट हो जाएंगे। लाइट वापस आने पर स्वत: बंद भी हो जाएंगे।

मौजूदा व भविष्य की मांग के अनुरूप डिजाइन किया गया है डाटा सेंटर :इस डाटा सेंटर का डिजाइन प्रदेश की वर्तमान और भविष्य की मांग को देखते हुए ही बनाया गया है। आने वाले दिनों में यहां कई और उपकरण इंस्टाल किए जाएंगे। फिलहाल, इस डाटा सेंटर पर इंस्टालेशन और 5 वर्षों के लिए मेंटिनेंस का काम आईबीएम के विशेषज्ञों द्वारा किया जा रहा है। सेंटर के सर्वर फार्म एरिया में 80 रैक की क्षमता है। इनमें 40 पेटा बाइट से ज्यादा की स्टोरेज कैपेसिटी है। - मनीष भाटी, उप निदेशक (डीओआईटी)

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×