क्रिएटिविटी / पुरानी जींस से बैग, पेंसिल बाॅक्स व स्लीपर बना जरूरतमंद बच्चों काे बांटते, अब स्टार्टअप भी खड़ा किया



Distributing needy children with old jeans, making bags, pencil boxes and sleepers
सीए स्टूडेंट अतुल मेहता, इंजीनियर निखिल गहलोत और फैशन डिजाइनर मृणालिनी राजपुरोहित सीए स्टूडेंट अतुल मेहता, इंजीनियर निखिल गहलोत और फैशन डिजाइनर मृणालिनी राजपुरोहित
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Distributing needy children with old jeans, making bags, pencil boxes and sleepers
सीए स्टूडेंट अतुल मेहता, इंजीनियर निखिल गहलोत और फैशन डिजाइनर मृणालिनी राजपुरोहितसीए स्टूडेंट अतुल मेहता, इंजीनियर निखिल गहलोत और फैशन डिजाइनर मृणालिनी राजपुरोहित

  • शहर के तीन दाेस्ताें ने क्रिएटिविटी को सामाजिक सरोकार से जोड़ा, साथ ही साथ इसे खुद का बिजनेस भी बनाया
  • टीम पहले किसी स्कूल की विजिट करती है, फिर वहां के जरुरतमंद बच्चों को ये पूरा सामान एक किट के रूप में निशुल्क बांटती है 

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2019, 02:43 AM IST

जाेधपुर (मनीष बाेहरा). पुरानी जींस अाैर गिटार...काॅलेज डेज की याद दिलाता ये गाना अापने सुना ही हाेगा। यही पुरानी जींस अगर स्कूल बैग, पेंसिल बाॅक्स अाैर स्लीपर बनकर जरुरतमंद बच्चाें के काम अाए ताे इसे क्या कहिएगा। जी जनाब, शहर के तीन युवाअाें ने अपनी क्रिएटिविटी काे इस रूप में साकार किया है। प्रोफेशन से सीए, इंजीनियर एवं फैशन डिजाइनर तीन दोस्त इसे बिजनेस आइडिया में भी तब्दील कर स्टार्टअप भी लगा चुके हैं। इन्होंने पुरानी जींस को अप-साइकिलिंग कर सोलक्राफ्ट कंपनी बनाकर नए प्रोडक्ट बनाने का काम शुरू किया है।

 

ये दोस्त हैं सीए स्टूडेंट अतुल मेहता, इंजीनियर निखिल गहलोत और फैशन डिजाइनर मृणालिनी राजपुरोहित। अतुल और निखिल बताते हैं- एक साल पहले पुरानी जींस फेंकते सोचा की कपड़ा अभी खराब नहीं हुआ है। इसे अप-साइकिलिंग कर कुछ बना सकते हैं। पहले बैग बनाया। अच्छा लगा तो पेंसिल, रबड़ और शार्पनर डालने के लिए पेंसिल बॉक्स बनाया। अब इसमें चप्पल भी जोड़ दिए हैं। ये टीम पहले किसी स्कूल की विजिट करती है, फिर वहां के जरुरतमंद बच्चों को ये पूरा सामान एक किट के रूप में निशुल्क बांटती है।

 

अतुल बताते हैं कि अधिकांश लोग जींस पुरानी या फैडेड होने या नीचे से थोड़ा फटते ही फेंक देते हैं। जबकि इसका रीयूज कर कई प्रॉडक्ट बना सकते हैं। क्रिएटिविटी के साथ ही सामाजिक बदलाव के उद्देश्य से बच्चों के लिए स्कूल बैग, पेंसिल बॉक्स और चप्पल बनाए गए। शुरुआत 100 बच्चों को स्कूल किट बांटने से की थी। यह आंकड़ा 1200 पार कर चुका है। 2022 तक 2 लाख जरुरतमंद बच्चों को सामग्री बांटने का है। पुरानी जींस ऑनलाइन और कॉफी हाउस में कैंप लगाकर कलेक्ट की जाती है। टीम स्कूल किट के साथ-साथ लैपटॉप बैग, लगेज बैग, हार्ड डिस्ककवर, आईपैड कवर अादि बनाती है। कॉमन प्लेटफार्म पर आइडिया शेयर किया तो कुछ इंवेस्टर्स मिल गए और क्राउड फंडिंग से पैसा जुटा रहे हैं। अब इसे स्टार्टअप में तब्दील कर दिया है।

 

तीनों के सेवा भाव और स्किल्स से पहुंचे नए प्लेटफार्म पर
 

अतुल फैमिली टेक्सटाइल के फैमिली बिजनेस से कई चीजें सीखीं। अब उनकी वही स्किल पैटर्न से लेकर ऑपरेशन तक काम आती है। सिविल इंजीनियर निखिल ने प्रोजेक्ट में बिजनेस डवलप की जिम्मेदारी निभाई। प्रॉडक्ट को आमजन तक पहुंचाने में तीसरी को-फाउंडर मृणालिनी राजपुरोहित ने भूमिका निभाई। वे डिजाइनिंग से लेकर मार्केटिंग संभाल रही हैं।
 

 

सामाजिक सरोकार भी निभा रहे
तीनों दोस्त बताते हैं कि हमें जो कुछ मिला है, वो इसी समाज ने दिया है। सभी का कर्तव्य है कि समाज के प्रति भी जवाबदेही निभाएं। जींस बनाने में 8 हजार लीटर पानी खर्च होता है। इसका एंड यूज होना चाहिए। बिजनेसमैन सक्सेस पाकर कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी निभाते हैं। हमने सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी से शुरुआत की और इसे निभाते हुए ही बिजनेस भी कर रहे हैं।

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