हाईकोर्ट ने कहा- क्यों न अफसरों का इलाज सरकारी अस्पताल में अनिवार्य कर दिया जाए

3 वर्ष पहले
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  • सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर हियरिंग
  • एएजी के यह कहने कि सरकारी अस्पताल बेहतर स्थिति में हैं पर कोर्ट ने की टिप्पणी

जोधपुर. हाईकोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता व जस्टिस विनीत माथुर की खंडपीठ में सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं मुहैया कराने को लेकर कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा कि फिर तो क्यों न सभी सरकारी अधिकारियों, एमएलए, एमपी आदि के लिए सरकारी अस्पताल में इलाज करवाना अनिवार्य कर दिया जाए।

 
दरअसल, हाइकोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के खाली पद भरने व अन्य सुविधाएं जुटाने को कहा था। सोमवार को सुनवाई के दौरान एएजी एसएस लदरेचा ने कोर्ट से कहा, कि पूर्व में दिए गए आदेश की पालना कर दी गई है। सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं भी जुटाई हैं और पहले से काफी बेहतर स्थिति है। इसी पर कोर्ट ने यह मौखिक टिप्पणी की।

 

मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। एएजी ने मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ संबंधी रिपोर्ट के लिए मोहलत मांगी। अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।