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हाईकोर्ट ने पूछा- बालिकाएं आध्यात्मिक शिक्षा तो ले रही हैं, पर बेसिक शिक्षा का क्या होगा?

राजसमंद से 67 लड़कियों को अवैध रूप से दस्तयाब कर बंधक बनाने के मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण सुनवाई हुई

Bhaskar News | Last Modified - Aug 09, 2018, 07:17 AM IST

हाईकोर्ट ने पूछा- बालिकाएं आध्यात्मिक शिक्षा तो ले रही हैं, पर बेसिक शिक्षा का क्या होगा?

जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश संगीत लोढ़ा व वीरेंद्र कुमार माथुर की खंडपीठ में बुधवार को राजसमंद से गत दिनों एक संस्थान की 67 लड़कियों को अवैध रूप से दस्तयाब कर बंधक बनाने के मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता बिमला बिस्ट की ओर से दायर याचिका में बताया गया, कि गोमुखी शिक्षण संस्थान में अध्ययनरत अलग-अलग राज्यों की लड़कियां, जो आध्यात्म की शिक्षा हासिल कर रही थी उन्हें बाल कल्याण समिति और पुलिस द्वारा दस्तयाब कर अवैध रूप से बंधक बना रखा है। इस पर कोर्ट ने पूछा, कि आध्यात्मिक शिक्षा तो ठीक है, लेकिन बच्चियों की बेसिक शिक्षा का क्या होगा? दस से पंद्रह-सोलह वर्ष के बच्चे बेसिक शिक्षा के बारे में अनभिज्ञ हो तो यह उनके शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार का हनन हो रहा है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता इसका संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए तो कोर्ट ने एएजी राजेश पंवार को बुलाया और उन्हें निर्देश दिए, कि यह पता लगाएं, कि क्या राजसमंद का मामला राइट टू एजूकेशन व संविधान की धारा 21 के उल्लंघन का तो नहीं हैं। उन्हें इस संबंध में 13 अगस्त तक जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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