न्याय / सरकार हारी, हाईकोर्ट ने कहा- तलाकशुदा भी बेटी के समान, इसलिए वह अनुकंपा नौकरी की हकदार



High court said - divorced lafy also like daughter
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High court said - divorced lafy also like daughter

  • प्लांटून कमांडर पिता की मृत्यु पर तलाकशुदा बेटी ने मांगी थी अनुकंपा नौकरी
  • खंडपीठ ने कहा- आवेदन के समय वह विवाहित नहीं थी, इसलिए सरकार की अपील खारिज की

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2019, 01:34 AM IST

जोधपुर. तलाकशुदा बेटी ने अपने पिता की नौकरी के दौरान मृत्यु होने पर अनुकंपा नौकरी मांगी, जिस पर सरकार ने यह कहते हुए नौकरी देने से इनकार कर दिया, कि वह अविवाहित नहीं है और न वह आश्रित की श्रेणी में शामिल हो सकती है।

 

युवती ने हाईकोर्ट के एकलपीठ में कानूनी लड़ाई जीती तो सरकार ने इस आदेश को खंडपीठ में चुनौती दे डाली, वहां भी सरकार को हार का सामना करना पड़ा। चीफ जस्टिस एस रविंद्र भट्ट व अशोक कुमार गौड़ की खंडपीठ ने अपील याचिका को खारिज करते हुए कहा, कि तलाकशुदा या परित्यक्ता बेटी भी अविवाहित बेटी के समान ही है, इसलिए वह हकदार है।


 मामले के अनुसार हनुमानगढ़ निवासी दीपिका शर्मा के पिता सुरेंद्र कुमार शर्मा गृह रक्षा प्रशिक्षण केंद्र हनुमानगढ़ में प्लांटून कमांडर के पद पर कार्यरत थे। शर्मा की 16 जून 2016 को मृत्यु हो गई। इस पर दीपिका ने 6 जुलाई 2016 को एलडीसी पद के लिए अनुकंपा नौकरी के लिए आवेदन किया। गृह रक्षा विभाग ने 9 मार्च 17 को यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया, कि तलाकशुदा अनुकंपा नौकरी की श्रेणी में नहीं आती है।

 

विभाग के रवैए से मायूस हुई बेटी ने एक बार फिर प्रतिवेदन दिया, लेकिन विभाग ने 20 सितंबर 17 को फिर उसे खारिज कर दिया। इस पर उसे हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। एकलपीठ ने भी 8 अक्टूबर 18 को अनुकंपा नौकरी का हकदार मानते हुए एक महीने में नौकरी देने के आदेश दिए। एकलपीठ के आदेश से भी विभाग राजी नहीं हुआ और खंडपीठ में अपील कर दी।

 

खंडपीठ में सरकार ने एकलपीठ के आदेश को ही अनुचित व गलत बताते हुए कहा, कि याचिकाकर्ता विवाहित थी तथा तलाक हो गया, इसलिए वह अनुकंपा नौकरी की हकदार नहीं थी। सरकार ने तर्क दिया, कि राज्य सरकार ने परित्यक्ता व विधवा महिलाओं को 20 फीसदी सब रिजर्वेशन दिया है। जबकि दीपिका की ओर से पेश हुए अधिवक्ता इंद्रराज चौधरी ने एकलपीठ के आदेश को उचित बताया।

 

दोनों पक्ष सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा, कि केवल इस परिस्थिति या दशा में, कि आवेदनकर्ता पूर्व में विवाहित रह चुकी है, यह अनुकंपा नौकरी का आवेदन खारिज करने का उपयुक्त आधार नहीं हो सकता। आवेदन के समय वह विवाहित नहीं थी। तलाकशुदा बेटी भी अविवाहित पुत्री के समान ही हैं। खंडपीठ ने सरकार की अपील खारिज करते हुए एकलपीठ का आदेश बरकरार रखा है।

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