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गोलियां लगने के बावजूद पैरा कमांडो ने दुश्मन की मांद में घुस कर 2 आतंकियों को मार गिराया, हेलमेट में अभी भी फंसी है एक गोली

एक-एक गोली बुलेट प्रूफ हेलमेट और सीने के पास बुलेट प्रूफ जैकेट में ही फंसी रह गई।

Danik Bhaskar | Jul 12, 2018, 05:21 PM IST
सेना की स्पेशल फोर्स 10 पैरा के कमांडो के हेलमेट में लगी गोली। सेना की स्पेशल फोर्स 10 पैरा के कमांडो के हेलमेट में लगी गोली।

जोेधपुर। जम्मू कश्मीर में एक आतंकी हमले के दौरान भारतीय सेना के एक जांबाज जवान ने दुश्मन की मांद में घुसकर गोलियों की बौछार के बीच दो आतंकियों को मार गिराया। इस दौरान एक गोली जवान के सिर पर लगे हेलमेट में फंस गई जबकि एक गोली उसकी बांह में जा धंसी। एक-एक गोली बुलेट प्रूफ हेलमेट और सीने के पास बुलेट प्रूफ जैकेट में फंसी रह गई। ये गोलियां शरीर तक नहीं पहुंच पाई और उसकी जान बच गई। ये जवान है सेना की जोधपुर स्थित मुख्यालय 10 पैरा स्पेशल फोर्स का कमांडो नायब सुबेदार राजपाल धायल। हेलमेट में फंस गई गोली…

- भारतीय सेना की स्पेशल कमांडो फोर्स 10 पैरा का मुख्यालय जोधपुर में है। 10 पैरा की एक टुकड़ी इन दिनों जम्मू-कश्मीर में तैनात है। सैन्य सूत्रों का कहना है कि कश्मीर घाटी के शोपिया कुंडलन में मंगलवार को जैश ए मोहम्मद से जुड़े आतंकी ग्रुप के साथ चली मुठभेड़ में स्पेशल फोर्स के एक कमांडो नायब सुबेदार राजपाल धायल ने दो खतरनाक आतंकियों को मार गिराया।

- इस हमले में धायल भी बांह में गोली लगने से घायल हो गए। सेना की तरफ से कहा गया है कि धायल ने न केवल बड़ी बहादुरी के साथ आतंकियों का सामना किया बल्कि अपनी टीम का बड़ी कुशलता के साथ नेतृत्व किया।

ऐसे बची जान

- एक मकान में आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिलने पर धायल के नेतृत्व में जवानों की एक टुकड़ी को मौके पर भेजा गया। कई घंटों तक इंतजार के बावजूद आतंकी मकान से बाहर नहीं निकले। इसके बाद अपनी जान की परवाह किए बगैर धायल सीधे मकान में जा घुसे।

- धायल को देखते ही आतंकियों ने गोलियों की बौछार कर दी। इस दौरान एक गोली उनके हेलमेट में धंस गई, जबकि दूसरी गोली बुलेट प्रूफ जैकेट में धंस गई। तीसरी गोली सीधे उनकी बांह में आकर लगी। हाथ में गोली लगने और लगातार बहते खून को रोकने के लिए पीछे हटने के बजाय जवाबी हमला बोलते हुए धायल ने दोनों आतंकियों को वहीं ढेर कर दिया। सेना का कहना है कि जख्मी धायल को अस्पताल ले जाया गया। अब उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है।

दुश्मन की मांद में घुसकर मारते है पैरा कमांडो

- स्कॉर्पियंस के नाम से जाने वाली ये स्पेशल फोर्स द क्वाइट प्रोफेशनल्स मानी जाती है यानि अपने फील्ड की सर्वाधिक पेशेवर फोर्स। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के छाछरो पर कब्जा करने तथा 1987 में श्रीलंका में एलटीटीई के खिलाफ ऑपरेशन पवन में मुख्य भूमिका निभाने वाले पैैरा कमांडो ही सर्जिकल ऑपरेशन में हमेशा अग्रणी रहते है।

- दुश्मन की मांद में घुसकर मात देने का माद्दा रखने वाले पैरा कमांडों को चयन के दौरान ही यह बताया जाता है कि आपसे श्रेष्ठ कोई नहीं और आप में कुछ भी कर गुजरने तथा हर हाल में जीतने का हौसला है।

कमांडो की जैकेट में भी एक गोली लगी। कमांडो की जैकेट में भी एक गोली लगी।
स्पेशल फोर्सेज की एक कैप को सबसे अहम माना जाता है। इसे लगाने का अवसर बहुत कम जवानों को ही मिल पाता है। स्पेशल फोर्सेज की एक कैप को सबसे अहम माना जाता है। इसे लगाने का अवसर बहुत कम जवानों को ही मिल पाता है।
ऐसे होते है कमांडो। ऐसे होते है कमांडो।