जोधपुर / सीए फाउंडेशन का परिणाम 26 व फाइनल ओल्ड कोर्स का 7 फीसदी गिरा, फाइनल न्यू कोर्स में 4 फीसदी की बढ़ोतरी



अपने माता-पिता के साथ रितिका मेहता।  अपने माता-पिता के साथ रितिका मेहता। 
परिवार के साथ हार्दिक जैन।  परिवार के साथ हार्दिक जैन। 
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अपने माता-पिता के साथ रितिका मेहता। अपने माता-पिता के साथ रितिका मेहता। 
परिवार के साथ हार्दिक जैन। परिवार के साथ हार्दिक जैन। 

  • हार्दिक जैन 9वीं और रितिका मेहता 16वीं रैंक के साथ सिटी टॉपर 

Dainik Bhaskar

Aug 14, 2019, 10:34 AM IST

जोधपुर. सीए फाउंडेशन में ऑल इंडिया 9वीं रैंक हासिल करने वाले हार्दिक जैन और फाइनल न्यू कोर्स में 16वीं स्थान पाने वाली रितिका मेहता सिटी टॉपर्स हैं। आईसीएआई जोधपुर ब्रांच के चेयरमैन सीए रितेश भूतड़ा व सेक्रेटरी सीए धवल कोठारी ने बताया कि टॉपर्स को ब्रांच की ओर से सम्मानित किया गया। मई-2019 अटेंप्ट में सीए फाइनल न्यू कोर्स का पासिंग परसेंटेज 20.85 फीसदी व ओल्ड कोर्स का पासिंग परसेंटेज 7.63 फीसदी रहा है। हालांकि जोधपुर रीजन के पासिंग परसेंटेज की जानकारी अभी ब्रांच को अभी नहीं मिली है।

 

ओवर ऑल पासिंग परसेंटेज की बात करें तो इस बार फाउंडेशन का रिजल्ट नवंबर-2018 की तुलना में करीब 26 फीसदी लुढ़क गया है। वहीं फाइनल न्यू कोर्स के रिजल्ट में 4 फीसदी का इजाफा हुआ है, जबकि ओल्ड कोर्स का रिजल्ट 7 फीसदी से गिर गया है। गौरतलब है कि नवंबर 2018 अटेंप्ट में जोधपुर के सिद्धान्त भंडारी ने सीए फाइनल में पूरे देश मे टॉप कर सीए नगरी का नाम राेशन किया था। फाउंडेशन के सिटी टॉपर हार्दिक जैन बीआर कोचिंग क्लास के स्टूडेंट रहे हैं। वहीं रेजीडेंसी राेड स्थित महावीर नगर निवासी राजुल जैन की बेटी रक्षिका ने भी पहले प्रयास में ही फाइनल की परीक्षा उत्तीर्ण की है। 


काेर्स के रिवीजन को बनाया स्ट्रेटेजी का अहम हिस्सा: हार्दिक 
फाउंडेशन में ऑल इंडिया 9वीं रैंक हासिल करने वाले हार्दिक जैन का मानना है कि उनकी इस सफलता के पीछे उनकी सफल स्ट्रेटेजी थी। उन्होंने एग्जाम से पहले 5 बार पूरा कोर्स रिवाइज किया था। इस वजह से उनके कंसेप्ट्स और भी मजबूत होते गए। शुभम् फॉर्म्स निवासी हार्दिक के पिता उपेंद्र जैन टैक्सटाइल बिजनेसमैन हैं, जबकि मां रेखा जैन होममेकर हैं। पिता का सपना था कि उनका बेटा सीए बने। बतौर हार्दिक फाउंडेशन के अधिकांश कोर्स 12वीं में ही कवर हो गए थे, लेकिन पेपर तक उन्होंने इसकी रेगुलर प्रैक्टिस जारी रखी। 


रिजल्ट का नहीं सोचा, पढ़ाई को 100 फीसदी दिया: रितिका 
चौहाबो निवासी रितिका मेहता ने बताया कि उनके पैरेंट्स कॉमर्स बैकग्राउंड से आते हैं इसलिए उन्होंने भी 10वीं में ही सीए बनने का निश्चय लिया था। पिता रवि मेहता यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी में मैनेजर हैं व मां अरुणा मेहता एसबीआई में कार्यरत हैं। रितिका ने बताया कि उन्होंने फाइनल की पूरी पढ़ाई जोधपुर रह कर ही की। उन्होंने पहले ही प्रयास में ये सफलता हासिल की है। वे 3 साल तक हर रोज दस घंटे सेल्फ स्टडी को देती थीं। वहीं एग्जाम के आखिरी 6 महीनों में 14 घंटे पढ़ती थीं। परिणाम काे लेकर वे भी आशंकित थी। पास हाेने का विश्वास था, लेकिन रैंक का नहीं साेचा था। बतौर रितिका पढ़ते समय उन्होंने कभी परिणाम के बारे में नहीं साेचा, भरपूर मेहनत की। अब वे फाइनेंस व मैनेजमेंट की पढ़ाई करेंगी। 


अब कोर्स कठिन बन रहा है, ताकि सिर्फ योग्य ही प्रवेश ले 
मई अटेंप्ट में फाउंडेशन का परिणाम कम रहने के पीछे कारण है कि मार्च में 12वीं की परीक्षा के बाद स्टूडेंट्स नवंबर के लिए एप्लाई करते हैं, इसलिए उन्हें पढ़ने के लिए अधिक समय मिल जाता है। जबकि मई में अधिकांश वे स्टूडेंट्स एप्लाई करते हैं जो नवंबर में क्लियर नहीं कर पाते। इसके साथ ही इंस्टीट्यूट अब सीए कोर्स में प्रवेश को कठिन बना रहा है, ताकि सिर्फ योग्य स्टूडेंट्स ही इस कोर्स में प्रवेश ले सकें। -सीए बीआर जैन, एक्सपर्ट 
 

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