जैसलमेर / छह साल से पहाड़ों की ढलान पर बह रही है आस्था की अविरल धारा, नहीं पता लग पाया स्रोत



जैसलमेर के पूनमनगर गांव की पहाड़ी से बहता पानी। जैसलमेर के पूनमनगर गांव की पहाड़ी से बहता पानी।
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जैसलमेर के पूनमनगर गांव की पहाड़ी से बहता पानी।जैसलमेर के पूनमनगर गांव की पहाड़ी से बहता पानी।

  • वर्ष 2013 में आज ही के दिन पूनमनगर गांव में फूटी थी जलधारा

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 10:39 AM IST

जैसलमेर. जिले के पूनमनगर गांव में छोटे पहाड़ की ओढलान पर छह वर्ष से लगातार बहता पानी सभी के लिए अजूबा बना हुआ है। 14 जनवरी, 2013 के दिन गांव के नजदीक बने छोटे पहाड़ की ढलान के बीच में से अचानक पानी बहना शुरू हुआ जो आज तक लगातार जारी है। छह वर्ष से अविरल बह रही इस जलधारा को देखने के लिए लोग आते रहते है। वहीं कई लोग इस पवित्र जल मान अपने साथ बोतलों में भर कर ले जाते है। 


समय बीतता गया और कई दिन होने के बाद भी पानी का बहना जारी रहा तो ग्रामीणों की आस्था भी हिलोरें लेने लगीं। लोगों ने इसे आस्था से जोड़कर यहां पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी। यहां पास में ही एक मंदिर का निर्माण भी हो गया, जिसे जगतेश्वर महादेव मंदिर का नाम दे दिया गया।

 

मकर संक्रांति के दिन प्राकृतिक घटना को ईश्वरी चमत्कार मानने के कारण यह स्थान आज आस्था का केंद्र बन गया। आसपास के ग्रामीणों समेत दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए आ रहे हैं। 


छह वर्ष में एक बार भी नहीं रुका बहाव
पहाड़ों की ढलान से लगातार बह रहा पानी का यह जलस्रोत को सोमवार को छह वर्ष पूरे कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि छह वर्षों के दौरान एक बार भी पानी का बहाव न तो कम हुआ और न ही कभी थमा। हालांकि पहाड़ों की ढलान से बह रहे इस पानी की गति काफी धीमी है, लेकिन यह लगातार बह रहा है। 

 

भूजल विभाग के अधिकारियों ने बताया था बरसाती पानी 
जिले के भूजल विभाग को इसकी जानकारी है और शुरुआत में मौके पर अधिकारी पहुंचे और इसे बरसाती पानी बताया। इसके बाद भूजल विभाग ने लगातार बह रहे पानी के स्रोत को जानने की कोशिश तक नहीं की है। गत छह वर्षों के दौरान भूजल विभाग ने यहां किसी तरह का सर्वे तक नहीं किया है। 


पहाड़ों की ढलान से बह रहा पानी है खारा 
पहाड़ों की ढलान से बह रहा पानी खारा है। ऐसे में बरसाती पानी के कयासों पर विराम लग गया है, क्योंकि बरसाती पानी खारा नहीं हो सकता है। ऐसे में अब दूसरा कारण जमीन के भूजल का होना संभावित है, लेकिन उसके लिए भी ठोस वजह होनी चाहिए जो कि भूजल वैज्ञानिक ही किसी सर्वे के बाद बता सकते हैं। 
पवित्र जल को बोतलों में भर कर घर ले जा रहे हैं ग्रामीण 
ईश्वरीय चमत्कार मानकर श्रद्धालु पहाड़ों की ढलान से बह रहे इस पानी को बोतलों में भरकर ले जा रहे हैं और गंगाजल की तरह इसके प्रति आस्था जता रहे हैं। आस्था बढ़ने के साथ ही जगतेश्वर महादेव मंदिर को भव्य रूप देने के प्रयास तेज हो गए हैं। श्रद्धालुओं ने पानी के उद्गम स्थल के पास ही छोटा सा एक गड्ढा बना दिया गया है, जिसमें एकत्र होने वाले पानी को श्रद्धालु बोतल में भरकर अपने घर ले जा रहे हैं। 
 

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