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मारवाड़ के ताजमहल पर होता है राजघराने के सदस्यों का अंतिम संस्कार

Dainik Bhaskar

Jul 03, 2018, 11:59 AM IST

मेहरानगढ़ फोर्ट के सामने की पहाड़ी पर स्थित जसवंत थड़ा शानदार कारीगरी के कारण मारवाड़ का ताजमहल कहा जाता है।

ये है जोधपुर का जसवंत थड़ा। यहां पर राजपरिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार किय जाता है। ये है जोधपुर का जसवंत थड़ा। यहां पर राजपरिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार किय जाता है।
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जोधपुर। मारवाड़ के राजपरिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार मेहरानगढ़ फोर्ट के सामने स्थित जसवंत थड़ा पर किया जाता है। राजघराने की राजमाता कृष्णा कुमारी का अंतिम संस्कार भी यहीं पर किया जाएगा। अपनी बेगम मुमताज की याद में प्रेम के प्रतीक के रूप में ताजमहल का निर्माण कराया था। वहीं मारवाड़ के एक महाराजा ने अपने पिता की याद को चिरस्थाई रखने के लिए संगमरमर पत्थर से ताजमहल की शैली में ही भव्य इमारत का निर्माण कराया। यही कारण है कि विश्व प्रसिद्ध मेहरानगढ़ फोर्ट के सामने की पहाड़ी पर स्थित जसवंत थड़ा शानदार कारीगरी के कारण मारवाड़ का ताजमहल कहा जाता है। ऐसा है जसवंत थड़ा...

- थड़ा(सीनोटाफ) का तात्पर्य एक ऐसी समाधि जो केवल स्मारक है, जहां पर सम्बन्धित व्यक्ति का दाह संस्कार किया गया हो। इसे शून्य समाधि भी कहा जाता है। महाराजा जसवंतसिंह द्वितीय का वर्ष 1895 में निधन होने पर उनका दाह संस्कार जसवंत थड़े के निकट किया गया। इससे पूर्व राजघराने के सदस्यों का अंतिम संस्कार मंडोर में किया जाता था। मंडोर की जोधपुर से दूरी को ध्यान में रख इस स्थान का चयन किया गया।

- उनके पुत्र महाराजा सरदारसिंह ने अपने पिता की याद को चिरस्थाई रखने के लिए इसका निर्माण कराया। यह शून्य समाधि मारवाड़ के लाल पत्थर के पहाड़ के बीच धवल आभा लिए अलग ही नजर आता है। चांदनी रात में इसके वास्तु सौंदर्य में निखार आ जाता है।

- ताजमहल के समान ही इसका निर्माण मकराना के सफेद संगमरमर पत्थर से किया गया। वर्ष 1904 में इसका निर्माण शुरू किया गया। यह वर्ष 1910 में बनकर तैयार हुआ।

- मुख्य भवन के चारों तरफ दीवारों पर पारदर्शी संगमरमर की शिलाए लगी है। इन पत्थरों से होकर रोशनी अंदर पहुंचती है। इसके चारों तरफ दस बड़ी और 28 छोटी छतरियां बनी हुई है। इन छतरियों की बगल में ही राजपर वार के सदस्यों का अंतिम संस्कार किया जाता है। इसका निर्माण ताजमहल निर्माण शैली की तर्ज पर किया हुआ है। मुख्य भवन में जोधपुर के अब तक के सभी महाराजाओं की तस्वीरें लगी है। हर वर्ष दस लाख से अधिक पर्यटक इसे देखने को पहुंचते है। कई फिल्मों की शूटिंग यहां पर हो रखी है।

इसका निर्माण 108 वर्ष पहले कराया गया था। इसका निर्माण 108 वर्ष पहले कराया गया था।
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बेमिसाल कारीगरी के कारण इसे मारवाड़ का ताजमहल कहा जाता है। बेमिसाल कारीगरी के कारण इसे मारवाड़ का ताजमहल कहा जाता है।
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राजमाता कृष्णा कुमारी का दाह संस्कार यहीं पर किया जाएगा। राजमाता कृष्णा कुमारी का दाह संस्कार यहीं पर किया जाएगा।
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मारवाड़ की यह एकमात्र  बिल्डिंग है जिसमें जोधपुरी पत्थर का उपयोग नहीं के बराबर है। मारवाड़ की यह एकमात्र बिल्डिंग है जिसमें जोधपुरी पत्थर का उपयोग नहीं के बराबर है।
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ये है जोधपुर का जसवंत थड़ा। यहां पर राजपरिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार किय जाता है।ये है जोधपुर का जसवंत थड़ा। यहां पर राजपरिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार किय जाता है।
इसका निर्माण 108 वर्ष पहले कराया गया था।इसका निर्माण 108 वर्ष पहले कराया गया था।
बेमिसाल कारीगरी के कारण इसे मारवाड़ का ताजमहल कहा जाता है।बेमिसाल कारीगरी के कारण इसे मारवाड़ का ताजमहल कहा जाता है।
राजमाता कृष्णा कुमारी का दाह संस्कार यहीं पर किया जाएगा।राजमाता कृष्णा कुमारी का दाह संस्कार यहीं पर किया जाएगा।
मारवाड़ की यह एकमात्र  बिल्डिंग है जिसमें जोधपुरी पत्थर का उपयोग नहीं के बराबर है।मारवाड़ की यह एकमात्र बिल्डिंग है जिसमें जोधपुरी पत्थर का उपयोग नहीं के बराबर है।
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