जलापूर्ति / इंदिरा गांधी नहर में फिर 70 दिन के क्लोजर का प्रस्ताव मंजूर, क्लोजर के दिन भी कम करवाने में जुटा जलदाय विभाग



इंदिरा गांधी नहर। इंदिरा गांधी नहर।
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इंदिरा गांधी नहर।इंदिरा गांधी नहर।

  • नहर पोडिंग से 30 दिन, कायलाना तखतसागर से 15 दिन हो सकती है जलापूर्ति
  • 25 दिन पानी कैसे मिलेगा कोई प्लान नहीं, पीएचईडी दो दिन करेगा कटौती

Dainik Bhaskar

Oct 10, 2019, 10:22 AM IST

जोधपुर. इंदिरा गांधी नहर में इस बार फिर गर्मियों में 70 दिन के क्लोजर के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इसके तहत 30 मार्च 2020 को क्लोजर शुरू होगा, जो 10 जून तक चलेगा। भीषण गर्मी में इस क्लोजर से जोधपुर शहर सहित पूरे जिले की 45 लाख की आबादी के समक्ष जल संकट गहरा सकता है। इसके लिए पीएचईडी के पास फिलहाल कोई प्लान नहीं है। 


नहर में पोडिंग से 30 दिन तक शहर की प्यास बुझाई जा सकती है, वहीं कायलाना और तखतसागर के रिजर्व पानी से ज्यादा से ज्यादा 15 दिन तक सप्लाई हो सकती है। ऐसे में 25 दिन पानी की व्यवस्था करने की विभाग के पास कोई योजना नहीं है। फिलहाल पानी बचाने के लिए पीएचईडी ने शहर में घोषित तौर पर जलापूर्ति शुरू कर दी है। आगामी 11 व 12 अक्टूबर को मेंटेनेंस शुरू होगा। इसके चलते शहर में दो दिन तक जलापूर्ति बाधित रहेगी। पीएचईडी के एडिशनल चीफ इंजीनियर नीरज माथुर ने बताया कि 70 दिन के क्लोजर को कम कराने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए सरकार के स्तर पर बातचीत की जा रही है।

 

पानी मिलने का दावा, लेकिन 70 दिन निकालना मुश्किल
इंदिरा गांधी नहर की हालात दिनों दिन जर्जर हाेती जा रही है। पंजाब पर लगातार नहर की मरम्मत का दबाव पड़ रहा है। बीते दाे सालाें से पंजाब टेंडर लगा रहा, लेकिन मरम्मत नहीं हा़े पा रही थी, लेकिन इस बार टेंडर लग गए हैं। आईजीएनपी के मुख्य अभियंता विनोद मित्तल ने बताया कि पंजाब क्षेत्र में नहर की मरम्मत का प्रोग्राम तय हा़े गया है, इसलिए 70 दिन की नहरबंदी इस साल हाेगी। 23 मार्च काे रबी का रेग्युलेशन खत्म हाेते ही नहरबंदी हाेगी। कुछ इलाकों में पानी एकत्र करने के लिए एक सप्ताह औैर नहर में पानी चलाया जाएगा। नहरबंदी के दाैरान नहर में 2000 क्यूसेक पानी चलता रहेगा। ऐसी स्थिति में हनुमानगढ़, बीकानेर, जाेधपुर, नागाैर, बाड़मेर काे पानी मिलता रहेगा, लेकिन जहां पीएचईडी की स्कीमें नहीं हैं और लाेग नहर पर ही निर्भर हैं, वहां किल्लत तय है। नहर विभाग शीघ्र ही पीएचईडी काे इस संबंध में सूचित कर बैठक करेगा। नहरबंदी से सबसे बड़ी दिक्कत ग्रामीण क्षेत्र में हाेने की आशंका है। इससे निबटने के लिए पीएचईडी काे मजबूत प्रोग्राम बनाना हाेगा, जिससे आमजन तक टैंकरों से पानी पहुंच सके।
 

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