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राजीनामे को कोर्ट आए; पत्नी की शर्त- अपने मां-बाप से मिलने नहीं जाएगा, बहनें आएंगी तो उनसे भी बाहर जाकर मिलेगा

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 05:18 PM IST

जोधपुर न्यूज: फिर ऐसा क्या हुआ, जो कोर्ट से निकलते ही पति की चप्पलों से कर दी पिटाई

Jodhpur News  Wife beaten husband with slippers Court came for Counseling

जोधपुर। राष्ट्रीय लोक अदालत में तलाक के मामले में राजीनामे के लिए आए दंपती के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई, कि गुस्साई पत्नी ने अपने पति की चप्पल से पिटाई शुरू कर दी। बड़ी मुश्किल से वहां मौजूद लोगों व पुलिस ने बीच-बचाव कर उन्हें छुड़ाया। बाद में पति की शिकायत पर पुलिस ने पत्नी को गिरफ्तार किया और कोर्ट के समक्ष पेश किया। बाद में उसे जमानत पर रिहा किया गया।


खेड़ापा निवासी संतोष का विवाह प्रकाश से वर्ष 2011 में हुआ था। दंपती के एक संतान भी है। शादी के दो साल बाद ही पति-पत्नी के बीच नोकझोंक शुरू हो गई। बात तलाक तक पहुंच गई और फैमिली कोर्ट जोधपुर में वर्ष 2013 में परिवाद दर्ज हो गया। पति अहमदाबाद में काम-काज करता है। पिछले कुछ दिनों से वे फिर से साथ रहने पर विचार कर रहे थे। ऐसा बताया गया, कि पत्नी कुछ दिन अहमदाबाद अपने पति के साथ रहकर भी आई। दोनों राजीनामा कर फैमिली कोर्ट में तलाक के मामले को निस्तारित करने का निर्णय किया। इसी सिलसिले में दोनों यहां पहुंचे और जज प्रदीप कुमार जैन व सदस्य अधिवक्ता मनोज गहलोत की बेंच के समक्ष उनकी काउंसलिंग हुई। साथ रहने के लिए सहमति जताई।

पत्नी ने कहा- अपने मां-बाप से कभी मिलने नहीं जाएगा, बहनें आएंगी तो बाहर जाकर मिलेगा

जैसे ही आदेश लिखाने लगे तो पत्नी ने फैसले में कुछ बातें लिखने का आग्रह किया, मसलन मेरे साथ रहेगा तो उसका पति अपने मां-बाप से कभी मिलने नहीं जाएगा। बहनें आएंगी तो बाहर जाकर मिलेगा, घर के अंदर नहीं लाएगा। मेंटेनेंस की बकाया राशि दिलाई जाए। बेंच ने यह साफ इनकार किया, कि यह बातें फैसले में नहीं लिखी जा सकती है। इस पर राजीनामा नहीं हो पाया। दोनों पति-पत्नी कोर्ट रूम से बाहर आ गए। बाहर भी आपस में जोर-जोर से बातें करने लगे और बहस शुरू हो गई। बहस इतनी बढ़ गई, कि पत्नी ने चप्पल उतारकर पति को मारना शुरू कर दिया। एकाएक हुए इस घटनाक्रम से वहां मौजूद हर कोई सकते में आ गया। वहां मौजूद लोग व पुलिस ने दोनों को छुड़ाया। पुलिस पति और पत्नी को थाने लेकर चली गई। पुलिस ने पति की शिकायत पर पत्नी को सीआरपीसी की धारा 151 में गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट के समक्ष पेश किया। जहां से जमानत पर रिहा कर दिया। इस घटनाक्रम की कोर्ट परिसर में काफी चर्चा रही।

छह जोड़े मनमुटाव भुलाकर फिर से साथ रहने को राजी हुए
राष्ट्रीय लोक अदालत में सौ से अधिक मामले राजीनामे से निस्तारित करने के लिए सूचीबद्ध थे। पति व पत्नी के इस विवाद में दोनों पक्षों की ओर से उनके परिजन भी आए हुए थे। फैमिली कोर्ट के बाहर काफी चहल-पहल रही। फैमिली कोर्ट के पीठासीन अधिकारी प्रदीप जैन, सदस्य अधिवक्ता मनोज गहलोत, काउंसलर भारती व पुष्पलता टाक ने कई जोड़ों से समझाइश की। इनमें छह जोड़े फिर से साथ रहने के लिए राजी हुए। इन्होंने बेंच के समक्ष एक-दूसरे को माला भी पहनाई। ज्यादातर जोड़े छोटी-मोटी बातों पर सहमति नहीं बनने की वजह से साथ रहने के लिए राजी नहीं हुए और अपने मामलों में पेशी की तारीख ली।


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