मतदान का बहिष्कार / बरसों से समस्याओं पर सुनवाई नहीं, 6 किमी की दूरी के लिए जाना पड़ रहा 18 किमी

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 06:11 AM IST


lack of water in village
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  • 15 किमी से पहले पानी नहीं
  • नाडी-तालाब सब सूखे 
  • रास्ते भी ग्रामीण तैयार करते हैं

मेलावास से पृथ्वीराज लखारा. इसी गांव में जन्मे थे वीर मुकनदास खीची, जिन्होंने महाराजा जसवंतसिंह प्रथम के स्वर्गवास के बाद दिल्ली में औरंगजेब की कैद से मारवाड़ के राजकुमार अजीतसिंह को मारवाड़ लाकर सपेरे के वेश में रक्षा की। बाद में अजीतसिंह मारवाड़ के महाराजा बने। आज ग्रामीणों को इसका गर्व है, साथ ही आजादी के बाद हुई गांव की उपेक्षा की पीड़ा भी। यहां दो हजार से अधिक की आबादी है और 910 मतदाता। किसी ने वोट नहीं दिया। यह जोधपुर का पहला गांव है, जहां के ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया है। वजह जानने भास्कर टीम मेलावास गांव पहुंची। 
 

10 बेरियां, जीएलआर, हैंडपंप है मगर पानी नहीं :
गांव जाने के लिए जोधपुर नागौर हाइवे पर 15 किमी चलने के बाद तीन किमी ग्रामीण रोड़ से जाना पड़ता है। गांव में बना जीएलआर एवं पशुओं के पीने के लिए बना होद में पानी की एक बूंद नहीं दिखी। पास में हैंडपंप भी खारा पानी दे रहा। गंवाई तालाब में पानी सहेजने के लिए ग्रामीणों ने अब तक खोदी दस से अधिक बेरियां भी सूखी पड़ी है। एक के बाद एक बंद हो गई। एक बेरी में रिटायर्ड सूबेदार गायड़सिंह अपने खर्च से पंप के जरिए पानी निकाल रहे लेकिन खारा होने के कारण काम का नहीं। प्यासा पशुधन पानी के लिए भटकता दिखाई दे रहा है। बेरियां भी सूख चुकी है। ग्रामीणों को पानी ताले में रखना पड़ रहा है। 

 

15 किमी दूर से 800 रुपए में एक टैंकर :  

ग्रामीण पानी मंडोर एरिया से मंगवा रहे हैं। एक टैंकर वाला 800 रुपए वसूलता है। बीपीएल परिवार बीरमाराम भील के घर मंडोर से भरकर टैंकर आया था। भील बोले- मेरी रोशनी कुछ वर्ष पूर्व चली गई  थी। अब परिवार की आजीविका पत्नी के भरोसे हैं, महंगा पानी बजट बिगाड़ रहा है। मेलावास की जीएलआर को मीठे पानी की योजना से जोड़ा था लेकिन पंप हाउस 15 किमी दूर करवड़ में है। यहां से पाइपलाइन के बीच झींपासनी, हुड्डों की ढाणी, करवड़ व घड़ाव गांव आते हैं। इन गांवों के अलावा जगह-जगह अवैध कनेक्शनों सेे पानी नहीं पहुंच रहा।

 

2000 आबादी, 910 में से किसी ने नहीं दिया वोट :

मेलावास से गंगाणी 6 किमी है। पंचायत, बैंक, स्कूल, इलाज इत्यादि के लिए गंगाणी जाना पड़ता है। इसके लिए 15 से 18 किमी घूमना पड़ रहा है, कारण बीच में नदी आ जाती है। ग्रामीण अपने स्तर पर मिट्टी डाल रास्ता तैयार करते हैं लेकिन बारिश में नदी में बह जाता है। उप सरपंच हुकम कंवर ने बताया कि जेडीए ने सर्वे किया लेकिन दो करोड़ की लागत देख पुल बनाने से हाथ खींच लिया। भवानीसिंह बताते हैं कि मतदान बहिष्कार मजबूर होकर किया गया।

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