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एआरटी सेंटर में दो साल से लैब टेक्निशियन ही नहीं

महात्मा गांधी चिकित्सालय के संलग्न केएन चेस्ट स्थित संक्रामक रोग संस्थान में संचालित एआरटी सेंटर में इलाज के लिए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:30 AM IST

महात्मा गांधी चिकित्सालय के संलग्न केएन चेस्ट स्थित संक्रामक रोग संस्थान में संचालित एआरटी सेंटर में इलाज के लिए आ रहे एचआईवी मरीजों का आईसीटीसी पर एचआईवी कंफर्मेशन टेस्ट ही नहीं हो रहा है। इसके कारण यहां आने वाले मरीज बाहर निजी लैब से महंगी दर पर यह टेस्ट कराने को मजबूर हैं। कई सालों से यहां आईसीटीसी सेंटर भी खुला हुआ है। पूरे संभाग से यहां एचआईवी के मरीज इलाज के लिए आते हैं। जांच के अभाव में सभी को एमडीएमएच या एमजीएच जाना पड़ता है। ऐसे में मरीज एक दिन में अपना इलाज ही नहीं करा पाते हैं। डॉक्टर देखकर एचआईवी कंफर्मेशन के लिए आईसीटीसी के लिए कहता है, लेकिन वहां जांच नहीं होने के चलते वहां बैठे काउंसलर उन्हें एमडीएमएच या एमजीएच जाने को कहते हैं। वह दूसरे अस्पताल से जांच कराकर वापस आता है तब तक ओपीडी का समय समाप्त हो जाता है। मजबूरन मरीज को या तो वहां रुकना पड़ता है या अगले दिन दुबारा आना पड़ता है। जांच सुविधा नहीं होने के चलते कई एचआईवी मरीज वापस ही नहीं आते। सेंटर पर जिम्मेदारों का कहना है कि कई बार लैब टेक्निशयन को लगाने के लिए अधीक्षक और प्राचार्य के साथ पत्राचार किया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

एचआईवी मरीजों को देखने के लिए मेडिसिन डॉक्टर भी नहीं

एचआईवी मरीजों के अनदेखी का हाल यह है कि सितंबर 2013 से शुरू इस सेंटर में 2015 तक मेडिसिन डॉक्टर थे, लेकिन उसके बाद से यहां मेडिसिन डॉक्टर ही नहीं है। नियमानुसार यहां तीन डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन फिलहाल एक ही डॉक्टर है, वह भी ईएनटी विभाग का।

ऑनलाइन जांच की पर्ची तक की व्यवस्था नहीं

सेंटर पर एचआईवी मरीजों की सभी जांच फ्री है। इसके बावजूद उन्हें ‘जीरो’ की पर्ची कटाने के लिए सेंटर से 100-150 मीटर आगे बने केएन चेस्ट टीबी अस्पताल में जाना पड़ता है।

टीबी मरीजों की भी एचआईवी की सौ प्रतिशत जांच नहीं हो रही

केएन चेस्ट में टीबी के मरीजों की टीबी की ही जांच हो पा रही है। उनकी एचआईवी की जांच नहीं हो रही है। लैब टेक्निशयन नहीं होने के चलते टीबी व एचआईवी दोनों मरीजों की जांच नहीं हो रही है।

जिम्मेदार बोले- समस्या होगी तो समाधान करवा देंगे

डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. पीके खत्री का कहना है कि उनकी जानकारी के अनुसार वहां टेस्ट हो रहे हैं। पूरी जानकारी पता करके ही बता सकता हूं, कारण कि वहां के नोडल ऑफिसर डॉ. परिहार उनका फोन ही नहीं उठाते हैं।

डाॅ. पीसी व्यास का कहना है कि वहां एक लैब टेक्नीशियन लगा है, जो वहां जांच करता है, लेकिन आप बता रहे हैं तो मैं चैक करवा लेता हूं। कोई समस्या होगी तो कुछ दिन में ही लैब टेक्नीशियनों का टेंडर होने वाला है, वहां अलग से टेक्निशियन लगा देंगे। वहां आरोग्य ऑनलाइन का काम भी चल रहा है, जिससे मरीजों को टीबी अस्पताल में जांच की पर्ची कटाने के लिए नहीं जाना पड़ेगा।

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