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मिलिए उन वुमन एंटरप्रिन्योर्स से जो स्टार्टअप से बदल रही जिंदगियां

ये शहर की वे फीमेल्स हैं जिनका बिजनेस से कोई ताल्लुक नहीं पर परेशान लोगों की जिंदगी को आसान बनाने के लिए ये...

Dainik Bhaskar

Aug 03, 2018, 03:05 AM IST
मिलिए उन वुमन एंटरप्रिन्योर्स से जो स्टार्टअप से बदल रही जिंदगियां
ये शहर की वे फीमेल्स हैं जिनका बिजनेस से कोई ताल्लुक नहीं पर परेशान लोगों की जिंदगी को आसान बनाने के लिए ये स्टार्टअप शुरू कर बिजनेस की दुनिया में उतरीं। तीन अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे इन स्टार्टअप में हैल्थ, स्टडी से जुड़े हैं तो एक दिव्यांग व पीड़ितों को उनकी मेहनत का मुनाफा दिला रहा है। जब इन्होंने स्टार्टअप शुरू किया तो रिश्तेदारों-परिचितों ने ताने दिए थे कि लड़की होकर कैसे बिजनेस करोगी लेकिन आज अपने-अपने क्षेत्र में सफलता की ओर बढ़ रही इन तीनों का हौसला बुलंद है। इनके स्टार्टअप शुरू करने से लेकर संघर्ष की कहानी...

हैल्थ, एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट जैसे विषयों पर शुरू किए स्टार्टअप से बना रही है अपनी अलग पहचान

वैकल्पिक चिकित्सा से दे रही हर बीमारी का सही इलाज

गरिमा अग्रवाल

स्टडी

सीए, सीएस

स्टार्टअप

दवाकोष डॉट कॉम

गरिमा भारत की यंगेस्ट स्टूडेंट है जिसने सीए, सीएस और सीडब्ल्यूएस में ऑल इंडिया टॉप किया था। सीएस के तीनों फेजों की भी वे ऑल इंडिया टॉपर रहीं। गरिमा ने बताया कि वे जब लोगों को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, स्किन डिजीज और मोटापा जैसी बीमारियों से संघर्ष करते देखतीं तो दुख होता। गरिमा ने बताया कि उनके नाना-दादा वैद्य थे और उनकी मां भी घरेलू नुस्खों से ही इलाज करतीं। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने दो महीने पहले स्टार्टअप शुरू किया जिसमें आयुर्वेद, एक्युप्रेशर, यूनानी, नैचुरोपैथी, हर्बल होम्योपैथी और पंचकर्म जैसी वैकल्पिक चिकित्सा उपलब्ध करा रही हैं। यहां सभी पद्धतियों से संबंधित जानकारियां डॉक्टर्स, दवाइयां और इक्यूप्मेंट्स उपलब्ध हैं।

स्टूडेंट्स 3डी इमेज से समझेंगे जटिल किताबी कंसेप्ट्स

विद्या चौधरी

स्टडी

इंजीनियरिंग

स्टार्टअप

अविदा लैब्स

बचपन में इंग्लिश मूवीज देखते हुए इच्छा होती थी कि मैं भी उसी वर्चुअल दुनिया में चली जाऊं। विद्या एमबीएम कॉलेज से इंजीनियरिंग करने के बाद अब ऐसा डिवाइस बना रही हंै जो किताबों के कंटेंट को थ्री डी इमेज में दिखाएगा। विद्या ने बताया कि शुरुआत में कहीं से भी ग्रांट नहीं मिली। उन्होंने ह्यूमन बॉडी, वॉटर साइकिल, ह्रदय संरचना और मेप्स जैसे 116 टॉपिक्स को 3 डी इमेज में कन्वर्ट कर एक कार्ड बोर्ड डिवाइस तैयार किया है जिसे आंखों पर पहनकर वर्चुअल रियलिटी से आसानी से कंसेप्ट्स समझे जा सकते हैं। जल्द ही वे डिवाइस की मैन्यूफेक्चरिंग के लिए लैब सैटअप करने वाली हैं। इस स्टार्टअप को एक एमएनसी ने इंडिया के टॉप 20 स्टार्टअप्स में भी जगह दी हैं।

दिव्यांग व पीडि़तों की मेहनत को दिला रही मुनाफा

हर्षिता राठौड़

पढ़ाई: एमए इंग्लिश लिट.

स्टार्टअप:

गंगसूत्र

हर्षिता का हैंडीक्राफ्ट बिजनेस से कोई नाता नहीं था। दिल्ली में एक फाउंडेशन में जॉब करने के दौरान वे स्पेशल एबल्ड चाइल्ड, एसिड अटैक्स की शिकार महिलाओं, परिजनों के छोड़े गए कैंसर पेशेंट और अनाथ महिलाओं-बच्चों से मिलीं। ये क्राफ्ट का छोटा-मोटा काम करते थे लेकिन कमाई नहीं होती थी। इनकी लगन देखकर हर्षिता ने उनके काम की सही कीमत दिलाने का फैसला लिया और स्टार्टअप शुरू कर दिया। कई राज्यों में दिव्यांग-पीड़ितों से संपर्क कर एक नेटवर्क बनाया और उनके बनाए ऑर्गेनिक हैंडमेड क्राफ्ट आइटम को अपने स्टोर गंगसूत्र में जगह दी। इनके बनाए पोट्रेट, जूलरी, साड़ी, पेंटिंग्स, ऑर्गेनिक फूड व कॉस्मेटिक आदि को बेच कर वे उन्हें मुनाफा दे रही हैं।

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