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हाथों में बंधने वाली मौली अब सिर के साफे की शान बनी

शुभ व धार्मिक अवसर पर हाथों पर बांधी जाने वाली मौली अब सिर की भी शान बन रही है। शहर के ही एक 25 वर्षीय युवा इरफान अली...

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2018, 03:05 AM IST
हाथों में बंधने वाली मौली अब सिर के साफे की शान बनी
शुभ व धार्मिक अवसर पर हाथों पर बांधी जाने वाली मौली अब सिर की भी शान बन रही है। शहर के ही एक 25 वर्षीय युवा इरफान अली रंगरेज ने पहली बार मौली से जोधपुर साफा बनाया है। इरफान ने बताया कि कुछ अलग हटकर करने के बारे में उन्होंने बहुत सोचा और शुभ मानी जाने वाली मौली को मांगलिक अवसर पर पहने जाने वाले साफे से जोड़ा। इसके बाद उन्होंने मौली से ही साफा बनाने की ठानी। इस योजना को चरितार्थ करने में उन्हें काफी मुश्किलें आईं। सबसे पहले उन्होंने एक पतले कपड़े का अस्तर लिया। इस पर मौली के धागों को साफे के आकार में बांधना शुरू किया। कई बार धागे आपस में उलझे तो पूरा काम सिरे से शुरू करना पड़ा। धागे बिखरें और खुलें नहीं इसके लिए बीच-बीच में एडहेसिव भी लगाई। सिर पर बांधने के बाद साफा गर्मी या पसीने में रंग नहीं छोड़ दे इसलिए श्रेष्ठ क्वालिटी की मौली ली। यह 400 रुपए किलो आई। कुल तीन किलो मौली से एक साफा बना। इस पूरी जद्दोजहद में पूरे तीन दिन लगे। इरफान के भाई अरशद ने भी पूरी मदद की। इतनी मेहनत के बाद जब मौली का साफा बनकर तैयार हुआ तो जिसने भी इसे देखा उसने इस क्रिएटिविटी को सराहा। इस सफलता से उत्साहित होकर इरफान ने भगवान की मूर्ति के लिए भी 11 इंच के आकार में मौली से साफा बनाया। इतना ही नहीं उन्होंने की-चेन के लिए भी छोटा सा मौली साफा भी बनाया।

दिल से बनाया है, बेचना नहीं चाहते

हाथीराम का ओडा में रहने वाले इरफान कहते हैं कि- हमारा परिवार पीढ़ियों से साफा, बंधेज का काम कर रहा है। मैंने भी यह काम बचपन से ही सीखा। कुछ यूनिक करने के लिए मौली का साफा बनाया। वे कहते हैं कि इसे पूरे मन से बनाया है, बेचने का कोई इरादा नहीं है।

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