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हंस दृष्टि से काम करें, ताकि किसी के साथ अन्याय न हो : वैराग्यपूर्णा

साध्वी ने श्रद्धालुओं को अपने बच्चों को संस्कारित करने का आह्वान किया। शहर में संतों-साध्वियों के प्रवचन जारी,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 08, 2018, 04:05 AM IST

हंस दृष्टि से काम करें, ताकि किसी के साथ अन्याय न हो : वैराग्यपूर्णा
साध्वी ने श्रद्धालुओं को अपने बच्चों को संस्कारित करने का आह्वान किया।

शहर में संतों-साध्वियों के प्रवचन जारी, साधकों को सत्संग का महत्व बताया

जोधपुर| साध्वी वैराग्यपूर्णा ने कहा, कि परमात्मा की आज्ञा हमें हंस दृष्टि प्रदान करती है। हंस दृष्टि से काम करेंगे तो किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। वे मंगलवार को नागौरी गेट स्थित मुहताजी मंदिर में साधकों का मार्गदर्शन कर रही थीं। उन्होंने कहा, कि जो परमात्मा की अाज्ञा की धारा में स्नान करता है, वही श्रावक है। परमात्मा की अाज्ञा हमारे भीतर ऐसी विवेक शक्ति पैदा कर देती है, जिससे हम हेय, ज्ञेय और उपादेय को समझ सकते हैं।

इसी तरह राजेंद्र सूरि जैन ज्ञान मंदिर त्रिस्तुति पौषधशाला में साध्वी दर्शनकला ने अपने प्रवचन में कहा, कि सभी धर्मों में धर्म श्रवण का अत्यंत महत्व है। जीवन में बदलाव लाना हो तो धर्म श्रवण करना होगा। उन्होंने कहा, कि मनोवैज्ञानिक भी कहते हैं कि अध्ययन से अधिक लाभ श्रवण से होता है। सुनते समय मन काे समग्र रूप से एकाग्र करना पड़ता है, क्योंकि जो बोला जा रहा है, वह दोहराया नहीं जाएगा, लेकिन पढ़ते समय आप इच्छानुसार पन्ने पलटकर किताब पढ़ सकते हैं।

घर में बुजुर्गों की सेवा ही सर्वश्रेष्ठ : साध्वी कमलप्रभा

डंको बाजे रे महामंदिर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में चल रहे चातुर्मास में साध्वी कमलप्रभा ने प्रवचन में कहा कि धर्म की प्रयोगशाला घर से ही प्रारंभ होती है, लेकिन विडंबना है कि व्यक्ति धर्म की क्रियाएं धर्म स्थान पर तो करता है मगर घर में उसे आचरण में नहीं उतारता। उन्होंने कहा कि घर में बुजुर्गों व माता-पिता के प्रति विनय रखते हुए जो सेवा की जाती है, वहीं सर्वश्रेष्ठ है।

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