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कांस्टेबल भर्ती परीक्षा से 3 दिन पहले कार्रवाई

कांस्टेबल भर्ती परीक्षा से तीन दिन पहले पुलिस को नकल गिरोह के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है। कांस्टेबल, एलडीसी सहित...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 12, 2018, 04:40 AM IST

कांस्टेबल भर्ती परीक्षा से 3 दिन पहले कार्रवाई
कांस्टेबल भर्ती परीक्षा से तीन दिन पहले पुलिस को नकल गिरोह के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है। कांस्टेबल, एलडीसी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल कराने वाले नकल माफिया व वांछित इनामी बदमाश जगदीश विश्नोई के कोचिंग सेंटर संचालक भाई भीखाराम जाणी, सहयोगी अरुण पंवार और सुरेश विश्नोई सहित 11 जनों को आईजी रेंज व ग्रामीण पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। यह गिरोह 14-15 जुलाई को होने वाली पुलिस कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा में नकल से पास कराने की गारंटी देकर हर परीक्षार्थी से 5-7 लाख रुपए वसूल कर रहा था। इस परीक्षा में 4 तरीकों से नकल कराने की प्लानिंग भी कर रखी थी।

आईजी (जोधपुर रेंज) हवासिंह घुमरिया ने बताया कि कांस्टेबल भर्ती परीक्षा को देखते हुए हाल में कुख्यात नकल गिरोह के सरगना जगदीश विश्नोई की गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था। सूचना मिली कि जगदीश विश्नोई का भाई भीखाराम जाणी, जो जोधपुर में जालोरी गेट पर अनुपम क्लासेज नाम से कोचिंग सेंटर चलाता है। इस टीम ने अनुपम क्लासेज के संचालक भीखाराम विश्नोई व उसके सहयोगी अरुण पंवार और सुरेश विश्नोई के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लेकर निगरानी की, तो पता चला कि यह गिरोह कई प्रतियोगी परीक्षाओं में परीक्षार्थी के मिलते-जुलते होशियार लड़कों की फोटो मिक्सिंग व एडिटिंग करवाकर परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करते हैं।

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5 से 7 लाख में कांस्टेबल भर्ती पास कराने की दे रहे थे गारंटी

कोचिंग संचालक, दो सहयोगी, 7 अभ्यर्थी और एक फोटो स्टूडियो संचालक गिरफ्तार

पुलिस की गिरफ्त में नकल कराने वाला गिरोह।

गिरोह इस्तेमाल करता था ऑन शीट-डीटीएच जैसे कोड वर्ड

कार्रवाई रेंज की, एफआईआर कमिश्नरेट में, जांच कराएंगे एसओजी से

ऐसा होने से: कमिश्नरेट ने कार्रवाई की वैद्यता पर सवाल उठाया, रेंज पुलिस कहती है पूरी तरह वैध है

स्पेशल कोरेस्पोंडेंट.जोधपुर| नकल कराने वाले रैकेट का भंडाफोड़ करने की पूरी कार्रवाई रेंज व जोधपुर ग्रामीण पुलिस की थी, परंतु रैकेट जोधपुर शहर के कोचिंग सेंटर से संचालित हो रहा था इसलिए एफआईआर कमिश्नरेट के खांडा फलसा थाने में दर्ज तो हुई है, जांच जयपुर एसओजी से कराई जा सकती है। क्योंकि एसओजी थाना ऐसे ही अपराधों की जांच के लिए ही है। परंतु इस प्रोसेस में कार्रवाई और एफआईआर को लेकर मतभेद पैदा हो गए हैं। शेष | पेज 13

ऐसा होने से:...

कमिश्नरेट कार्रवाई की वैद्यता को संदिग्ध बता रहा है तो रेंज पुलिस उसे पूरी तरह वैद्य कह रही है।

क्षेत्राधिकार में अतिक्रमण से पैदा हुआ मतभेद: रेंज पुलिस ने कमिश्नरेट में घुस कर कार्रवाई की और उसकी सूचना कमिश्नर पुलिस को नहीं दी। जब एफआईआर देने गए तो कहा गया कि फर्द गिरफ्तारी व फर्द जब्ती के साथ रिपोर्ट दो। इस जद्दोजहद में गिरफ्तारी हुई, फिर रात में खांडा फलसा थाने में एफआईआर दर्ज हुई। वैद्यता व संदिग्धता का विवाद क्यों?

एसपी (रूरल) राजन दुष्यंत ने बताया कि दो-ढाई महीने तक सर्विलांस पर रहे भीखाराम व उसके दो प्रमुख सहयोगी कोड वर्ड में बात करते थे। इनमें एक कोड था- ऑन शीट। इसका मतलब था असली अभ्यर्थी के स्थान पर भीखाराम द्वारा पिछले एक-दो साल में तैयार किए गए नकली अभ्यर्थी को परीक्षा देने के लिए बिठाना था। दूसरा कोड था डीटीएच। यानी मूल अभ्यर्थी घर बैठा रहे और उसकी जगह दूसरा फर्जी अभ्यर्थी परीक्षा देगा।

कमिश्नरेट रेंज पुलिस

कमिश्नरेट: बिना एफआईआर के गिरफ्तारी उचित नहीं।

रेंज पुलिस: प्रिवेंटिव गिरफ्तारी होती है, एसीबी भी पहले गिरफ्तार कर बाद में जयपुर मुख्यालय पर एफआईआर दर्ज कराती है।

कमिश्नरेट: प्रिवेंटिव गिरफ्तारी आईपीसी की धारा 108, 109, 110 व 151 में होती है, एसीबी में गिरफ्तारी प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट में होती है।

रेंज पुलिस: रेंज में कहीं एफआई कराते तो गलत होता क्योंकि अपराध कमिश्नरेट के एरिया में हो रहा था।

कमिश्नरेट: अपराध तो हुआ ही नहीं, अपराध करने की सोच रहे थे यह एफआईआर है। ऐसी कमियों का असर इस केस पर पड़ने की संभावना है।

रेंज पुलिस: केस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, सर्विलांस के दौरान आरोपियों के खिलाफ कई सबूत मिले हैं और जांच में भी कई बातें और सामने आ जाएगी।

दो फोटो मिक्स करके बनाते थे तीसरा फोटो इसके बदले वसूलते थे दो से ढाई लाख रु.

पुलिस टीम ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसमें पता चला कि भीखाराम अपने कोचिंग सेंटर के होशियार लड़कों की फोटो से असली परीक्षार्थी के फोटो को एडिट कर देता था। फोटो मॉर्फिंग में न्यू आईजी स्टूडियो का रमेश प्रजापत मदद करता था। एडिट फोटो को एडमिट कार्ड में लगाकर असली अभ्यर्थी की जगह होशियार लड़के से परीक्षा दिलाने की बात भी सामने आई। फोटो मिक्सिंग के लिए गिरोह अभ्यर्थी से दो से ढाई लाख रुपए तक वसूलता था।

रेंज पुलिस ने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर कार्रवाई की है। कार्रवाई में अनेकानेक कारण है जिससे उसकी वैद्यता संदिग्ध हो जाती है। हम इसका परीक्षण करेंगे।

-अशोक राठौड़, कमिश्नर पुलिस।

रेंज आईजी एसओजी के साथ प्रदेश की पुलिस गिरोह पकड़ने में लगी थी, हमारे पास ज्यादा सूचनाएं थी इसलिए कार्रवाई कर खांडा फलसा थाने में एफआईआर कराई। कार्रवाई पूरी तरह वैध है।

-हवासिंह घुमरिया, आईजी रेंज

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