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ऑर्डिनेंस 317 यूजीसी रेगुलेशन के अनुरूप नहीं, चांसलर ऑफिस को गुमराह कर अनुमोदन करवाया : जेएनवीयू

36 शिक्षकों की बर्खास्तगी का मामला जोधपुर| जेएनवीयू शिक्षक भर्ती घोटाले में बर्खास्त किए गए 36 शिक्षकों के मामले...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 04:50 AM IST

36 शिक्षकों की बर्खास्तगी का मामला

जोधपुर| जेएनवीयू शिक्षक भर्ती घोटाले में बर्खास्त किए गए 36 शिक्षकों के मामले में कोर्ट में गुरुवार को जेएनवीयू की ओर से बहस की गई, जो अधूरी रही। अब अगली सुनवाई 22 मई को होगी। जेएनवीयू की ओर से अधिवक्ता दीपेशसिंह बेनीवाल ने बहस करते हुए कोर्ट को बताया कि अभी यह निर्धारित किया जाना है कि विवि की ओर से जारी किया आॅर्डिनेंस 317 वैधानिक है या नहीं। यूजीसी रेगुलेशन लागू होने के बाद जो आॅर्डिनेंस बना है, वह प्रभावी होगा या नहीं, क्योंकि इस आॅर्डिनेंस में यूजीसी रेगुलेशन की गाइडलाइन की पालना नहीं की गई है।

बेनीवाल ने कहा कि यूजीसी रेगुलेशन बाध्यकारी है। विवि द्वारा बनाया गया आॅर्डिनेंस यूजीसी रेगुलेशन के अनुरूप नहीं है, इसलिए इसे वैधानिक नहीं कहा जा सकता है। विवि के तत्कालीन अधिकारियों ने जानबूझकर यूजीसी रेगुलेशन की अवहेलना की। 18 सितंबर 2010 को यूजीसी रेगुलेशन का नोटिफिकेशन जारी हो गया था और 22 सितंबर 2010 को राज्य सरकार ने सभी विश्वविद्यालयों को इसे भेजकर इसकी पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। आॅर्डिनेंस में असिस्टेंट प्रोफेसर की शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई, वह यूजीसी रेगुलेशन के अनुरूप नहीं थी। इस बात की जानकारी होते हुए भी विवि के तत्कालीन अधिकारियों ने उनके द्वारा आॅर्डिनेंस बनाकर सिंडिकेट में अनुमोदन करवाकर कुलाधिपति को भिजवा दिया गया। कुलाधिपति कार्यालय को गुमराह करके उसका अनुमोदन करवाया गया, इसलिए इस आॅर्डिनेंस को कानूनी रूप से सही नहीं कहा जा सकता, इसलिए इसके तहत हुई भर्तियां भी सही नहीं हैं। समयाभाव के कारण बहस अधूरी रही। जस्टिस अरुण भंसाली ने इस मामले में अगली सुनवाई 22 मई मुकर्रर की है। उल्लेखनीय है कि जेएनवीयू प्रशासन ने पिछली सरकार के कार्यकाल में हुई भर्ती में 36 चयनित शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया था। बाद में कोर्ट में जेएनवीयू के आदेश को चुनौती दी गई, जिस पर कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी थी।

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