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रोजाना 1 करोड़ ली. पानी गली-सड़कें धोने में व्यर्थ बहा देते हैं उसे बचाएं तो टेल एंड कॉलोनियों के लोगों की प्यास बुझ सकती है

शहरवासी हर महीने पांच करोड़ रुपए लागत का पानी सड़कें, नालियां और फर्श धोने और गार्डनिंग में बहा देते हैं। जिसका...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 04:50 AM IST

  • रोजाना 1 करोड़ ली. पानी गली-सड़कें धोने में व्यर्थ बहा देते हैं उसे बचाएं तो टेल एंड कॉलोनियों के लोगों की प्यास बुझ सकती है
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    शहरवासी हर महीने पांच करोड़ रुपए लागत का पानी सड़कें, नालियां और फर्श धोने और गार्डनिंग में बहा देते हैं। जिसका बिल वे महज आठ से दस लाख रुपए देते हैं। शहरवासी प्रतिदिन करीब एक करोड़ लीटर पानी सड़कें, नालियां और घरों के फर्श धोने में बहाते हैं और लागत की करीब दस प्रतिशत राशि सरकार को चुकाते हैं।

    दैनिक भास्कर के जल मित्रों ने शहर में सड़कें और गलियां धोने वाले लोगों का पता लगाकर उन्हें पानी का मोल समझाया और पानी बचाने की सीख दी। दरअसल, हिमाचल प्रदेश के पोंग बांध से एक उपभोक्ता के घर तक एक लीटर पानी पहुंचाने की लागत तीस से चालीस पैसे आती है और पीएचईडी इसके बदले एक उपभोक्ता से एक से डेढ़ पैसा प्रति लीटर ही लेता है। पीएचईडी औसतन हर माह शहर के घरों में औसतन 300 एमएलडी पानी पहुंचाने के लिए 18 से 20 करोड़ यानी सालाना 3600 एमएलडी पानी के लिए करीब सवा दो अरब रुपए खर्च करता है, जबकि बदले में आमजन से बिलिंग के रूप में पांच से सात करोड़ रुपए लेता है। यानी पीएचईडी प्रतिवर्ष करीब दो अरब का घाटा खाकर आमजन की जरूरत को पूरा करने के लिए उनके घरों तक पानी पहुंचाता है और शहर के करीब एक चौथाई उपभोक्ता यानी 50 हजार से अधिक कंज्यूमर लाखों लीटर पानी को व्यर्थ बहा देते हैं। इस संबंध में पीएचईडी के एसई सिटी दिनेश पेड़ीवाल का कहना है कि हर माह 18 से 20 करोड़ खर्च करके पीएचईडी घरेलू उपभोक्ताओं से करीब दो प्रतिशत राशि ही लेता है। इतने महंगे पानी को भी लोग गार्डनिंग, चबूतरे, सड़क-गली और गाड़ियां धोने में फिजूल बहा रहे हैं।

    हर महीने 5 करोड़ रुपए लागत का पानी सड़कें और नालियां धोने में बहा देते हैं लोग

    घर के बाहर सड़कें धोने में पानी नहीं खपाएंगे तो कई प्यासे लोगों तक पहुंच सकेगा पेयजल

    चौपासनी हाउसिंग बोर्ड सेक्टर संख्या 9, 11 व 21 में वाटर सप्लाई के दौरान लोगों द्वारा घरों में बाहर पाइप लगाकर चबूतरियां और सड़कें धोने वालों के फोटो लिए और उन्हें पानी की कीमत से वाकिफ करवाया। लोगों को बताया कि जिस पानी को व्यर्थ में सड़कें धोने के लिए काम में लिया जा रहा है, वही पानी अगर बचाएं तो शहर की टेल एंड की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को यह पानी नसीब हो सकता है। इस दौरान एक बुजुर्ग पुष्पेंद्र सिंह ने उनकी बात को समझा और लोगों को भी इस ओर प्रेरित करने का संकल्प लिया।

    उपनिदेशक माध्यमिक शिक्षा कार्यालय: दिनभर व्यर्थ बहते पानी की सप्लाई रुकवाई

    जिला शिक्षा अधिकारी व उपनिदेशक माध्यमिक कार्यालय के बाहर सरस बूथ का केबिन है। यहां पर चार मटकियां लगी हुई हैं और पानी का कनेक्शन विभाग के अंदर लगे नल से लिया हुआ है। यहां पानी दिनभर आता है और दुकानदार मुकेश इस का उपयोग चाय बनाने के लिए करता है। बाकी पानी दिनभर फिजूल बहता रहता है। जल मित्र महेंद्रसिंह गुर्जर ने मंगलवार को दिनभर इस पर नजर रखी। शाम को एडीईओ अशोक विश्नोई को इस बारे में शिकायत की। एडीईओ ने तुरंत व्यर्थ बह रहे पीने के पानी की सप्लाई को रुकवाया।

    पानी आते ही धोने लगी घर की दीवारें, प्यासे लोगों के फोटो दिखाए तो समझा पानी का मोल

    छात्राध्यापिकाओं ने लिया पानी बचाने का संकल्प

    दैनिक भास्कर के पानी को बचाने की मुहिम के तहत छात्राध्यापिकाओं ने पानी को बचाने का संकल्प लिया। संस्कार बीएड कॉलेज की छात्राध्यापिकाओं को व्याख्याता व जल मित्र मनोज माथुर ने जल बचाने का संकल्प दिलाया।

    कागा-कागड़ी एरिया में पानी की बारी के दौरान बुजुर्ग महिला संपत घर में पानी भरने के बाद बाहर सड़क धोने लगीं। काफी देर तक सड़क धोने के बाद भी शांत नहीं हुई और पाइप लेकर सड़क पर फव्वारें छोड़ने लगीं। इस बीच वहां से गुजर रहे जल मित्र राजेश्वर देवड़ा ने देखा तो उन्हें समझाया, लेकिन वे नहीं मानी और उल्टा बोलीं कि हम पानी का बिल भरते हैं। इस पर देवड़ा ने उन्हें समाचार पत्रों में जोधपुर, बाड़मेर-जैसलमेर एरिया में पानी के तरस रहे लोगों के फोटोग्राफ बताए तो वे मान गईं और कभी भी फिजूल पानी नहीं बहाने का संकल्प लिया।

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