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जेएनवीयू: फिक्स-पे पर लगे सेवानिवृत्त और ठेका कर्मियों को अतिरिक्त काम के नाम पर हो रहा भुगतान

ऐसे गबन से वित्तीय सलाहकार भी हैरान बोले- जांच के बाद कार्रवाई करेंगे विवि में अनियमितता के 2 खुलासे अफसरों...

Dainik Bhaskar

Aug 06, 2018, 04:50 AM IST
ऐसे गबन से वित्तीय सलाहकार भी हैरान बोले- जांच के बाद कार्रवाई करेंगे

विवि में अनियमितता के 2 खुलासे

अफसरों की मेहरबानी से दो विभाग के चहेते कर्मचारी कर रहे मनमर्जी, जो काम किया ही नहीं उसके बदले उठा रहे रुपए

हैरत में डालने वाला सवाल...

स्थापना शाखा में जांच के लिए कैसे आए प्राइवेट परीक्षार्थियों के फार्म

मामले की पड़ताल में सामने आया कि स्थापना शाखा के कई कर्मचारियों को प्राइवेट परीक्षार्थियों के फार्म जांचने के नाम पर भी अतिरिक्त भुगतान करना दिखाया गया है। जबकि अब तक प्राइवेट परीक्षार्थियों के फार्म यूनिवर्सिटी की संबंधित फैकल्टी या मेन ऑफिस में एकल खिड़की पर जमा होते आए है। इनके फार्म चेक करने का काम परीक्षा विभाग या संबंधित फैकल्टी करते हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि स्थापना शाखा के कर्मचारियों से क्यों प्राइवेट परीक्षार्थियों के फार्म का काम करवाया गया?

वर्ष 2017-18 में 6 कर्मचारियों को हुआ 29,832 रुपए का अतिरिक्त भुगतान

18 जून 2018 को निकाले गए आदेश से पता चलता है कि स्थापना शाखा के रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर युक्त पत्र में लिखा है कि 2017-18 में इन कर्मचारियों ने ड्यूटी टाइम के अतिरिक्त काम किया है। जिसमें सबसे अहम काम प्राइवेट स्टूडेंट्स के फार्म प्राप्त करना और जांच कर आगे देना का है। इसमें एसपी रामदेव को 4000, भैराराम को 6000, महावीर सिंह को 6000, जहीरुद्दीन को 6000 और नेशन व्यास को 6000 व रावतराम को 1832 रुपए का रेमुनरेशन के नाम पर भुगतान किया गया। कुल 29 हजार 832 रुपए।

अगर विभागों में कर्मचारी इस तरह मनमर्जी से भुगतान उठा रहे हैं तो हैरानी वाली बात है। इन दोनों मामलों की जांच करवाई जाएगी। अगर कहीं भी गड़बड़ी पाई गई तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूर करेंगे। - दशरथ सोलंकी, वित्तीय सलाहकार, जेएनवीयू

अकाउंट शाखा: कंसल्टेंसी का काम शिक्षक का, लेकिन क्लर्क से लेकर एआर तक इसके नाम पर उठा रहे भुगतान

जोधपुर| जेएनवीयू में घोटाले का दूसरा मामला भी कर्मचारियों द्वारा मनमर्जी से भुगतान उठाने से जुड़ा है। स्थापना शाखा की तर्ज पर अकाउंट शाखा के अफसर-कर्मचारी भी ऐसा कर रहे हैं। यहां कार्यरत अस्सिटेंट रजिस्ट्रार से लेकर क्लर्क तक कंसलटेंसी फीस के नाम पर हजारों रुपए उठा रहे हैं। जबकि यह काम यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का है। कंसलटेंसी की इस बंदरबांट से मुखिया भी अनजान है।

विभाग के 30 कर्मचारियों ने उठा ली डेढ़ लाख रुपए की कंसल्टेंसी फीस

अकाउंट शाखा के नरेंद्र कुमार गोयल ने 10 हजार, राधेश्याम शर्मा 7 हजार, मोहम्मद शाहिद कुरैशी 7 हजार, अश्विनी त्रिवेदी 7 हजार, किशनराज जैन 7 हजार, ललितकुमार वर्मा 7 हजार, रमेशचंद्र 6,760 रुपए, सुधा कमल सोनी 6 हजार, रवींद्र चौहान 7 हजार, लोकेंद्र कुमार शर्मा 5 हजार, दिनेश कुमार रामावत 6 हजार, अशोक कुमार शर्मा का 5 हजार, सुरेंद्रसिंह चौहान 5 हजार, राजेश व्यास 5 हजार, सुभाष जोशी 5 हजार, नगाराम चौधरी 5 हजार, मीता चौहान 4 हजार, सुमेर खान 4 हजार, जगदीश भाटी 4 हजार, मूलाराम पंवार 5 हजार, खेतसिंह इंदा 3 हजार, अभय कंवर राठौड़ 3 हजार, पुष्पा पटेल 3 हजार, अजय कुमार परिहार 3 हजार, अमित कुमार 5 हजार, देव बहादुर 3 हजार, रहीम खान 3,750, जमनादास वर्मा 3,750, वीना शर्मा 5 हजार, सत्यनारायण साद 3,750 और शिवलाल शर्मा 3,750 रुपए ने बतौर कंसलटेंसी फीस के लिए है।

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