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संतों और भक्तों का संग जीव को परमात्मा से जोड़ने वाला होता है : राधाकृष्ण

कम्युनिटी रिपोर्टर | जोधपुर गोवत्स राधाकृष्ण महाराज ने कहा, कि संतों और भक्तों का संग जीव को परमात्मा से जोड़ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 05, 2018, 04:55 AM IST

संतों और भक्तों का संग जीव को परमात्मा से जोड़ने वाला होता है : राधाकृष्ण
कम्युनिटी रिपोर्टर | जोधपुर

गोवत्स राधाकृष्ण महाराज ने कहा, कि संतों और भक्तों का संग जीव को परमात्मा से जोड़ने वाला होता है। वे शनिवार को गांधी मैदान में भक्ति रस महोत्सव के चौथे दिन साधकों का मार्गदर्शन कर रहे थे। उन्होंने कहा, कि भगवान के प्रसाद को कभी सामान्य नहीं समझना चाहिए। भगवान का प्रसाद लेने वाले पर माया का प्रभाव नहीं होता।

उन्होंने जगन्नाथ कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा, कि जगन्नाथ पुरुषोत्तम क्षेत्र में विराजते हैं। राजा इंद्रद्युम की भक्ति से भगवान जगन्नाथ महाप्रभु प्रकट हुए। भगवान के मुख कमल के दर्शन मात्र से मनुष्यों के पाप नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा, कि भगवान की भक्ति में जाति-धर्म का भेद नहीं किया जाता। जो सच्चे मन से प्रभु की भक्ति करता है, वह श्रेष्ठ हो जाता है। कथा प्रसंग के दौरान वैष्णव भूषण सगरिया बाबा ने अपने आशीर्वचन दिए।

भक्ति रस महोत्सव में कलाकारों ने भजनों के साथ नृत्य की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

निष्काम भक्ति से जीव भवसागर से पार हो जाता है : संत रामप्रसाद

सूरसागर बड़ा रामद्वारा के महंत रामप्रसाद महाराज ने कहा, कि चारों युगों के चार धाम धरा पर विद्यमान है। कलियुग का धाम जगन्नाथ धाम है। कलिकाल में जगन्नाथ धाम की भक्ति जीव को सांसारिक बंधनों से मुक्ति प्रदान करती है। उन्होंने कहा, कि निष्काम भक्ति जीव को भवसागर से पार लगा देती है।

श्रद्धालुओं के निशुल्क बसों की व्यवस्था| भक्ति रस महोत्सव में आने के लिए बीजेएस, महामंदिर, नागौरी गेट, सूरसागर, चानणा भाकर क्षेत्रों से दोपहर 12 बजे निशुल्क बसों की व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए रखी गई है।

सावन मास में हिंडोरों के दर्शन आकर्षण का केंद्र

सावन मास में गांधी मैदान के पंडाल में लगे हिंडाेरों के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बाहर से आए कलाकार भजनों के बीच अपनी नृत्य प्रस्तुति करते हैं। इसके लिए अलग से मंच का निर्माण करवाया गया है। प्रतिदिन पुरी (उड़ीसा) से आए जगन्नाथ के रसिकों द्वारा तैयार किया गया जगन्नाथ का प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। इसके साथ गांधी मैदान में गोशाला का निर्माण करवाने के साथ गोशाला की परिक्रमा की व्यवस्था भी की गई है।

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