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अवैध निर्माण को कंपाउंड करने की नियमों के तहत छूट दी जाए: सरकार

मास्टर प्लान पर लार्जर बैंच ने सभी पक्ष सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा लीगल रिपोर्टर| जोधपुर हाईकोर्ट के...

Dainik Bhaskar

Aug 03, 2018, 05:00 AM IST
मास्टर प्लान पर लार्जर बैंच ने सभी पक्ष सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा

लीगल रिपोर्टर| जोधपुर

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग, जज संगीत लोढ़ा व अरुण भंसाली की लार्जर बेंच में गुरुवार को भी मास्टर प्लान पर सुनवाई हुई। सरकार की ओर से कहा गया कि कोर्ट ने अवैध निर्माण की कंपाउंडिंग को बंद कर दिया जो उचित नहीं है। इस निर्देश को मोडिफाई कर नियम के अंतर्गत कंपाउंडिंग की छूट दी जाए। ग्रीन जोन व ग्रीन एरिया में बदलाव पर रोक लगाई है तथा नए मास्टर प्लान में इसे ज्यों का त्यों रखना होगा, जबकि व्यापक जनहित में इसे उपयोग करने की छूट दी जाए और बदले में अन्यत्र ग्रीन एरिया चिह्नित कर दिया जाएगा। सभी पक्ष सुनने के बाद लार्जर बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पीएस नरसिम्हन ने कोर्ट को बताया कि जयपुर में जोनल प्लान बन चुका है और जोधपुर व अजमेर में प्रक्रियाधीन है। उन्होंने कोर्ट का ध्यान आकृष्ट किया कि छोटे शहरों में आबादी कम होती है, इसलिए अलग से जोनल प्लान की जरूरत नहीं है। जोनल प्लान में उल्लेखित होने वाली सारी चीजों का मास्टर प्लान में ही समावेश कर दिया जाता है। एएसजी ने कहा कि नियमों के तहत कंपाउंडिंग की छूट दी जानी चाहिए। कोई कंपाउंडिंग में द्वेषतावश दुरुपयोग कर रहा है तो कोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत उसे एग्जामिन भी कर सकती है। कोर्ट ने वर्ष 1966 के रूल्स को कंसीडर करते हुए कंपाउंडिंग के निर्देश दिए हैं, जबकि सरकार ने 25 अप्रैल 2017 को कंपाउंडिंग के लिए अलग से गाइडलाइन जारी की है, जो और बेहतर है। याचिकाकर्ता पूनमचंद भंडारी की ओर से अधिवक्ता अभिनव भंडारी ने पैरवी की। न्यायमित्र एमएस सिंघवी अन्य कोर्ट में व्यस्त होने की वजह से न्यायमित्र विनीत दवे उपस्थित थे। कोर्ट ने उन्हें लिखित में अपनी बहस पेश करने के लिए कहा। सभी पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई से इनकार

अगस्त 2017 में पावटा सी रोड व नेहरू पार्क के समीप सड़क सीमा में करवाए गए निर्माण पर यथास्थिति के अंतरिम आदेश दिए थे। इस आदेश को मोडिफाई करने के लिए एएजी राजेश पंवार ने आग्रह किया, लेकिन लार्जर बेंच ने सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा, कि सुप्रीम कोर्ट ने खंडपीठ के निर्देशों की ही सुनवाई करने के लिए कहा है, इसलिए यह प्रार्थना पत्र हाईकोर्ट की खंडपीठ ही सुनेगी। इसके अलावा अन्य प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के लिए अनुमति चाही, लेकिन कोर्ट ने मना कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सुनवाई पूरी

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 12 जनवरी 2017 को विस्तृत निर्देश दिए थे, लेकिन पिटीशन पेंडिंग रखी थी। सरकार ने 12 जनवरी को दिए आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को याचिका लौटाते हुए लार्जर बेंच से सरकार की आपत्तियों व निर्देशों पर फिर से सुनवाई करने के आदेश दिए थे। इसके तहत ही लार्जर बेंच में सुनवाई हुई।

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