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कुटुंब कुंभ| एक ही पुरोधा की 6 पीढ़ियों के 400 सदस्य जुटे, पर्दा प्रथा छोड़ने का संकल्प भी लिया

Jodhpur News - न्यूक्लियर फैमिलीज व एकल परिवार के दौर में यदि एक ही पुरोधा की छह पीढ़ियों के 400 सदस्य देशभर से आकर एक साथ एकत्र हों...

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2018, 05:05 AM IST
कुटुंब कुंभ| एक ही पुरोधा की 6 पीढ़ियों के 400 सदस्य जुटे, पर्दा प्रथा छोड़ने का संकल्प भी लिया
न्यूक्लियर फैमिलीज व एकल परिवार के दौर में यदि एक ही पुरोधा की छह पीढ़ियों के 400 सदस्य देशभर से आकर एक साथ एकत्र हों तो आश्चर्यजनक है। इसी आश्चर्य को असल में बदला मेड़ता के शिवपाल पुरोहित के वंशजों ने। पुरोहित की 8 बेटियां और 3 बेटे थे। आज इनमें से एक भी जीवित नहीं है, पर एक बेटे की पुत्रवधु राधादेवी पुरोहित 94 जीवित हैं। इन 11 भाई-बहनों के परिवार में 47 बच्चे हुए। आगे चलकर इन 47 के 208 संतानें, और 208 सदस्यों के 200 संतानें हुईं। इन 200 वंशजों के 45 बच्चे हुए। इसी परिवार के 400 सदस्य देशभर से जोधपुर में एकत्र हुए। कई लोग तो पहली बार आपस में मिले थे। भावुक पलों में गले लगकर सबने पुरानी यादें और पुरखों की बातें साझा कीं। इतना ही नहीं इस मौके पर परिजनों ने एकस्वर में शपथ ली कि अब परिवार में पर्दा प्रथा का त्याग किया जाएगा। इन सारे परिजनों को एक ही दिन एक जगह बुलाने का बीड़ा राधादेवी के पौत्र और मुंबई निवासी चंद्रशेखर पुरोहित ने उठाया।

पांच पीढ़ियां एक साथ

खत्म होते संयुक्त परिवार एवं बढ़ते एकल परिवार के दौर में अपनों से रिश्ता बनाए रखने के लिए देशभर से जुटे पुरोहित परिवार के सदस्य, कुरीति छोड़ने और पर्यावरण बचाने की पहल भी की

इसमें पुरोहित परिवार की 5 पीढिय़ां साथ नजर आ रही हैं। हालांकि परिवार की छह पीढिय़ां जीवित हैं, लेकिन राधादेवी पुरोहित तबीयत ठीक नहीं होने से कार्यक्रम में नहीं आ सकीं। तस्वीर में राधादेवी के ननद के पुत्र (80) महेशचंद्र, दोहिते मंडलदत्त (73), इनके पास पड़-दोहिते नटवरलाल बोहरा (73) और पडदोहिते महेंद्रकुमार देराश्री (69) बैठे हैं। उनके पास लड़ दोहिती प्रीति बोहरा (40) और प्रीति की बेटी लविश्का (5) वर्ष है।

4 पीढ़ी

देश के कोने-कोने से आए

कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए जोधपुर, मेड़ता, बीकानेर, किशनगढ़, अजमेर, मुंबई, खंडवा, बड़ौदा, आहोर और नागौर, बैंगलोर से परिवार के 400 सदस्य जोधपुर पहुंचे।

युवाओं ने पीढ़ियों के रिश्ते की डोरी फिर बांधी

पुरोहित ने बताया कि इस आयोजन को साकार करने में पूरे 2 साल लगे। 2 वर्ष पूर्व सबसे पहले परिवार के 20 सदस्यों का एक सोशल मीडिया ग्रुप बनाया गया। धीरे-धीरे इसमें सदस्यों को जोड़ते गए। तीन महीने पहले योजना रखी गई कि सबको मिलना चाहिए। सबकी सहमति से योजना परवान चढ़ी। सबका एक साथ एक जगह एकत्र होना बहुत कठिन था। जिम्मा युवा पीढ़ी ने संभाला। अपने बुजुर्गों से ऑडियो-वीडियो में अपील के मैसेज करवाए। सबके प्रोग्राम मैनेज करवाए। इतनी मशक्कत के बाद रविवार को आखिर वो दिन आया जब सारे परिजन एकत्र हुए। यादों और बातों के सिलसिले के साथ ही खूब मस्ती भी हुई। पुरोहित ने बताया कि फिर जल्दी ही मिलने के वादे के साथ सब विदा होंगे। विदाई के वक्त हर परिवार को एक पौधा दिया जाएगा।

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