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कांस्टेबल परीक्षा के नकल गिरोह के खिलाफ चार्जशीट करने की धाराएं ढूंढ़ रही है एसओजी

प्रदेश में हुई कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में नकल रोकने की परीक्षा में एसओजी फेल होने की स्थिति में आ चुकी है। वजह-...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 10, 2018, 05:05 AM IST

कांस्टेबल परीक्षा के नकल गिरोह के खिलाफ चार्जशीट करने की धाराएं ढूंढ़ रही है एसओजी
प्रदेश में हुई कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में नकल रोकने की परीक्षा में एसओजी फेल होने की स्थिति में आ चुकी है। वजह- जोधपुर रेंज व ग्रामीण पुलिस की जल्दबाजी से कार्रवाई का पूरा पेपर ही बिगड़ गया और डिस्ट्रिक्ट जज ने तो 21 पेज के बेल-ऑर्डर में साफ-साफ लिख दिया कि जब कोई अपराध ही नहीं हुआ तो आरोपियों को हिरासत में रखने का औचित्य ही नहीं है। इस आर्डर की अब एसओजी के आला अधिकारी समीक्षा कर रहे हैं, क्योंकि एसओजी को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट करने की धाराएं नहीं मिल रही हैं। जबकि यही कार्रवाई एसओजी खुद ने की होती, वह भी इन लोगों को इंटरसेप्शन पर ले चुकी थी और वह नकली परीक्षार्थियों के परीक्षा केंद्र में घुसने का इंतजार कर रही थी। ऐसा होता तो केस फेल होने की नौबत नहीं आती।

12 जुलाई

पुलिस की कार्रवाई

14-15 जुलाई को होनी थी परीक्षा। रेंज पुलिस को 20 जून को सूचना मिली। भीखाराम जाणी, सुरेश विश्नोई व अरूण के मोबाइल इंटरसेप्शन पर लिए। बातें रिकॉर्ड हुई कि फोटो एडिटिंग से फर्जी परीक्षार्थी बैठा रहे हैं, बदले में पांच-सात लाख रुपए ले रहे हैं। रेंज आईजी के निर्देश पर ग्रामीण एसपी की टीम ने 11 जुलाई को ही 11 जनों को पकड़ लिया। चार लाख रुपए व दस्तावेज बरामद कर लिए। आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 478 व 120 बी में कमिश्नरेट के खांडा फलसा थाने में केस दर्ज करवा दिया।

कोर्ट का फैसला

डिस्ट्रिक्ट जज नरसिंहदास व्यास ने आरोपियों के बेल-ऑर्डर में लिखा कि भारत सरकार के खिलाफ युद्ध की तैयारी, राज्य क्षेत्र में लूटपाट व डकैती की तैयारी ही धारा 122, 126 व 399 में अपराध है, अन्य अपराध की तैयारी करना नहीं। इसलिए जब अपराध ही नहीं हुआ तो इन धाराओं में किसी को हिरासत में रखना उचित नहीं कहा जा सकता। सरकार ने रेंज व कमिश्नरेट अलग बना रखे हैं तो हस्तक्षेप भी उचित नहीं है। एफआईआर से पहले अन्वेषण से संबंधित की गई कार्रवाई भी विधिसम्मत नहीं कही जा सकती।

केस फेल होने का खतरा:एसओजी को भारी पड़ रही है पुलिस की जल्दबाजी

(भास्कर ने उसी दिन बता दी थी पुलिस की चूक, डिस्ट्रिक्ट जज का फैसला भी वैसा ही)

भास्कर ने जताई थी आशंका

पुलिस कमिश्नरेट में हुई रेंज पुलिस की अपराध से पहले की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए थे। तत्कालीन रेंज आईजी हवासिंह घुमरिया ने कार्रवाई को पूरी तरह वैध बताया था। जबकि कमिश्नर अशोक राठौड़ ने इसकी वैधता पर संदेह जाहिर किया था। भास्कर ने बिना एफआईआर पकड़ने तथा अपराध होने से पहले किए एक्शन पर भी सवालिया निशान लगाए थे। पुलिस का तर्क था कि जैसे एसीबी एफआईआर से पहले पकड़ती है, उन्होंने भी पकड़ा है। जबकि एसीबी स्पेशल एक्ट में पकड़ती है।

एसओजी की परेशानी

तब एसओजी के आईजी दिनेश एमएन छुट्‌टी पर थे और नकल गिरोह की निगरानी डीआईजी संजय श्रोत्रिय कर रहे थे। ये लोग भी एसओजी के इंटरसेप्शन पर थे। जोधपुर में एसओजी के एएसपी रामदेव जलवानिया व इंस्पेक्टर शंकरलाल भी इन लोगों की बातें सुन रहे थे। एसओजी टीम आरोपियों को 14 जुलाई को परीक्षा केंद्रों से उठाने की तैयारी में थी। पुलिस ने पहले ही उठा लिया। एसओजी कार्रवाई करती तो अपराध हुआ माना जाता, क्षेत्राधिकार भी पूरा प्रदेश होने से केस मजबूत रहता। अब उन्हें चार्जशीट के लिए धाराएं ढूंढ़नी व कानूनी राय लेने की जरूरत पड़ रही है।

...क्योंकि

डिस्ट्रिक्ट जज ने बेल ऑर्डर में लिखा- अपराध ही नहीं हुआ, किसी को हिरासत में नहीं रख सकते।

तो अब...

ऑर्डर की समीक्षा कर निर्णय करेंगे: एडीजी

एटीएस-एसओजी के एडीजी उमेश मिश्रा का कहना है कि बेल-ऑर्डर को फाइल पर लेकर समीक्षा करेंगे। अफसरों से बात करने के बाद कोई व्यू रखेंगे और केस का निर्णय करेंगे।

अफसरों से पूछेंगे, चार्जशीट कैसे करें: आईओ

जांच अधिकारी इंस्पेक्टर शंकरलाल ने बताया कि हम तो अभी लोगों के बयान ले रहे हैं। चार्जशीट किन सेक्शन में करना है, अफसरों से मार्गदर्शन लेंगे। क्योंकि जिन धाराओं में केस है, वह तो कोर्ट में माना ही नहीं गया।

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