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धोखाधड़ी के आरोपियों को नहीं मिली राहत, अग्रिम जमानत खारिज

जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जोधपुर महानगर ने एक स्थानीय हैंडीक्राफ्ट व्यवसायी से 40 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी के दो...

Dainik Bhaskar

Aug 03, 2018, 05:05 AM IST
जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जोधपुर महानगर ने एक स्थानीय हैंडीक्राफ्ट व्यवसायी से 40 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी के दो आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, कि वर्तमान में व्यवसाय व वाणिज्यिक जगत में माल का बिना भुगतान किए खुर्द-बुर्द करने की घटनाएं दिनोदिन बढ़ती जा रही है, जिन पर अंकुश लगाना जरूरी है, अन्यथा ऐसे अपराधों से व्यवसाय व वाणिज्य जगत पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था अस्त-व्यस्त होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

मामले के अनुसार स्थानीय हैंडीक्राफ्ट फर्म सनसिटी आर्ट एक्सपोर्ट की ओर से जितेंद्र जैन ने स्थानीय पुलिस आयुक्त कार्यालय में परिवाद पेश कर बताया था कि फरीदाबाद निवासी अजय अब्रोल एवं उमा अब्रोल दो अन्य अनिवासी भारतीयों के साथ उसकी फैक्ट्री पहुंचे और माल को पसंद कर उसे खरीदने का आदेश दिया। खरीदी का यह आदेश एक अमेरिकन कंपनी को फरीदाबाद स्थित यूए कंसलटेंट के माध्यम से दिया गया। अपना विश्वास जमाने के लिए आरोपियों ने इस क्रय आदेश का भुगतान 10-15 दिनों में कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने एक अन्य क्रय आदेश कंपनी को दिया, आरोपियों के पिछले रिकाॅर्ड में बनी अच्छी छवि को देखते हुए प्रार्थी ने आरोपियों की मांग के मुताबिक इस माल का निर्यात बिल जोधपुर राजसिको आईसीडी पर नहीं भेजकर सीधा दी डब्ल्यू जेड मूंदड़ा पोर्ट पर भेज दिया। इसका भुगतान आरोपियों ने शीघ्र ही कराने का भरोसा प्रार्थी को दिलाया। कुछ समय बाद आरोपियों ने प्रार्थी की ओर से चार अलग-अलग बिलों और तारीख पर लगभग 40 लाख 40 हजार रुपए के भेजे गए माल का तकाजा करने पर आनाकानी शुरू कर दी। इस पर प्रार्थी ने आरोपियों पर माल के पैसों का भुगतान करने का दबाव बनाना शुरू किया तो आरोपियों ने इस पूरे प्रकरण से पल्ला झाड़ते हुए इस प्रकरण में उनके किसी भी लेन-देन से इनकार कर माल का भुगतान व माल वापस करने से मना कर दिया तथा माल को खुर्दबुर्द कर दिया। इस पर प्रार्थी ने पुलिस की शरण ली। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया और जांच में आरोपियों की संलिप्तता सिद्ध हुई। दाेनों आरोपियों की ओर से अग्रिम जमानत याचिका पेश की गई और कोर्ट को बताया, कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। इस मामले में उनका कोई लेना-देना नहीं है। जबकि सरकार की ओर से पेश हुए लोक अभियोजक शंकरलाल सिनवाड़िया ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्ष सुनने के बाद जिला व सेशन न्यायाधीश नरसिंह दास व्यास ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

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