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पूर्व अधिकारी का आरोप- प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान से कई पांडुलिपियां गायब, उनकी जगह रखे हैं लीपोप्रिंट

प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान से कई बेशकीमती पांडुलिपियां और ग्रंथों के गायब होने की सूचना को लेकर गफलत की स्थिति...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 10, 2018, 05:05 AM IST

पूर्व अधिकारी का आरोप- प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान से कई पांडुलिपियां गायब, उनकी जगह रखे हैं लीपोप्रिंट
प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान से कई बेशकीमती पांडुलिपियां और ग्रंथों के गायब होने की सूचना को लेकर गफलत की स्थिति बनी हुई है। विभाग के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिकायत की है कि जोधपुर सहित कोटा व भरतपुर के प्रतिष्ठानों से कई ग्रंथ-पांडुलिपियां गायब है और उनकी जगह लीपोप्रिंट रखे हुए हैं। वहीं विभाग इस शिकायत को गंभीरता से नहीं ले रहा। विभाग का कहना है कि इन पूर्व अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो चुकी है और सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके कई परिलाभ रोके हुए हैं, इसलिए वे झूठी शिकायतें कर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। दरअसल, प्रतिष्ठान के पूर्व वरिष्ठ शोध सहायक रामकिशन जाटव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बताया है कि जोधपुर के प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में कई दुर्लभ ग्रंथ और पांडुलिपियां गायब है। ऑरिजनल की जगह पर मुद्रित या लीपोप्रिंट रखे हुए हैं। शिकायत में ग्रंथ के नाम के साथ आवश्यक डिटेल दी हुई है। लेकिन विभाग के अफसर इस शिकायत को झूठी मानकर तवज्जो नहीं दे रहे हैं। विभाग के अनुसार कहीं से भी कोई ग्रंथ गायब नहीं है। कुछ ग्रंथ टोंक भेज दिए गए थे और बाकी जोधपुर में ही है।

कोई ग्रंथ गायब नहीं, हमारे पास सूची है, अपने पुराने विवाद के कारण पूर्व अफसर कर रहे शिकायत: विभाग

जाटव को 16 सीसीए के नोटिस दिए हुए हैं। जब वो सेवानिवृत्त हुए तब से उनके परिलाभ अभी तक नहीं मिले हंै। इसलिए वो शिकायत कर रहे हैं। कोई भी ग्रंथ प्रतिष्ठान से गायब नहीं हैं। हमारे पास सूची है। हमने उनको जवाब दे दिया है, पर वो शिकायत करते जा रहे हैं। - डॉ. वसुमति, इंचार्ज, प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान

शिकायतकर्ता ने कहा- मैंने दो बार भौतिक सत्यापन किया, कई गड़बड़ियां मिली

पूर्व अधिकारी जाटव ने अपने पत्र में लिखा है कि मैंने विभाग की अनुमति से ही जोधपुर स्थित प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में वर्ष 1999 और 2005 में दो बार भौतिक सत्यापन किया था। इसी दौरान चला कि जहांगीर प्रकाश, नृपति विला, दोहासार, मानमनोहर सहित रंगीन चित्र भी बड़ी संख्या में गायब थे। इसके अलावा पांच कल्पसूत्र, जिसमें 3545, 5351 और 7837 गायब मिले हैं। जिनके गायब होने की सूचनाएं विभाग में दी गई, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।

जोधपुर ही नहीं, कोटा, भरतपुर में भी दुर्लभ सामग्री गायब शिकायत सही, उसे मेरी सेवानिवृत्ति व परिलाभ से जोड़ना गलत

जोधपुर में बहुत कुछ गायब है। इसके अलावा कोटा, भरतपुर में भी दुर्लभ सामग्री गायब है। मैंने तो शिकायतें की है। पर विभाग जांच ही नहीं करवा रहा। इसकी तो उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। मेरी शिकायत को सेवानिवृत्ति और परिलाभ से जोड़कर बता रहे हैं, जो गलत है। - डॉ. रामकिशन जाटव, पूर्व अधिकारी

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