• Hindi News
  • Rajasthan
  • Jodhpur
  • माधव राठौड़ के पहले कहानी संग्रह "मार्क्स में मनु ढूंढती' का हुआ विमोचन
--Advertisement--

माधव राठौड़ के पहले कहानी संग्रह "मार्क्स में मनु ढूंढती' का हुआ विमोचन

Jodhpur News - वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सत्यनारायण का कहना था कि इस समय विचारधाराओं का घटाटोप है। विचारधाराओं के अंत की बात तो...

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2018, 05:06 AM IST
माधव राठौड़ के पहले कहानी संग्रह
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सत्यनारायण का कहना था कि इस समय विचारधाराओं का घटाटोप है। विचारधाराओं के अंत की बात तो साहित्य में काफी पहले ही हो गई थी, लेकिन अब यथार्थ को अभिव्यक्ति करने वाली कहानियों की जरूरत है और माधव राठौड़ बखूबी इसमें सफल हुए हैं। माधव की कहानियों में संभावना की उजली पगडंडी है। वे युवा कथाकार माधव राठौड़ के पहले कहानी संग्रह "मार्क्स में मनु ढूंढती' की लॉंचिंग सेरेमनी में बोल रहे थे। साहित्यकार हरिदास व्यास ने कहा कि इस समय सृजन की जितनी धाराएं हैं, उतनी पहले कभी नहीं रही। सभी विचारधाराओं में से अच्छे को आत्मसात कर एक व्यवहारिक पगडंडी तैयार की है युवा लेखक माधव राठौड़ ने। वरिष्ठ साहित्यकार और प्रोग्राम के चीफ गेस्ट प्रेम भारद्वाज ने माधव को आधुनिक सोच और नए यथार्थ के कथाकार की उपमा देते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बात करते हैं। ये कहानियां बहुत उम्मीद जगाती हैं। इनका प्रकटीकरण पहले क्यों नहीं हुआ? उन्होंने कहा, माधव की कहानियों के शीर्षक उदासी भरे हैं। इनका बैकग्राउंड बेचैनी, उदासी और अंधकार बना हुआ है। इससे थोड़ा बचना चाहिए था। वरिष्ठ कहानीकार हबीब कैफ़ी ने कहा कि माधव की चारों कहानी मिलकर एक कोलाज बनाती हैं जिसमे गरीबी, महानगर, उदासी और प्रेम सब शामिल हैं। किशोर चौधरी ने कहा कि कुछ रचनाकारों की रचनाएं स्वयं सी लगती है । इन कहानियों को पढ़ते हुए अपनी कहानियों से अनुभूति होती है। इन कहानियों में रेगिस्तान का दुख पसरा है वहीं कुछ गेप्स भी रहे हैं। ऐसा लगता है कि अचानक कूदकर किसी अन्य संसार में आ गए हों। प्रोग्राम में साहित्यकारों ने लेखक, पाठक और रचनाओं पर भी विस्तार से बात की। ब्लॉगर किशोर चौधरी ने विचारधाराओं को लेकर प्रश्न उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि आप बेहतर रचनाकार तब ही हो सकते हो, जब आप अच्छे व्यक्ति हों।

माधव की कहानियां बनाती हैं कोलाज जिसमें गरीबी महानगर, उदासी और प्रेम सब शामिल: हबीब कैफी

मेरे लिए लिखना जिम्मेदारी भी: माधव राठौड़

माधव राठौड़ ने प्रोग्राम की शुरुआत करते हुए कि हिटलर पेंटर बनना चाहता था लेकिन बन नहीं पाया। इसी तरह हर व्यक्ति में कोई न कोई चाहत होती है, जो पूरा कर लेता है वही सौभाग्यशाली होता है। उन्होंने कहा कि इस संसार में सुकून से जीना हो तो साहित्य की इंसान को बचाता है। माधव ने कहा कि इन कहानियों के पात्र कई दिनों तक बैचेन करते रहे हैं। मेरे लिए लिखना क्रिएटिव सेटिस्फेक्शन के साथ-साथ जिम्मेदारी भी है।

X
माधव राठौड़ के पहले कहानी संग्रह
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..