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जेडीए में घोटाले कर डी-बार हुई ठेका फर्म ने झूठा शपथ-पत्र देकर निगम से 7 करोड़ के काम ले लिए

जेडीए में घोटालों के कारण तीन साल के लिए डी-बार हुई ठेका फर्म मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने झूठा शपथ-पत्र देकर...

Dainik Bhaskar

Aug 04, 2018, 05:10 AM IST
जेडीए में घोटालों के कारण तीन साल के लिए डी-बार हुई ठेका फर्म मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने झूठा शपथ-पत्र देकर नगर निगम के टेंडर में न केवल हिस्सा लिया, बल्कि 7 करोड़ लागत की सीसी सड़कें व रिपेयरिंग के काम भी उठा लिए। वर्कआर्डर जारी करने के लिए पत्रावली चार दिन पहले ही जेडीए के साथ-साथ निगम आयुक्त का अतिरिक्त कामकाज संभालने आए दुर्गेश कुमार बिस्सा के पास पहुंची तो उन्होंने ठेका फर्म की करतूत पकड़ ली। उन्होंने तुरंत जेडीए से फर्म को डी-बार करने की पत्रावली निगम मंगवाई तो पूरा मामला उजागर हो गया। आयुक्त ने इस मामले में ठेका फर्म को ब्लेक लिस्टेड कर निगम कोष में जमा करवाई 50 लाख की धरोहर राशि जब्त कर ली है। निगम मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक अमरसिंह के खिलाफ झूठा शपथ-पत्र देने पर संबंधित पुलिस थाने में मुकदमा भी दर्ज करवाएगा। इसके लिए आयुक्त ने निर्देश जारी कर दिए हैं।

सिंगल टेंडर के कारण जारी हो जाता वर्कऑर्डर

मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक ने निगम में टेंडर भरते समय शपथ पत्र देकर स्वीकार किया कि उसका पूरे स्टेट में किसी भी सरकारी विभाग में कोई भी मामला विचाराधीन नहीं हैं आैर न ही उसके खिलाफ कोई कार्रवाई चल रही है। इस शपथ पत्र के आधार पर निगम ने विकास कार्यों के लिए सिंगल टेंडर प्रस्तुत करने वाली ठेका फर्म मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन कंपनी को वर्कऑर्डर जारी करने का फैसला ले लिया। अंतिम स्टेज पर सिर्फ आयुक्त के हस्ताक्षर होने बाकी थे, जैसे ही पत्रावली आयुक्त दुर्गेश कुमार बिस्सा के पास पहुंची तो उन्होंने फर्म की करतूत पकड़ ली।

लोकायुक्त में दर्ज मामले की जांच रिपोर्ट में हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

जेडीए की इस फर्म के खिलाफ लोकायुक्त में दर्ज मामले की जांच रिपोर्ट में हुए फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। जेडीए में गुम 128 पत्रावलियों की जांच के लिए गठित खन्ना जांच आयोग के सदस्यों द्वारा की गई इस जांच रिपोर्ट जेडीए ने लोकायुक्त को भेज दी थी। इसमें मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन कंपनी के अलावा एक अन्य फर्म के कार्यों के भुगतान को लेकर की गई इस जांच में पाया कि रजिस्ट्रेशन से भुगतान तक ठेका फर्मों को उपकृत किया गया था। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में लेखा शाखा इंजीनियरिंग विंग के कर्मचारियों-अधिकारियों की कार्यशैली पर भी टिप्पणी करते हुए लिखा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि उस समय (2010-2013) जेडीए का पूरा तंत्र ही निष्प्रभावी रहा। लेखा शाखा के अधिकारी कर्मचारियों ने अपने दायित्व का निर्वहन नहीं किया। जांच में इंजीनियरिंग के अफसरों का आचरण संदेहास्पद ठहराया गया है।

काम पूरा होने से पहले लेखा शाखा ने लौटा दी एफडीआर

मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन कंपनी की पड़ताल के बाद समिति ने लिखा था कि टेंडर के नियमों के तहत जमा गारंटी राशि कार्य के रखरखाव दायित्वपूर्ण होने का अंतिम भुगतान बिल के बाद लौटाई जाती है, लेकिन लेखा शाखा ने इससे पूर्व ही लौटा दी थी। नियमानुसार किसी भी तरह की जमानत राशि शिड्यूल राष्ट्रीयकृत बैंक के अतिरिक्त जमा नहीं होगी। फिर भी लेखा शाखा ने क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी की सावधि जमा कर ली थी। इतना ही नहीं एक ही एफडीआर को दो कामों के लिए दर्शाया गया जिसे तत्कालीन कर्मचारियों ने स्वीकार किया था।

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