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सीनियर के सम्मान में डॉ. माथुर ने ठुकरा दिया विभागाध्यक्ष का पद प्राचार्य को पत्र लिखकर डॉ. सांघवी को पुन: पद देने की सिफारिश

ऊंचा पद और पॉवर पाना हरेक की कामना होती है और इसके लिए जूनियर्स कई तरह के जतन भी करते हैं लेकिन डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 09, 2018, 05:10 AM IST

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    ऊंचा पद और पॉवर पाना हरेक की कामना होती है और इसके लिए जूनियर्स कई तरह के जतन भी करते हैं लेकिन डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी विभाग के जूनियर डॉक्टर्स सीनियर के रहते हुए विभागाध्यक्ष बनने से विनम्रता से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने प्राचार्य को एक पत्र लिखकर सीनियर डॉ. संजीव सांघवी को ही विभागाध्यक्ष बनाए रखने का आग्रह किया है। गौरतलब है कि डॉ. सांघवी को जोधपुर शहर में कार्डियोलॉजी का जन्मदाता कहा जाता है लेकिन वित्त विभाग की ओर से 30 मार्च को जारी आदेश की पालना में उन्हें विभागाध्यक्ष पद से हटाना पड़ा था। 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर प्रशासनिक पदों पर कार्यरत डॉक्टर्स को पद से हटाकर किसी अन्य को लगाया जाना जरूरी है। कार्डियोलॉजी विभाग में डॉ. सांघवी के अलावा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रोहित माथुर और डॉ. पवन शारड़ा हैं। कॉलेज प्रशासन ने विभागाध्यक्ष का चार्ज विभाग के सह आचार्य 39 साल के डॉ. माथुर को दे दिया था, लेकिन डॉ. माथुर ने प्राचार्य को पत्र लिखकर यह पद स्वीकार करने में असमर्थता बता दी।

    उनके रहते यह पद स्वीकार करना सीनियर के अपमान जैसा

    हमने डॉ. सांघवी से काफी कुछ सीखा है। उनके रहते हुए यदि मैं इस पद पर रहता हूं तो यह मेरे लिए डॉ. सांघवी जैसे सीनियर का अपमान करने जैसा होगा। मैंने मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल से आग्रह किया है कि डॉ. सांघवी जैसे सीनियर के रहते हुए मैं विभागाध्यक्ष के पद पर नहीं रह सकता हूं। इसलिए रिटायर होने तक डॉ. सांघवी को ही विभागाध्यक्ष बनाए रखा जाए और इस संबंध में उचित दिशा निर्देश जारी किए जाएं।

    डॉ. रोहित माथुर, सह आचार्य, कार्डियोलॉजी

    उन्होंने हमें कभी जूनियर नहीं माना: डॉ. शारड़ा

    डॉ. सांघवी ने कभी भी हमें जूनियर नहीं समझा है। हमेशा डॉ. रोहित और मुझे अपने दोनों हाथ समझकर इतने सालों से साथ में काम किया है। मैंने दूसरे मेडिकल कॉलेज में भी काम किया है। वहां एक जूनियर डॉक्टर कौनसा ऑपरेशन करेगा और कितनी देर में करेगा, यह भी विभागाध्यक्ष तय करते हैं, लेकिन जोधपुर मेडिकल कॉलेज में ऐसा नहीं है। इसलिए जब तक डॉ. सांघवी यहां कार्यरत हैं, तब तक वे ही विभागाध्यक्ष रहें, यह हम सब चाहते हैं।

    डॉ. पवन शारड़ा, सह आचार्य, कार्डियोलॉजी

    दोनों ने विभाग का हित सोच कर ही लिया होगा फैसला

    मैं डॉ. माथुर और डॉ. शारड़ा के इस आग्रह से अभिभूत हूं। इतनी छोटी उम्र में विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी पाना वाकई गर्व की बात है लेकिन एक सीनियर के लिए इसे छोड़ना उनका मेरे प्रति स्नेह को दर्शाता है। यह उन दोनों का निर्णय था और उन्होंने विभाग के हित में सोचते हुए यह निर्णय लिया है। अब यह सरकार पर है कि वह इस पर क्या दिशा-निर्देश देती है। मेडिकल कॉलेज से इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा के अधिकारियाें को इस संबंध में निर्णय लेने के लिए पत्र भेजा गया है।

    डॉ. संजीव सांघवी, सी. प्रोफेसर, कार्डियोलॉजी

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