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ट्रांसपोर्टर्स को ईवे बिल में जीएसटी नंबर डाल करना पड़ रहा व्यापार

जीएसटी के दायरे से बाहर हो चुके ट्रांसपोर्टर ऑनलाइन की शिथिल प्रक्रिया की मार झेल रहे हैं। ट्रांसपोर्टर छह-सात...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 04, 2018, 05:15 AM IST

जीएसटी के दायरे से बाहर हो चुके ट्रांसपोर्टर ऑनलाइन की शिथिल प्रक्रिया की मार झेल रहे हैं। ट्रांसपोर्टर छह-सात माह पहले जीएसटी नंबर कैंसिल करने की एप्लीकेशन डाल चुके हैं, पर सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया है। निर्णय में लेटलतीफी से ट्रांसपोर्टर को मजबूरन ईवे बिल में जीएसटी नंबर डालकर व्यापार करना पड़ रहा है। अगर सरकार ने शीघ्र ही इस संबंध में निर्णय नहीं लिया तो व्यापारियों को इसका नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। दरअसल जीएसटी सिस्टम शुरू हुए एक साल होने को है। सरकार ने ट्रांसपोर्टर को भी पहले जीएसटी के दायरे में डाल दिया था और हर बिलिंग का 5 प्रतिशत जीएसटी वसूली जानी थी। बाद में सरकार ने ट्रांसपोर्टर को इस दायरे से बाहर निकाल दिया। तब ट्रांसपोर्टर ने ऑनलाइन आवेदन कर जीएसटी नंबर कैंसिल करने की गुहार लगा, जो अभी तक सरकारी स्तर पर रुकी पड़ी है। इधर सरकार ने कुछ माह पहले इंटर और इंट्रा स्टेट ईवे बिल प्रणाली शुरू कर दी। इसमें ट्रांसपोर्टर को इश्यू किए ईवे बिल में जीएसटी नंबर अंकित करना अनिवार्य था। इसलिए ट्रांसपोर्टर को मजबूरन उन जीएसटी नंबर को हर ईवे बिल में डालना पड़ रहा है जिन्हें कैंसिल करवाने की एप्लीकेशन वे सात-आठ माह पूर्व ही दे चुके हैं।

हर स्टेट में अलग जीएसटी नंबर होने से आई थी मुश्किल - जब जीएसटी नंबर इश्यू हुए थे, तब ट्रांसपोर्टर ने भी लिए थे। एक के अतिरिक्त कई राज्यों में व्यापार होने के कारण इन्हें हर स्टेट में अलग-अलग आवेदन कर जीएसटी नंबर लेने पड़े। वे अपने उन राज्यों से संबंधित व्यापार में इस्तेमाल करते थे। इससे ट्रांसपोर्टर के समक्ष कई परेशानियां खड़ी हो गई थीं।

अब मिलेगा यूनिक नंबर

एक से ज्यादा राज्यों में व्यापार होने और ट्रांसपोर्ट होने में अलग-अलग जीएसटी नंबर से होने वाली समस्या को हटाने के लिए सरकार नए यूनिक नंबर इश्यू करेगी। जिसे ट्रांसपोर्टर ईवे बिल में डाल सकेंगे, ताकि राज्यों में परेशानी ना हो।

जल्द यूनिक नंबर नहीं आए तो व्यापार पर असर- ट्रांसपोर्टर ने अपने-अपने जीएसटी नंबर करीब 6-7 माह पहले सरेंडर कर दिए। अभी तक इन्हें नए यूनिक नंबर इश्यू नहीं किए गए हैं। ट्रांसपोर्ट किए हुए ट्रक का माल अगर कहीं पकड़ा गया तो वो अवैध के रूप में होगा। इसलिए ट्रांसपोर्टर नए नंबर मिल जाने तक माल ले जाने में आनाकानी कर सकते हैं।

यूनिक नंबर नहीं आए तो बढ़ेगी परेशानी

जब सरकार ने हमें जीएसटी के दायरे से बाहर कर दिया है तो हम क्यों यह नंबर रखें और नील रिटर्न भरें। इसलिए यह नंबर सरेंडर कर दिए हैं। काफी समय बीत चुका है, सरकार ने कुछ नहीं निर्णय नहीं लिया है। इसलिए मजबूरन हमें ईवे बिल पर सरेंडर किए जीएसटी नंबर डालकर जनरेट करना पड़ रहा है। - तरुण गहलोत, ट्रांसपोर्टर

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