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चातुर्मास : अपने जीवन में जैसा व्यवहार चाहते हैं, वैसा ही व्यवहार दूसरों के साथ करें: साध्वी जीवनकला

जोधपुर| शहर में चातुर्मास की रंगत जमने लगी है। संत-साध्वियां साधकों को जीवन के कल्याण की सीख देते हुए धर्म की राह पर...

Dainik Bhaskar

Aug 07, 2018, 05:15 AM IST
जोधपुर| शहर में चातुर्मास की रंगत जमने लगी है। संत-साध्वियां साधकों को जीवन के कल्याण की सीख देते हुए धर्म की राह पर चलने का संदेश दे रहे हैं। खैरादियों का बास स्थित श्री राजेंद्र सूरि जैन ज्ञान मंदिर त्रिस्तुति पौषधशाला में साध्वी दर्शनकला ने कहा, कि विनम्रता व्यक्तित्व का सौंदर्य है। छोटों के प्रति मधुरता और स्नेह, बड़ों के प्रति विनम्र आचरण मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारता है। बचपन से ही शिष्ट व्यवहार और नम्रता का पाठ सिखाया जाए तो बच्चे बड़े होकर अच्छे नागरिक बन सकते हैं। मनुष्य चाहे जितना विद्वान, वैज्ञानिक, नीतिज्ञ हो किंतु जब तक उसमें विनय नहीं हैं, तब तक वह सबका प्रिय और सम्माननीय नहीं हो सकता। साध्वी जीवनकला ने कहा, आप अपने जीवन में जैसा व्यवहार चाहते हैं, वैसा ही व्यवहार दूसरों के साथ करें।

सांसारिक रिश्ता क्षणिक, परमात्मा से स्थाई होता है : वैराग्यपूर्णा

मुहताजी मंदिर में साध्वी वैराग्यपूर्णा ने कहा, कि सांसारिक रिश्ते देह से उत्पन्न हो कर देह के साथ ही खत्म हो जाते हैं, परंतु आत्मा का परमात्मा के साथ रुहानी रिश्ता कल था, आज है और कल भी रहेगा। साध्वी प्रफुल्लप्रभा ने कहा, कि हद से ज्यादा खुशी और हद से ज्यादा गम किसी को मत बताओ, क्योंकि जिंदगी में लोग हद से ज्यादा खुशी में ‘नजर’ और हद से ज्यादा गम में ‘नमक’ जरूर लगाते हैं। श्री मुहताजी मंदिर ट्रस्ट के सचिव राजेश मेहता ने बताया, कि सोमवार को आयोजित अनुष्ठान का लाभ सोहनलाल रानीवाड़ा ने लिया।

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