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माता-पिता के निधन के बाद दत्तक बेटी ने मांगी अनुकंपा नौकरी, विभाग मुकरा तो कोर्ट ने दिया उसके पक्ष में फैसला

पीएचईडी में कार्यरत एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसकी प|ी काे अनुकंपा नौकरी मिली। दंपती के कोई औलाद नहीं होने पर...

Dainik Bhaskar

Aug 04, 2018, 05:15 AM IST
पीएचईडी में कार्यरत एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसकी प|ी काे अनुकंपा नौकरी मिली। दंपती के कोई औलाद नहीं होने पर उन्होंने एक बच्ची को गोद लिया। कुछ समय तक प|ी ने अनुकंपा नौकरी की। इस बीच उसकी भी मृत्यु हो गई। गोद ली हुई बेटी ने अनुकंपा नौकरी के लिए आवेदन किया, लेकिन वह नाबालिग होने की वजह से उसे कंसीडर नहीं किया गया। जब बालिग होने पर बेटी ने नौकरी मांगी तो यह कहते हुए मना कर दिया गया, कि अनुकंपा नौकरी देने का यह नियम केवल मृतक के परिवार को आकस्मिक सदमे से उबरने में मदद के लिए है, किसी कालातीत मामले के लिए नहीं हैं। दत्तक बेटी को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए बेटी को नौकरी देने व तीन महीने में फैमिली पेंशन का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।

भैरूनाडी जयनारायण व्यास कॉलोनी की रहने वाली कोमल पुरोहित की ओर से अधिवक्ता श्वेता बोड़ा ने याचिका दायर कर कोर्ट को बताया, कि रमेशचंद्र पुरोहित पीएचईडी में कार्यरत थे। इस दरम्यान 11 जून 2003 में उनका निधन हो गया। इस पर प|ी संतोष देवी पुरोहित ने अनुकंपा नौकरी के लिए आवेदन किया, जो स्वीकार कर लिया। इस बीच संतोष देवी ने बुढ़ापे में सहारे की उम्मीद में 14 जुलाई 2005 को याचिकाकर्ता को गोद लिया। गोद लेने की नियमानुसार प्रक्रिया भी पूरी की गई। संतोष देवी का भी 4 अप्रैल 2007 को निधन हो गया। इस पर बेटी ने चार महीने की अवधि में अनुकंपा नौकरी के लिए आवेदन किया, लेकिन याचिकाकर्ता की 13 साल की उम्र तथा बालिग नहीं होने की वजह से विभाग ने मामले को लंबित रखा। याचिकाकर्ता ने भी नियम को फॉलो करते हुए इंतजार किया। जब वह बालिग हुई तो विभाग को अनुकंपा नौकरी देने का आग्रह किया, लेकिन विभाग ने इनकार कर दिया। नौकरी नहीं देने का कारण यह बताया गया, कि अनुकंपा नौकरी का नियम केवल मृत के परिवार को आकस्मिक सदमे से उबरने में मदद के लिए है, किसी कालातीत मामले के लिए नहीं हैं। इस वजह से नौकरी नहीं दी जा सकती है। जस्टिस डॉ. पीएस भाटी ने याचिका को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता को अनुकंपा नौकरी देने के आदेश दिए। साथ ही कोर्ट ने उसके परिजनों को 90 दिन में फैमिली पेंशन का भी भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।

पति के निधन के बाद प|ी ने ली थी बेटी गोद, दो साल बाद उनकी भी हो गई मृत्यु

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