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जीएसटी नंबर सरेंडर किया, लेकिन निल का रिटर्न नहींं भरा तो संदेह के दायरे में

जीएसटी विभाग ने कहा-भले ही जीएसटी के दायरे से अलग हो गए हैं, लेकिन व्यापारियों को निल का रिटर्न भरना चाहिए सिटी...

Dainik Bhaskar

Aug 07, 2018, 05:15 AM IST
जीएसटी नंबर सरेंडर किया, लेकिन निल का रिटर्न नहींं भरा तो संदेह के दायरे में
जीएसटी विभाग ने कहा-भले ही जीएसटी के दायरे से अलग हो गए हैं, लेकिन व्यापारियों को निल का रिटर्न भरना चाहिए

सिटी रिपोर्टर | जोधपुर

जीएसटी को लेकर व्यापारियों की कई उलझनें यथावत हैं। जीएसटी के दायरे से बाहर हो चुके सेक्टर के व्यापारियों के सामने बड़ी मुश्किल रिटर्न को लेकर है। चूंकि वो जीएसटी के दायरे से बाहर हो चुके हैं इसलिए बड़ी संख्या में व्यापारियों ने रिटर्न नहीं भरें। वहीं दूसरी ओर जीएसटी विभाग का कहना है कि भले ही वो जीएसटी के दायरे से अलग हो गए हैं, लेकिन व्यापारियों को निल का रिटर्न भरना चाहिए। किसी ने अगर नहीं भरा है तो वे सब संदेह के दायरे में आएंगे।दरअसल एक वर्ष पूर्व जीएसटी को लागू किया गया था। तब ऐसे कई सेक्टर में जीएसटी को लागू कर दिया गया, जहां से बाद में हटाया गया। ट्रांसपोर्टर से जीएसटी को हटा लिया गया। अब कई ट्रांसपोर्टर और दूसरे व्यापारी हैं, जिन्होंने जीएसटी नंबर सरेंडर कर दिए, लेकिन कई दिनों या कुछ माह के बाद तक निल रिटर्न जमा नहीं करवाए। अब कुछ ने निल रिटर्न भर कर जमा करवाए हैं। पर विभाग की नजर ऐसे लोगों के पर है, जिन्होंने तत्काल नंबर सरेंडर नहीं किए और न ही निल रिटर्न जमा करवाए। क्यों कि सरकारी प्रावधान के तहत पर कइयों पर पेनल्टी भी लग सकती है, जो कि प्रतिदिन के हिसाब से होगी। ऐसे में विभाग उन की सूची बना रहा है, जिन्होंने निल रिटर्न जमा नहीं करवाए हैं।

ट्रांसपोर्टर का मामला अभी है अटका

इधर, जीएसटी के लडख़ड़ाते पोर्टल की वजह से ट्रांसपोर्टर व्यापारियों को परेशान होना पड़ रहा है। आठ माह बीत जाने के पश्चात भी इनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इन्होंने जीएसटी नंबर तो सरेंडर कर दिए। पर सरकार की ओर से एक से अधिक राज्यों में माल जाने पर मिलने वाली यूनिक नंबर नहीं दिए है। इस वजह से इन्हें अवैधानिक रूप से सरेंडर किए नंबर से ही व्यापार करना पड़ रहा है।

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