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सीजीएसटी व आरजीएसटी के नियम 89(5) को चुनौती, कोर्ट ने जीएसटी परिषद से मांगा जवाब

केंद्रीय सामान व सेवा कर नियम 2017 (सीजीएसटी) व राजस्थान सामान और सेवा कर नियम 2017 (आरजीएसटी) के नियम 89 (5) को श्रीराम लाइम...

Danik Bhaskar | Aug 07, 2018, 05:15 AM IST
केंद्रीय सामान व सेवा कर नियम 2017 (सीजीएसटी) व राजस्थान सामान और सेवा कर नियम 2017 (आरजीएसटी) के नियम 89 (5) को श्रीराम लाइम प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने याचिका को विचारार्थ स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार व जीएसटी परिषद को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

याचिकाकर्ता श्रीराम लाइम प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के अधिवक्ता संजय झवार और प्रतीक गट्टानी ने याचिका दायर की। याचिका में बताया गया, कि सीजीएसटी की धारा 54 (3) के प्रावधान (ii) के अनुसार किसी भी अप्रयुक्त इनपुट कर क्रेडिट (आईटीसी) की वापसी का दावा पंजीकृत व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है, जहां कर की दर के कारण क्रेडिट जमा हुआ है। सीजीएसटी नियम व आरजीएसटी नियमों का नियम 89 (5) इस संबंध में रिफंड की गणना के लिए सूत्र प्रदान करता है।

याचिका में बताया गया, कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय और राज्य के वित्त विभाग (कर प्रभाग) ने गत 18 अप्रैल की अधिसूचना के अनुसार जीएसटी परिषद की सिफारिश पर नेट आईटीसी की परिभाषा में संशोधन किया है। संशोधन के अनुसार जो खाते में प्राप्त इनपुट कर क्रेडिट को प्रतिबंधित करता है और रिफंड की गणना करते समय इनपुट सेवाओं की अनदेखी करता है। यह ध्यान देने योग्य है कि संशोधन 1 जुलाई 2017 से पूर्वदर्शी प्रभाव के साथ प्रभावी हुआ है, हालांकि, नेट आईटीसी की इस संशोधन परिभाषा से पहले इनपुट और इनपुट सेवाओं दोनों ही रिफंड की गणना में सम्मिलित होती थी।

अधिवक्ता ने कहा, कि सीजीएसटी व आरजीएसटी की धारा 54 (1) के तहत सरकार की नियम बनाने की शक्ति केवल धन वापसी प्रक्रिया को विनियमित करने के संबंध में है। उन्होंने कहा, कि सरकार को ऐसा कोई नियम तैयार करने का अधिकार नहीं है, जो सीजीएसटी अधिनियम के तहत उपलब्ध रिफंड का लाभ उठाने के लिए याचिकाकर्ता के अधिकार को नष्ट या कम कर देता है। उन्होंने कहा, कि सीजीएसटी नियमों के नियम 89 (5) के प्रावधान केवल इनपुट पर भुगतान किए गए कर का रिफंड प्रदान करते हैं। इस तथ्य की सराहना नहीं करते हैं कि उत्पादन आपूर्ति इनपुट के साथ-साथ इनपुट सेवाओं का परिणाम है। यह एक वास्तविकता है कि विनिर्माण क्षेत्र में इनपुट सेवाओं के उपयोग के बिना माल परिवहन एजेंसी की सेवाओं का लाभ उठाए बिना, संयंत्र और मशीनरी या कारखाने के निर्माण, कानूनी और लेखाकार सेवाओं, जॉब कार्य आदि की मदद के बिना उत्पादन वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति करना संभव नहीं है। इसलिए केवल इनपुट रिफंड देना पूरी तरह से अनुचित, तर्कहीन, भेदभावपूर्ण और दोषपूर्ण है।