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छोटेे स्टेच्यू पर करोड़ों खर्च करते हैं, ज्यूडिशियरी की बात आती है तो फाइल इधर-उधर घुमाते हैं : कोर्ट

कॉमर्शियल कोर्ट के लिए वित्तीय स्वीकृति नहीं देने पर पेश होंगे वित्त विभाग के प्रमुख सचिव विधि विभाग ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 07, 2018, 05:15 AM IST

कॉमर्शियल कोर्ट के लिए वित्तीय स्वीकृति नहीं देने पर पेश होंगे वित्त विभाग के प्रमुख सचिव

विधि विभाग ने संभाग मुख्यालय पर एक-एक कोर्ट खोलने की थी अनुशंसा, अगली सुनवाई 14 को

लीगल रिपोर्टर | जोधपुर

जिला मुख्यालय पर स्थापित कॉमर्शियल कोर्ट को बंद कर केवल जयपुर में सभी जिलों का क्षेत्राधिकार करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट की न्यायाधीश संगीत लोढ़ा व वीरेंद्र कुमार माथुर की खंडपीठ में सुनवाई हुई। संभागवार कॉमर्शियल कोर्ट खोलने के प्रस्ताव के बाद भी वित्तीय स्वीकृति नहीं देने पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, कि छोटे-छोटे स्टेच्यू लगाने पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए जाते हैं, जब ज्यूडिशियरी का मामला आता है तो बेवजह देरी की जाती है, मामले को इधर-उधर घुमा दिया जाता है। हाईकोर्ट ने तो कॉमर्शियल कोर्ट खोलने का नहीं कहा है, पॉर्लियामेंट ने कानून बनाया है, उसकी ही पालना की जानी है। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई तक वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने की स्थिति में वित्त विभाग के प्रमुख सचिव को तलब किया है। अगली सुनवाई 14 अगस्त मुकर्रर की है।

पिछली सुनवाई के दौरान, सरकार की ओर से जवाब दिया गया था, कि हाईकोर्ट से मिले प्रस्ताव के अनुसार विधि व विधिक कार्य विभाग ने जोधपुर, कोटा, भरतपुर, बीकानेर, उदयपुर व अजमेर संभाग मुख्यालय पर एक-एक कॉमर्शियल कोर्ट खोली जानी है, जबकि जयपुर में नौ कॉमर्शियल कोर्ट खोली जाएगी। यहां 100 केसेज के लिए एक कॉमर्शियल कोर्ट होगा। पंवार ने यह भी बताया, कि विभाग ने कोर्ट खोलने के लिए वित्तीय स्वीकृति के लिए वित्त विभाग को प्रस्ताव भिजवा दिया है। वित्तीय स्वीकृति मिलते ही अन्य औपचारिकता पूरी करके कोर्ट खोल दी जाएगी। हाईकोर्ट के प्रस्ताव के अनुसार संभाग मुख्यालय पर खोली जाने वाली कोर्ट का संभाग क्षेत्राधिकार होगा।

कोर्ट ने एएजी राजेश पंवार से पूछा, कि विधि विभाग द्वारा प्रस्ताव भेजने के बाद वित्त विभाग ने स्वीकृति क्यों नहीं दी है? इस पर उन्होंने बताया, कि पत्रावली सीएमओ के पास गई हुई है। इस पर कोर्ट ने कहा, कि वित्त और सीएमओ का दायित्व तो एक के पास ही है। फिर फाइल को क्यों घुमाया जा रहा है। अगर एक साथ सभी कोर्ट नहीं खोल सकते हैं तो कुछ तो करिए। कोर्ट खोलने को लेकर किसी तरह मसौदा या स्कीम लेकर नहीं आए। निस्संदेह इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत रहेगी, शुरुआत को करनी चाहिए। दो सप्ताह का समय देने के बावजूद कुछ नहीं किया गया। जबकि याचिकाकर्ता राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से कहा गया, कि हाईकोर्ट ने तो जिला मुख्यालय पर कोर्ट खाेलने की अनुशंसा की है। एक्ट के अनुसार कोर्ट खोली जानी है। पिछले अक्टूबर में इस दिशा में कोई प्रयास नहीं होने से काम प्रभावित हो रहा है। हाईकोर्ट की ओर से अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने पैरवी। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा, कि अगली सुनवाई तक अगर विधि विभाग के प्रस्ताव के अनुसार कॉमर्शियल कोर्ट की वित्तीय स्वीकृति नहीं दी जाती है तो फिर वित्त विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना होगा।

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