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सच्चे श्रावक बन दीन-दुखियों की सेवा व अच्छे कर्म करें

विभिन्न धर्मस्थलों पर विराजे संत-साध्वियां साधकों को परोपकार की सीख दे रहे हैं। इनका कहना है कि दीन-दुखियों की...

Dainik Bhaskar

Aug 04, 2018, 05:16 AM IST
सच्चे श्रावक बन दीन-दुखियों की सेवा व अच्छे कर्म करें
विभिन्न धर्मस्थलों पर विराजे संत-साध्वियां साधकों को परोपकार की सीख दे रहे हैं। इनका कहना है कि दीन-दुखियों की सेवा व अच्छे कर्म से ही जीवन सार्थक किया जा सकता है।

तीर्थंकरों ने जीवों पर उपकार करने का मार्ग बताया : श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, डंको बाजे रे में साध्वी कमलप्रभा ने कहा कि तीर्थंकरों ने सभी जीवों पर उपकार करते हुए तारने का मार्ग बताया है। उन्होंने सच्चे और अच्छे श्रावक बनने की सीख देते हुए श्रावक के 21 गुणों का बखान किया। संघ के सुमेरमल सेठिया ने बताया कि रविवार को दोपहर 2 से 3 बजे तक प्रश्न मंच का आयोजन होगा। वहीं संत रूपमुनि के स्वास्थ्य की मंगल-कामना के लिए नवकार महामंत्र का जाप कराया जा रहा है।

मनुष्य स्वयं अपना भाग्य विधाता है | खैरादियों का बास स्थित श्री राजेंद्र सूरि जैन ज्ञान मंदिर त्रिस्तुति पौधशाला में साध्वी दर्शनकला ने कहा कि, मनुष्य स्वयं अपना भाग्य विधाता है। साध्वी ने कहा कि मोक्ष प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि मनुष्य अपने पूर्व जन्म के कर्मफल का नाश करे और इस जन्म में किसी प्रकार का कर्मफल संग्रहित न करे।

व्यक्ति को अपने कल्याण के लिए तप करना चाहिए : चिरंतनर| विजय

गुलाब नगर में मुनि चिरंतन र| विजय ने कहा कि अपना कल्याण निश्चित होते हुए भी भगवान महावीर ने अपने जीवन में तप को अपनाया था। इसलिए हर व्यक्ति को अपने जीवन मे कर्मों की निर्जरा, पुण्य के बंधन और खाने-पीने की लालसा छोड़ने के लिए ऐसे तप से जुड़ना चाहिए। सकल मूर्ति पूजक संघ के संयुक्त तत्वावधान में विश्व शांतिधारा तप के तहत अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि मानव अपने आहार की नहीं, जप और तप की चिंता करे, इसी से जीवन का कल्याण और मोक्ष की प्राप्ति संभव है। गुलाब नगर संघ के प्रवक्ता गणपत सालेचा ने बताया कि शांतिधारा तप के तहत करीब 70 आराधकों द्वारा तप किया जा रहा है। यह तप 32 दिन का होगा, जिसमें 16 उपवास व 16 बियासने होंगे। यह 2 सितंबर को पूर्ण होगा।

सत्संग का साथ हमेशा संग रहता है : नादवंश

सद‌्गुरु कबीर सत्य उपदेश आश्रम, जालेली में नादवंश आचार्य ने कहा कि, सत्संग का साथ हमेशा संग रहता है, जो इंसान को ईश्वर से मिलाता है और कुसंगत इंसान को बुरे मार्ग पर ले जाती है। उन्होंने कहा कि जो जैसा करता है, उसको फल भी वैसा ही मिलता है। इस संसार में हर व्यक्ति अच्छे कर्म और दीन-दुखियों की सेवा करे।

तप की महिमा अपरंपार है : देवर्षिर|विजय

प्रभुवीर का मार्ग साधना और तपस्या का मार्ग है, जो जीवात्मा सोने की तरह इस तप की आग में तपती है, जो कुंदन बन जाती है। यह विचार विरागर| विजय ने शुक्रवार को क्रिया भवन में व्यक्त किए। श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक तपागच्छ संघ के प्रवक्ता धनराज विनायकिया ने बताया कि संघ की ओर से चौविहार हाउस का शुभारंभ किया गया।

अणुव्रत नैतिक गीत गायन प्रतियोगिता 6 को

अणुव्रत समिति जोधपुर के सहयोग व जीवन विज्ञान अकादमी द्वारा विद्यार्थियों के उन्नयन व नैतिक संस्कारों के जागरण के लिए 19वीं अणुव्रत नैतिक गीत गायन प्रतियोगिता सोमवार को सुबह साढ़े आठ बजे सरदारपुरा बी रोड स्थित केके अभिचंदानी मॉर्डन स्कूल में साध्वी कमलप्रभा सान्निध्य में होगी। कार्यक्रम संयोजिका डाॅ. सुधा भंसाली ने बताया कि प्रतियोगिता में 13 स्कूलों के बच्चे सहभागी बनेंगे। प्रतियोगिता में निर्णायक नंदलाल, कमला, हिमांशु शर्मा व शैला माहेश्वरी होंगी।

शांतिधारा तप जीवन के लिए महत्वपूर्ण : भक्तिर|

सरदारपुरा सी रोड स्थित श्री भैरूबाग तीर्थ में शुक्रवार को भक्तिर| विजय एवं मतिर|विजय महाराज ने कहा कि शांतिधारा तप जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, जिसे हर व्यक्ति को जीवन में एक बार अवश्य करना चाहिए। प्रवक्ता भूरमल मरडिया ने बताया कि शांतिधारा तप आराधना विभिन्न स्थानकों, मंदिरों व उपासरों में चल रहे हैं, जिसमें 300 तपस्वी तपस्या कर रहे हैं। यह तपस्या अनवरत 32 दिनों तक चलेगी।

कुछ बनने के लिए पहले विनम्र बनो : प्रफुल्लप्रभा

जीवन में कुछ सीखना है या कुछ बनना है तो इसकी पहली शर्त विनम्रता को धारण करना है। जब तक अपने अंदर अंहकार की भावना विद्यमान है तब तक सफलता अर्जित नहीं कर सकते। ये विचार नागौरी गेट स्थित श्री मुहताजी मंदिर प्रांगण में साध्वी प्रफुल्लप्रभा ने प्रवचन के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जिस इंसान ने विनय रूपी गुण जीवन में उतार लिया, समझो उसने सब कुछ हासिल कर लिया।

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