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एसएमएस अनुमोदन के लिए पौधरोपण के नाम पर हो रही वसूली, मांग रहे 500 रुपए की रसीद

एक हेक्टेयर से छोटी खानियों के लिए सिंपलीफाइड माइनिंग स्कीम (एसएमएस) लागू की गई है। इसमें विभाग की ओर से एक ऐसी शर्त...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 07, 2018, 05:20 AM IST

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    एक हेक्टेयर से छोटी खानियों के लिए सिंपलीफाइड माइनिंग स्कीम (एसएमएस) लागू की गई है। इसमें विभाग की ओर से एक ऐसी शर्त जोड़ दी गई है, जिससे सरकार का खजाना तो भर रहा है, लेकिन उसका भार खानधारकों पर आ गया है। पौधरोपण के नाम पर हर खान मालिक से 500 रुपए की संबंधित एसोसिएशन के नाम पर कटी हुई रसीद मांगी जा रही है। जो खानधारक यह रसीद नहीं कटा रहे हैं, उनकी एसएमएस अनुमोदित नहीं हो रही है। दरअसल छोटी खानियों के वैध रूप से संचालन के लिए एसएमएस स्कीम लागू की गई है। पांच वर्ष के लिए यह स्कीम बनाई गई है। गत 31 मार्च से पहले जारी एसएमएस की अवधि पूरी हो चुकी है और गत चार महीनों से जोधपुर के फिदुसर, चौपड़, पाबू मगरा, केरू, बेरू, पालड़ी सहित खनन क्षेत्रों में अवैध रूप से खनन कार्य हो रहा है, क्योंकि सरकार की ओर से पहले ईएमपी बनाने में देरी की गई और अब एसएमएस में। जोधपुर में तकरीबन 6 हजार खानें हैं और हर खान से 500 रुपए की पौधरोपण के नाम पर वसूली हो रही है। इस तरह 30 लाख रुपए विभाग में जमा हो रहे हैं। विभाग के जिम्मेदार 500 रुपए की रसीद काटने के लिए अधिकारिक रूप से नहीं बोल रहे हैं, लेकिन जितने भी क्लस्टर और एसोसिएशन हैं, उन खानधारकों को 500 रुपए की रसीद कटवानी पड़ रही है। हालांकि अफसर ऐसे किसी निर्देश से इनकार कर रहे हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने दबी जुबान में बताया, कि उन्हें 500 रुपए रसीद कटवानी पड़ रही है।

    Exclusive

    जोधपुर में 6 हजार से अधिक खानें, करीब 30 लाख रु. होंगे जमा

    एक हेक्टेयर से छोटी खानियों के संचालन के लिए सिंपलीफाइड माइनिंग स्कीम लागू है। इसके तहत खानधारकों को अपनी खान से जुड़ी आवश्यक जानकारी डालना पड़ती है। यह पांच वर्ष के लिए वैध होती है। हर पांच साल बाद इसे बनाया जाता है।

    क्या है एसएमएस

    पूर्व में ईएमपी की वजह से हुई थी देरी

    एसएमएस लागू होने से पहले एनवायरमेंट मैनेजमेंट प्लान (ईएमपी ) बनने में देरी हुई। सरकार ने यह तय करने में समय लगा दिया, कि ईएमपी बनाने का खर्च कौन देगा? खानधारक देगा या फिर सरकार काे वहन करना होगा। कई दिनों की जद्दोजहद के बाद यह तय हुआ था, कि ईएमपी डीएमएफटी से बनाई जाएगी, क्यों कि एसएमएस में ईएमपी का रिकॉर्ड भी शामिल होता है।

    बड़े पैमाने पर हाेगा पौधरोपण

    वैसे भी हर खानधारकों को ईएमपी की शर्त के अनुसार प्रतिवर्ष 5 पौधे लगाने होते हैं, लेकिन इस बार सामूहिक रूप से पौधरोपण किया जाएगा। इसलिए सामूहिक प्रयास से बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा।

    विभाग ने रसीद कटवाने के लिए नहीं कहा

    खान विभाग ने एसएमएस के लिए 500 रुपए की पौधरोपण के नाम रसीद कटवाने को नहीं कहा है। खान धारक और एसोसिएशन के सदस्य खुद ही दे रहे हैं।

    -श्रीकृष्ण शर्मा एमई, जोधपुर

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