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खुद की अदालत लगाने वाले पंचों को ‘असली अदालत’ ने किया तलब तो बंध गई घिग्गी

हाईकोर्ट में कोर्ट रूम के बाहर ग्रामीण वेशभूषा में बैठे ये लोग सिरोही की रेवदर तहसील के जीरावाला गांव के रबारी...

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2018, 05:26 AM IST
खुद की अदालत लगाने वाले पंचों को ‘असली अदालत’ ने किया तलब तो बंध गई घिग्गी
हाईकोर्ट में कोर्ट रूम के बाहर ग्रामीण वेशभूषा में बैठे ये लोग सिरोही की रेवदर तहसील के जीरावाला गांव के रबारी जाति के पंच हैं। जो गांव में खुद की अदालत लगा तुगलकी फरमान सुनाते हैं। शुक्रवार को इनका ‘असली अदालत’ से सामना हुआ। मामला एक सड़क हादसे में अपनी जाति के युवक की मृत्यु हो जाने पर पंचायत बैठाकर आरोपी पर 28 लाख रुपए का जुर्माना लगाने का था। जिसकी सुनवाई के लिए ये सभी 16 पंच हाईकोर्ट में पेश हुए। सुनवाई से 20 मिनट पहले कॉरीडोर में बैठे पंच घबराए हुए थे। सुनवाई की शुरुआत में जस्टिस विजय विश्नोई ने पूछा, आप में से कौन एक है, जो आगे आकर पूरी बात बता देगा। सबकी घिग्गी सी बंध गई, कोई आगे नहीं आया। जज ने एक पंच की ओर से इशारा करते हुए कहा- आप बताओ बा, उस दिन क्या हुआ था। जवाब मिला... मुझे नहीं पता। जज बोले, अरे पंचायती तो की थी, तो जवाब दिया, मैंने पंचायती नहीं की। जज ने पूछा, फिर किसने की, तो बोला- पंचायती तो ऊपर वाले ने की। यह सुनकर जज भी मुस्कुरा उठे और बोले कि यह ऑरिजनल पंच है, जो बात को कैसे घुमा देते है। फिर अपने निर्देश में उन्होंने कहा, इस तरह दंड लगाना गुनाह है, 18 सितंबर तक पैसा लौटाना होगा, वरना वसूली के आदेश दिए जाएंगे। -पूरी खबर पेज 2 पर

जज बोले- यूं पंचायती कर दंड लगाना गुनाह, पैसे लौटाएं, वरना वसूली होगी

सुनवाई से पहले कोर्ट की गैलरी में सकपकाए से बैठे पंच। फोटो- नरेश आर्य

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