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बाजार में Rs.19 में 1 किलो बिकने वाले बाजरे के लिए 465 रुपए प्रीमियम दे रही सरकार

सिटी रिपोर्टर | जोधपुर किसानों की फसल बीमा योजना के तहत बाजार में 19 रुपए किलो के भाव से बिकने वाले बाजरे का फसल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 02, 2018, 05:35 AM IST

बाजार में Rs.19 में 1 किलो बिकने वाले बाजरे के लिए 465 रुपए प्रीमियम दे रही सरकार
सिटी रिपोर्टर | जोधपुर

किसानों की फसल बीमा योजना के तहत बाजार में 19 रुपए किलो के भाव से बिकने वाले बाजरे का फसल बीमा के रूप में केंद्र व राज्य सरकार 465 रुपए अदा करेगी। जैसलमेर जिले की फतेहगढ़ तहसील के एक दर्जन गांवों में बाजरे की फसल प्रति हैक्टेयर करीब 31 से 50 किलो औसत फसल होती है। बदले में सरकार ने इस बाजरे के लिए 13 हजार 837 रुपए फसल बीमा के रूप में बीमा कंपनियों को दे रही है।

दरअसल, किसानों को उनकी फसल उत्पादन के दौरान विभिन्न प्रकार की आपदाओं से होने वाले नुकसान की जोखिम दिलाने के फसल बीमा योजना शुरू की गई। इसमें 40-40 प्रतिशत केंद्र व राज्य सरकार तथा 20 प्रतिशत राशि किसान से ली जाती है। इसी के तहत कृषि विभाग द्वारा घोषित गारंटी उपज के आंकड़े अनुसार जैसलमेर जिले के फतेहगढ़ तहसील के सितोड़ाई (पटवार सर्कल) गांवों में 39 किलो प्रति हेक्टेयर गारंटी उपज मानी गई है। फसल बीमा योजना में इस उत्पादन का 80 प्रतिशत जोखिम कवर किया जाता है जिससे वास्तविक गारंटी उपज 31 किलो प्रति हेक्टेयर रह जाती है। जिसका वर्तमान बाजार मूल्य 465 रुपए है। इस जोखिम के लिए केंद्र व राज्य सरकार किसानों का प्रीमियम मिलाकर बीमा कंपनियों को 13 हजार 837 रुपये का भुगतान कर रही है जो कि गारंटी उपज के वास्तविकता से दूर है।

किस गांव में प्रति किलो का किस भाव से हुआ इंश्योरेंस

गांव प्र.हैक्ट.किलो में राशि

सांगड़ 49 282

मंडाई 49 282

रिवड़ी 52 266

कपूरिया 46 300

देवीकोट 65 212

छोड़ 84 164

भाखरानी 60 230

कीता 87 159

रासला 54 256

सावंता 40 345

मूलाना 59 234

डांगरी 79 175

चेलक 51 271

रामा 81 170

देवड़ा 87 159

नरसिंगों की ढाणी 57 242

कोटड़ी 55 251

बईया 53 261

कुण्डा 46 300

लखा 44 314

मोढ़ा 50 276

सतो 61 226

तेजरावा 63 219

झिनझिनयाली 69 200

अड़बाला 64 216

छतांगर 64 216

तेजमालता 84 164

(नोट: यह आंकड़ा बाजरा फसल की प्रति किलो की दर से इंश्योरेंस कंपनियों को किए गए भुगतान का है।)

जानकारी के अभाव में अधिकतर किसान गलत लिखवाते है आंकड़े

गांवों में पटवारी द्वारा प्रति हैक्टेयर फसल उत्पादन का आंकड़ा इकट्ठा करते समय किसान अन्य प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए जानकारी के अभाव में सही उत्पादन की बजाय नाप-तौल में कम फसल उत्पादन के आंकड़े लिखवा देता है, जिसका नतीजा यह होता है कि इंश्योरेंस क्लेम के दौरान उनको उतनी राशि नहीं मिल पाती है, जितनी मिलनी चाहिए।

सात वर्ष तक उगने वाली फसल होती है आधार

इस योजना के तहत गत सात वर्षों के औसत (आपदा के अधिकतम 2 वर्ष छोड़कर) को गारंटी उपज मानते हुए फसल कटाई प्रयोग में आई उपज को घटाकर गारंटी उपज में हुई कमी को नुकसान मानते हुए फसल बीमा क्लेम दिया जाने का प्रावधान है।

सरकार इंश्योरेंस कंपनियों को दे रही है फायदा

राजस्थान में छह इंश्योरेंस कंपनियां फसल बीमा का इंश्योरेंस कर रही है। जोधपुर संभाग में एग्री क्राॅप इंश्योरेंस को इस काम को पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन सभी जिलों के ब्लॉक में स्थित प्रत्येक गांव में इंश्योरेंस की दर अलग है। साथ ही इंश्योरेंस कंपनियों को प्रीमियम के रूप में 31 किलो बाजरे की कीमत 13 हजार 837 रुपए देना सरकारी पैसे की ही बर्बादी है। - तुलसाराम सेंवर, प्रांतीय जैविक प्रमुख, भारतीय किसान संघ

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