• Hindi News
  • Rajasthan
  • Jodhpur
  • मास्टर प्लान: बहस आज भी जारी रहेगी, जोधपुर व अजमेर का जोनल प्लान जल्द ही बनेगा
--Advertisement--

मास्टर प्लान: बहस आज भी जारी रहेगी, जोधपुर व अजमेर का जोनल प्लान जल्द ही बनेगा

राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग, न्यायाधीश संगीत लोढ़ा व अरुण भंसाली की लार्जर बैंच में...

Dainik Bhaskar

Aug 02, 2018, 05:36 AM IST
राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग, न्यायाधीश संगीत लोढ़ा व अरुण भंसाली की लार्जर बैंच में बुधवार को मास्टर प्लान पर सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से बहस की गई। सरकार ने जोनल प्लान के मामले में जवाब पेश करते हुए कहा, कि जयपुर, जोधपुर व अजमेर में विकास प्राधिकरण बने हुए हैं, वहां जोनल प्लान लागू किए जाने हैं। जयपुर में जोनल प्लान लगभग पूरा हो चुका है। जोधपुर व अजमेर में भी शीघ्र पूरा कर दिया जाएगा। प्रदेश के अन्य शहर, जहां आबादी ज्यादा नहीं है, वहां नगर सुधार अधिनियम लागू है। इस अधिनियम के सेक्शन चार में मास्टर प्लान में ही सभी जरूरी प्रावधान कर दिए जाएंगे। वहां मास्टर प्लान पहले से ही हैं, इसलिए छोटे शहरों में जोनल प्लान बनाना अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा कंपाउंडिंग पर भी बहस की जो समयाभाव के चलते अधूरी रही। बहस गुरुवार को भी जारी रहेगी। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एडिशनल सॉलीसिटर जनरल पीएस नरसिम्हन ने बहस करते हुए कोर्ट को बताया कि जयपुर, जोधपुर व अजमेर में विकास प्राधिकरण गठित है तथा खुद के डवलपमेंट एक्ट हैं। इस एक्ट में जोनल प्लान बनाने का प्रावधान है, इसलिए यहां जोनल प्लान बनाए जा रहे हैं। जयपुर में जोनल प्लान का काम पूरा हो चुका है तथा नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है। जबकि जोधपुर व अजमेर में प्रक्रियाधीन है, जो कि शीघ्र ही पूरा हो जाएगा। एएसजी ने यह भी तर्क दिया, कि जयपुर, जोधपुर व अजमेर विकास प्राधिकरण के एक्ट में जोनल प्लान बनाए जाने का प्रावधान है, इसका मतलब यह नहीं है कि यहां बिना जोनल प्लान के स्कीम या अन्य विकास कार्य नहीं करवाए जा सकते हैं। जोनल प्लान के बिना भी स्कीम विकसित की जा सकती है। उन्होंने जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम 1982 की धारा 38 का हवाला देते हुए कहा, कि इसमें जेडीए को स्कीम बनाने की शक्ति प्राप्त है, इसका इसलिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जो कि जोनल प्लान नहीं है।

जोधपुर सहित 3 शहरों को छोड़कर अन्य में जोनल प्लान बनाना अनिवार्य नहीं, मास्टर प्लान में सभी चीजों का उल्लेख है : सरकार

रेगुलाइजेशन के बिंदु पर अधूरी रही बहस आज होगी

इस पर कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा, कि फिर तो स्कीम में पता नहीं क्या प्रावधान हो? इस पर एएसजी ने कहा, कि स्कीम में सुविधाएं हैं या नहीं, इसकी कोर्ट जांच कर सकता है। इस पर कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा, कल को ताे जोनल प्लान के बगैर यहां भी स्कीम बना सकते हो और कह सकते हो, कि स्कीम के लिए जरूरी सभी मूलभूत चीजें छोड़ दी गई है। एएसजी ने कंपाउंडिंग के बिंदु पर भी बहस करते हुए कोर्ट को बताया, कि कंपाउंडिंग के वर्ष 1966 के रूल्स के अनुसार निर्माण में बिल्डिंग की ऊंचाई, सेटबैक आदि के वॉयलेशन को कंपाउंड किए जाने का प्रावधान है। इस पर कोर्ट ने पूछा, कि यह रूल्स की किस धारा के तहत बनाए गए हैं? इस पर स्पष्ट किया गया, कि नगरपालिका अधिनियम की धारा 266 जो, कि अब नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 299 के अनुसरण में बनाए गए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा, कि इस धारा में तो अवैध निर्माण को नहीं, केवल अवैध निर्माण के कृत्य यानि अपराध को कंपाउंड करने का उल्लेख है। एएजी राजेश पंवार भी उपस्थित थे। जेडीए जयपुर की ओर से अधिवक्ता भरत व्यास ने रेगुलाइजेशन के बिंदु पर बहस की, जो कि समयाभाव के कारण अधूरी रही। बहस गुरुवार को भी जारी रहेगी।

X
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..