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एससी-एसटी और सवर्ण में नहीं कोई भेद; मारवाड़ की परंपराओं में सब एक हर वर्ण-धर्म के जातरू आते हैं, सेवा-सत्कार में सर्वसमाज के लोग जुटते हैं

अजा-जजा और सर्व समाज की चर्चाओं के बीच नया चेहरा दिखाती जोधपुर की समृद्ध संस्कृति

Danik Bhaskar | Sep 10, 2018, 11:03 AM IST
राजश्री निकुंभ मावली से आई जातरू डालीदेवी जीनगर के थके पैरों को एक्यूप्रेशर से राहत पहुंचाते हुए। घांची समाज की राजश्री जातरूओं की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं। राजश्री निकुंभ मावली से आई जातरू डालीदेवी जीनगर के थके पैरों को एक्यूप्रेशर से राहत पहुंचाते हुए। घांची समाज की राजश्री जातरूओं की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं।

जोधपुर. देशभर में पिछले कुछ दिनों से एससी-एसटी और ओबीसी-सवर्णों को लेकर जबरदस्त चर्चाएं हैं। जाति-पाति भेदभावों की बातों के बीच मारवाड़ी संस्कृति सौहार्द, सामंजस्य और सद्भाव का एक नया चेहरा दिखाती है।

बाबा रामदेव मेले में लाखों जातरू प्रदेश ही नहीं गुजरात, मध्यप्रदेश तक से आते हैं। इन जातरूओं में सभी जातियों के लोग होते हैं। बड़ी संख्या में जातरू अजा-जजा के भी होते हैं। हजारों किमी का सफर करने के बाद थके-भूखे जातरूओं की सेवा में सवर्ण जातियों के लोग भी जुट जाते हैं। किसी से जाति, धर्म, संप्रदाय नहीं पूछा जाता। मनुहार कर खाना खिलाने, पैर दबाने, मालिश करने, पैदल चलते चोटिल और छाले हुए जातरूओं के पैरों पर मरहम पट्टी करने में कभी एससी-एसटी या ओबीसी-सवर्ण जैसी बातें आड़े नहीं आती। रामप्रसाद महाराज ने बताया कि हमारी संस्कृति में कोई भेदभाव नहीं है। सेवा और सम्मान यहां की संस्कृति है। जातरू तो अतिथि हैं, और मारवाड़ तो अतिथियों के स्वागत-सत्कार के लिए जाना जाता है।

मेडिकल व्यवसायी अनिल चौहान समय निकालकर जातरूओं को मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करवाने का काम करते हैं। माली समाज के चौहान के अनुसार सेवा ही जाति है। मेडिकल व्यवसायी अनिल चौहान समय निकालकर जातरूओं को मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करवाने का काम करते हैं। माली समाज के चौहान के अनुसार सेवा ही जाति है।
सूरसागर स्थित बाबा के भंडारे पर जातरू की चोट पर पट्‌टी करते जसवंतसिंह इंदा। राजपूत समाज के इंदा कहते हैं कि जातरूओं की सेवा करना ही उद्देश्य है। सूरसागर स्थित बाबा के भंडारे पर जातरू की चोट पर पट्‌टी करते जसवंतसिंह इंदा। राजपूत समाज के इंदा कहते हैं कि जातरूओं की सेवा करना ही उद्देश्य है।