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शरीर के ऊपरी हिस्से में विकलांगता पर एमसीआई ने प्रवेश रोका, हाईकोर्ट ने गलत माना, गीतिका को अगले सत्र में एमबीबीएस में मिलेगा दाखिला

Jodhpur News - एक महिला अभ्यर्थी को केवल इसलिए एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश नहीं दिया गया, कि उसके शरीर के ऊपरी हिस्से में विकलांगता...

Bhaskar News Network

Dec 30, 2018, 04:31 AM IST
Jodhpur News - mci stopped entry on disability in upper body high court considered incorrect geetika admission in mbbs in next session
एक महिला अभ्यर्थी को केवल इसलिए एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश नहीं दिया गया, कि उसके शरीर के ऊपरी हिस्से में विकलांगता है। मेडिकल बोर्ड से जांच में फिट पाए जाने के बाद उसे एडमिशन देने के अंतरिम आदेश दिए, लेकिन सत्र 2018-19 की सारी सीटें भर जाने की वजह से एमसीआई ने प्रवेश देने में असमर्थता जताई, इस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने अगले सत्र 2019-20 में एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश देने के एमसीआई को निर्देश देने के साथ याचिका को निस्तारित कर दिया। भदवासिया जोधपुर निवासी याचिकाकर्ता गीतिका तंवर ने एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश के लिए नेशनल एंट्रेस एलिजिबिलिटी टेस्ट 2017 (नीट) में एससी केटेगरी में आवेदन किया था और वह दिव्यांग भी है। नीट में प्रत्येक केटेगरी में 5 प्रतिशत सीट दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित थी तथा उसकी केटेगरी में भी दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए 55 सीट आरक्षित थी। याचिकाकर्ता के उच्च अंक आने के बावजूद उसका इस केटेगरी में चयन नहीं हुआ। जब पड़ताल की गई तो उसे पता चला, कि एमएसीआई ने इसलिए उसका प्रवेश खारिज किया था, कि उसके शरीर के ऊपरी अंग में विकलांगता है। याचिकाकर्ता ने इस तरह प्रवेश खारिज करने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 24 नवंबर 2017 को कोर्ट ने रेस्पोडेंट एमसीआई व राज्य सरकार को नोटिस जारी किए और यह भी निर्देश दिए, कि उसका प्रवेश मेडिकल बोर्ड की जांच के अधीन रहेगा। कोर्ट ने 4 दिसंबर 2017 को मेडिकल बोर्ड गठित कर दिया और बोर्ड ने जांच रिपोर्ट दे दी। बोर्ड ने उसे फिट बताया, जिस पर कोर्ट ने नीट के कन्वीनर को याचिकाकर्ता की अभ्यर्थिता कंसीडर करने के अंतरिम आदेश दिए।

कोर्ट का आदेश आने तक भर चुकी थीं सभी सीटें

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट के समक्ष तर्क दिया गया, कि अंतरिम आदेश देने के बावजूद उसे एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश नहीं दिया गया। याचिकाकर्ता की कोई गलती नहीं है, इसकी अभ्यर्थिता गलत तरीके से खारिज की गई। एमसीआई की ओर से कहा गया, कि कोर्ट के निर्देश मिलने तक सारी सीट भर चुकी थी। ऐसे में सत्र 2018-19 में प्रवेश नहीं दिया जा सकता है। इस पर कोर्ट ने सभी पक्ष जानने के बाद कहा, कि याचिकाकर्ता की अभ्यर्थिता गलत खारिज की गई थी। द प्रोविजन ऑफ राइट ऑफ द पर्सन विथ डिसएबिलिटी एक्ट 2016 लागू करना अनिवार्य है तथा एमसीआई ने स्वयं इसे जान लिया है और उसकी पालना करने का निर्णय किया है। जस्टिस संगीत लोढ़ा व दिनेश मेहता की खंडपीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता को अगले सत्र 2019-20 में एमबीबीएस कोर्स में दाखिला देने के एमसीआई को निर्देश दिए हैं।

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