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सरकार से पूरे पैसे नहीं मिले, सिलिकोसिस पीड़ित भोमाराम का नहीं हो पा रहा इलाज

Jodhpur News - खानियों में काम करने के दौरान सिलिकोसिस बीमारी की चपेट में आए कैरू निवासी भोमाराम मेघवाल (36) आर्थिक संकट के चलते...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 03:40 AM IST
Jodhpur News - not receiving full payment from government treatment of silicosis sufferer bhomaram can not be done
खानियों में काम करने के दौरान सिलिकोसिस बीमारी की चपेट में आए कैरू निवासी भोमाराम मेघवाल (36) आर्थिक संकट के चलते अपना पूरा इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। भोमाराम को करीब छह साल से सिलिकोसिस की बीमारी है। उनका कमला नेहरू चेस्ट हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है, लेकिन सरकार की ओर से इलाज के लिए पूरी राशि नहीं मिलने से उन्हें व उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से तीन लाख रुपए में से उन्हें अब तक एक लाख रुपए ही मिले, जो इलाज पर खर्च हो चुके हैं। अब शेष राशि के लिए उनकी प|ी प्रशासन के पास चक्कर लगा रही हैं, लेकिन दो साल से सुनवाई नहीं हो रही है। सरकार से बाकी के रुपए नहीं मिलने पर परिजनों ने जैसे-तैसे अपने खर्चे पर भी इलाज जारी रखा, लेकिन खर्च ज्यादा होने पर उनको भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भोमाराम की शादी 15 साल पूर्व शांतिदेवी से हुई। उनके गोविंद (12), काशीराम (11), खम्मा (9) व भावना (8) चार बच्चे हैं। इन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उनके बूढ़े पिता पुटाराम के कंधों पर आ गया है। घर में मां व प|ी भोमाराम की सेवा करती है। ऐसे में परिवार का गुजर-बसर करना भी दूभर हो गया है।

सिटी रिपोर्टर | जोधपुर

खानियों में काम करने के दौरान सिलिकोसिस बीमारी की चपेट में आए कैरू निवासी भोमाराम मेघवाल (36) आर्थिक संकट के चलते अपना पूरा इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। भोमाराम को करीब छह साल से सिलिकोसिस की बीमारी है। उनका कमला नेहरू चेस्ट हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है, लेकिन सरकार की ओर से इलाज के लिए पूरी राशि नहीं मिलने से उन्हें व उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से तीन लाख रुपए में से उन्हें अब तक एक लाख रुपए ही मिले, जो इलाज पर खर्च हो चुके हैं। अब शेष राशि के लिए उनकी प|ी प्रशासन के पास चक्कर लगा रही हैं, लेकिन दो साल से सुनवाई नहीं हो रही है। सरकार से बाकी के रुपए नहीं मिलने पर परिजनों ने जैसे-तैसे अपने खर्चे पर भी इलाज जारी रखा, लेकिन खर्च ज्यादा होने पर उनको भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भोमाराम की शादी 15 साल पूर्व शांतिदेवी से हुई। उनके गोविंद (12), काशीराम (11), खम्मा (9) व भावना (8) चार बच्चे हैं। इन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उनके बूढ़े पिता पुटाराम के कंधों पर आ गया है। घर में मां व प|ी भोमाराम की सेवा करती है। ऐसे में परिवार का गुजर-बसर करना भी दूभर हो गया है।

सरकार से सहायता राशि नहीं मिल रही



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