आफत बना आदेश / गांवों में नहीं मिलता नेटवर्क, स्कूल से दूर रेत के टीलों या छत पर चढ़कर हाजिरी लगा रहे शिक्षक

राजकीय प्राथमिक विद्यालय धोकलनगर बुगड़ी में शिक्षकों को टीले पर जाकर हाजिरी लगानी पड़ती है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय धोकलनगर बुगड़ी में शिक्षकों को टीले पर जाकर हाजिरी लगानी पड़ती है।
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राजकीय प्राथमिक विद्यालय धोकलनगर बुगड़ी में शिक्षकों को टीले पर जाकर हाजिरी लगानी पड़ती है।राजकीय प्राथमिक विद्यालय धोकलनगर बुगड़ी में शिक्षकों को टीले पर जाकर हाजिरी लगानी पड़ती है।

  • राजस्थान सरकार ने राज्य के 68 हजार स्कूलाें के शिक्षाकर्मियों काे ऑनलाइन अटेंडेंस लगाने का आदेश दिया है
  • कई गांवों में मोबाइल नेटवर्क बमुश्किल मिल पाता है, इसलिए शिक्षकों को हाजिरी लगाने के लिए दूर तक जाना पड़ता है 

Dainik Bhaskar

Jan 22, 2020, 10:41 AM IST

जाेधपुर (रविंद्र शर्मा). प्रदेश की 68 हजार स्कूलाें के करीब 2.87 लाख शिक्षाकर्मियों काे अब अपनी उपस्थिति मोबाइल से शाला दर्पण पोर्टल पर ऑनलाइन लगानी हाेगी। सरकार का यह आदेश दूरदराज गांवाें की स्कूलाें में पढ़ा रहे शिक्षकाें के लिए आफत बन गया है।

कई गांवों में मोबाइल नेटवर्क बमुश्किल मिल पाता है। ऐसे में कोई शिक्षक स्कूल से आधा किमी दूर रेत के धोरों या छत पर चढ़कर कनेक्शन मिलने पर हाजिरी लगाने को मजबूर हैं। सुबह 10:30 बजे तक हाजिरी नहीं लगने पर कार्मिक को अनुपस्थित मान वेतन काट दिया जाएगा। संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा प्रेमचंद सांखला का कहना है कि कई गांवों के शिक्षकों की इस समस्या को आगामी बैठक में उठाएंगे। वहीं राजस्थान शिक्षक एवं पंचायतीराज कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष संतोक सिंह सिणली का कहना है कि सरकार को आदेश जारी करने से पहले स्कूलों में संसाधन उपलब्ध करवाने चाहिए।

केस 1: एक किमी तक नेटवर्क नहीं, टीलों पर चढ़ने को मजबूर शिक्षक

बाप के राजकीय प्राथमिक विद्यालय धोकलनगर बुगड़ी के शिक्षाकर्मी परेशान हैं। चारों ओर से रेत के टीलों से घिरी इस स्कूल के एक किमी के दायरे में नेटवर्क नहीं मिलता। शिक्षक रोहिताश सहित सभी चारों शिक्षकों को आधा किमी दूर 50 फीट के रेत के धोरों पर चढ़कर हाजिरी लगानी पड़ रही। कई बार वहां भी नेटवर्क नहीं मिलने पर अनुपस्थिति लग जाती है। 
 

केस 2: स्कूल की छत पर चढ़कर नेटवर्क ढूंढते हैं शिक्षक

राजकीय प्राथमिक विद्यालय माताजी की डोली रोहिणा में भी नेटवर्क नहीं मिलता। शिक्षक या ताे स्कूल की छत पर चढ़ नेटवर्क ढूंढते हैं या आधा किमी दूर जाकर हाजिरी लगा रहे। संस्था प्रधान रामकिशोर मीणा का कहना है कि छत पर भी हमेशा नेटवर्क नहीं मिलता। इस माथापच्ची में शिक्षण कार्य का समय भी बर्बाद हो रहा।

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